7 मई 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

जाळ-खेजड़ी पर मारवाड़ी मेवों की बहार, लुत्फ उठा रहे ग्रामीण

पीलू व सांगरी की सीजन

2 min read
Google source verification
समदड़ी. कस्बे के निकट खेजड़ी पर लगी सांगरी।

समदड़ी. कस्बे के निकट खेजड़ी पर लगी सांगरी।

-

समदड़ी ञ्च पत्रिका. गर्मी का बढ़ता असर व लू के थपेड़े आमजन को भले ना सुहाएं, लेकिन इनके चलते जाळ व खेजड़ी पर मारवाड़ी मेवे की
बहार नजर आ रही है। जितनी तेज गर्मी और लू बढ़ रही है, उतनी की तेजी से पीलू और सांगरी पक रहे हैं। एेसे में

जाळें व खेजडि़यां अब लटालूम नजर आ रही है।
पकने लगे पीलू - ओरण-गोचर आदि स्थानों पर जाळ के पेड़ बहुतायत हैं। भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच मारवाड़ी मेवा के नाम से प्रसिद्ध पीलू की बहार जाळ पर नजर आने लगी है। चारण वाड़ा गांव स्थित मामाजी की ओरण में खड़े जाळ के पेड़ इन दिनों पीलू से लटालूम हो गए हैं। एेसे में राहगीर भी इस मेवा का स्वाद लेने से नहीं चूक रहे हैं। गर्मी से पकने, पौष्टिक होने व पानी की मात्रा अधिक होने से ग्रामीण क्षेत्रों में लोग बड़े चाव से इन्हें खाते हैं। लोगों के अनुसार गर्मी में पीलू खाने से लू नहीं लगती। गांवो में लोग पीलू को एकत्रित कर उन्हे धूप में सुखाते है। सालभर तक उन्हें खाने में काम लेते हैं। लाल व पीले रंग के पीलू हर किसी का ध्यान अपनी और आकर्षित करते हैं।

संागरी- मारवाड़ के कल्पवृक्ष के नाम से विख्यात खेजड़ी पर सांगरी भी बड़ी मात्रा में आ गई है। सांगरी को सब्जी में काम में लिया जाता है। कच्ची सांगरी सांगरी की सब्जी भी बेहद लाजवाब होती है। उन्हें भी ग्रामीण एकत्रित कर गर्म पानी में उबाल कर सुखाते है। इस सूखी सांगरी को वर्ष भर सब्जी के रूप में काम में लेते हैं। शादी-समारोह, समारोह उत्सव आदि कार्यक्रमों में सांगरी की सब्जी बनती है। बाजारों में भी पांच से सात सौ रुपए किलो सांगरी बिकने से मजदूर वर्ग के लिए रोजगार का जरिया भी है। निसं.

समदड़ी. कस्बे के निकट खेजड़ी पर लगी सांगरी।

बड़ी खबरें

View All

बाड़मेर

राजस्थान न्यूज़

ट्रेंडिंग