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जल रहा बाग,’माली’ को नहीं परवाह,शहर के सबसे बड़े पार्क की अनेदखी,जानिए पूरी खबर

-आदर्श स्टेडियम परिसर में बने शहर के सबसे बड़ा पार्क की अनेदखी-सैकड़ों शहरवासी आते हैं भ्रमण के लिए

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Overlooked, city's largest park

Overlooked Of the city's largest park in adarsh stadium

बाड़मेर. पेड़ों के झुरमुट और ठंडी-ठंडी दूब भला गर्मी के मौसम में किसे पंसद नहीं आएगी। हर कोई गर्मी में पार्क में बैठकर राहत की तलाश करता है और पेड़-पौधे व दूब भीषण गर्मी में राहगीर को राहत भी देते हैं। लेकिन बाड़मेर के आदर्श स्टेडियम में बना पार्क अनदेखी के कारण पार्क कम उजड़ा चमन ज्यादा नजर आता है। गर्मी में यहां राहत के लिए आने वाले लोग मायूस ही होते हैं। पार्क में फैली दूब जल गई है। वहीं काफी बड़ी संख्या में पेड़-पौधे भी सूख चुके हैं, इसका कारण बस इतना है कि पार्क के पानी का कनेक्शन कट गया और फिर जिम्मेदारों ने इस तरफ ध्यान ही नहीं दिया। भीषण गर्मी में पिछले 20 दिनों से पेड़-पौधे प्यास के कारण सूख गए हैं।

-बिल नहीं भरने से पानी का कनेक्शन कटा-भीषण गर्मी में 20 दिनों से पेड़-पौधे प्यासे

नगर परिषद के क्लीन बाड़मेर के साथ ग्रीन बाड़मेर के दावे भी खोखले साबित हो रहे हैं। आदर्श स्टेडियम में नगर परिषद का पार्क उदासीनता का शिकार है। स्टेडियम में बने उच्च जलाशय से पौधों को पानी पिलाने के लिए कनेक्शन था। लेकिन अस्थायी होने व बिल नहीं भरने के कारण जलदाय विभाग ने पार्क का कनेक्शन काट दिया। नगर परिषद ने अब तक सुध नहीं ली है।

शहर का प्रमुख भ्रमण स्थल

स्टेडियम परिसर में बने पार्क में सुबह-शाम सैकड़ों लोग व बच्चे घूमने के लिए आते हैं। गर्मी के दिनों में पार्क ही ऐसी जगह होती है, जहां पर कुछ पल सुकून के बिताए जा सकते हैं। लेकिन अभी के हालात देखकर यहां आने वाले कुछ देर रुक कर ही लौट जाते हैं।

दूब के साथ जल गए पौधे

पार्क में लगी दूब तो पूरी तरह से जल गई है। पानी के अभाव में यहां लगे पेड़-पौधे भी सूख रहे हैं। पार्क में बने ट्रैक के पास लगे पौधे तो कतार में सूखे हुए नजर आते हैं। दूब सूख जाने से अब लोग भी पार्क में नहीं बैठ पाते हैं। दूब सूखने से सुकून की बजाय चुभने लगी है।

तीन कार्मिक संभालते हैं पार्क

स्टेडियम परिसर में बने पार्क की देखरेख व पेड़-पौधों को पानी पिलाने के लिए तीन कार्मिक लगाए गए हैं। लेकिन कनेक्शन कटा होने के चलते पानी नहीं आता है। ऐसे में कार्मिकों के पास भी कोई काम नहीं हैं।
पेड़-पौधों के साथ पंछी भी प्यासे

पार्क में पानी नहीं आ रहा है, इससे यहां घूमने आने वालों को तो पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। वहीं पानी के अभाव में यहां पंछियों के लगे परिंडे भी सूखे हैं। आमजन के साथ पंछियों को भी यहां पानी नहीं मिलता है। लोग तो पानी की बोतलें साथ लेकर आ जाते हैं, लेकिन पंछियों को पानी यहां पानी भी नसीब नहीं होता है।

बोले लोग
पार्क में न तो दूब नजर आती है और न हरियाली। चारों तरफ पार्क उजड़ा हुआ है।

-रितिक

पार्क में सुबह से शाम तक सैकड़ों लोगों की आवाजाही रहती है। लेकिन पेड़-पौधे सूखे होने से लोगों को मायूसी होती है।
-हिमांशु

देखरेख नहीं होने के कारण पार्क की दूब सूख गई है। अब तो यहां बैठने का मन भी नहीं करता है।

-करण

दूब सूखने से पार्क में गर्मी से कोई राहत नहीं मिल रही है। लोग परेशान ही होते हैं।
-सौरभ

गर्मी से राहत के लिए यहां घूमने आए थे। लेकिन सूखी दूब देखकर निराशा हुई है।

-हार्डी