
पचपदरा रिफाइनरी। फोटो: पत्रिका
बालोतरा। पश्चिमी राजस्थान के औद्योगिक भविष्य को नई दिशा देने वाली पचपदरा रिफाइनरी अब लोकार्पण के लिए तैयार है। 21 अप्रेल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों लोकार्पण होने के साथ ही यह परियोजना क्षेत्र में रोजगार और औद्योगिक विस्तार के नए अवसर खोलेगी। बालोतरा जिले की पचपदरा रिफाइनरी का निर्माण कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है और यहां क्रूड ऑयल की प्रोसेसिंग व टेस्टिंग भी शुरू हो गई है।
इसके शुभारंभ के साथ ही क्षेत्र में पेट्रोकेमिकल उद्योगों के विस्तार को नई गति मिलेगी। रिफाइनरी के आसपास राजस्थान पेट्रो जोन स्थापित किया है, जिससे सहायक उद्योगों के विकास की संभावनाएं बढ़ी हैं। बालोतरा पहले से ही पश्चिमी राजस्थान का प्रमुख औद्योगिक केंद्र है और रिफाइनरी के बाय-प्रोडक्ट आधारित उद्योगों के विकसित होने पूरे पश्चिमी राजस्थान की औद्योगिक तस्वीर बदलने की उम्मीद है।
वर्तमान में बालोतरा क्षेत्र में कपड़ा उद्योग में 50 हजार से अधिक और टाई-डाई उद्योग में करीब 20 से 25 हजार लोग कार्यरत हैं। पेट्रोजोन के विकसित होने से करीब 50 हजार नए रोजगार सृजित होने की संभावना है। इससे बाड़मेर, जोधपुर और पाली के औद्योगिक क्षेत्रों सहित करीब 300 प्लास्टिक व पैकेजिंग इकाइयों को लाभ मिलने की उम्मीद है, जिससे उत्पादन लागत कम होगी और प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
स्थानीय युवाओं को उद्योगों के अनुरूप तैयार करने के लिए राज्य सरकार ने बालोतरा में कौशल विकास हब स्थापित करने की घोषणा की है। रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल उद्योगों के विस्तार के साथ तकनीकी कौशल की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में यह हब युवाओं को रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण देकर उन्हें उद्योगों से जोड़ेगा और क्षेत्रीय औद्योगिक विकास को नई गति प्रदान करेगा।
रिफाइनरी शुरू होने के बाद पेट्रोकेमिकल और प्लास्टिक उद्योगों को कच्चा माल स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराया जाना आवश्यक है। इस संबंध में सरकार से स्पष्ट नीति बनाने की मांग की है। यदि स्थानीय उद्योगों को सीधे रॉ मैटेरियल उपलब्ध कराया जाता है, तो प्लास्टिक, फाइबर, पेंट, केमिकल्स, पैकेजिंग और फार्मा जैसे अनेक उद्योगों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। इससे न केवल उत्पादन लागत में कमी आएगी, बल्कि उद्योगों के विस्तार के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
अनुराग लोहिया, अध्यक्ष, जोधपुर इंडस्ट्रीज एसोसिएशन
रिफाइनरी के संचालन के साथ पेटकोक जैसे उप-उत्पाद का उत्पादन भी होगा, जिस पर चूना उद्योग काफी हद तक निर्भर है। इसके आवंटन के लिए एक संतुलित नीति बनाना जरूरी है, ताकि डाउनस्ट्रीम उद्योगों को निरंतर आपूर्ति मिल सके और औद्योगिक गतिविधियां प्रभावित न हों। वहीं नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना होने से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से नए रोजगार सृजित होंगे। इसमें तकनीकी, कुशल और अर्द्धकुशल श्रमिकों के साथ-साथ सेवा क्षेत्र में भी रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, जिससे शहरी ही नहीं बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
सोनू भार्गव, सचिव, जोधपुर इंडस्ट्रीज एसोसिएशन
01- लाख लोगों को रोजगार हैंडीक्राफ्ट सेक्टर में मिल रहा
50- हजार से ज्यादा रोजगार स्टोन इंडस्ट्री में मिल रहा
50- हजार से अधिक रोजगार कपड़ा उद्योग में मिल रहा
25 हजार के करीब रोजगार टाई-डाई उद्योग में मिल रहा
10- हजार से ज्यादा रोजगार स्टील उद्योग में मिल रहा
50- हजार के करीब नए रोजगार रिफाइनरी व पेट्रोजोन से मिलेंगे
Updated on:
17 Apr 2026 02:32 pm
Published on:
17 Apr 2026 02:31 pm
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