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राष्ट्रीय पक्षी मोरों की होगी गिनती, यहाँ तक जाएंगे कार्मिक, जानिये पूरी खबर

- 1 से 7 दिसंबर तक चलेगा विशेष अभियान

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बाड़मेर. वनविभाग के लिए इस बार राष्ट्रीय पक्षी मोरों की गिनती फौरी तौर पर नहीं होगी। मोरों को एक-एक गिनना होगा और इसके लिए गली-गांव और ढाणियों में जाना होगा। विभाग के पास चार सौ के करीब कार्मिक है और जिले में 2900 से ज्यादा राजस्व गांव है। 1 से 7 दिसंबर तक मोर गिनने का अभियान चलेगा।

वनविभाग हर साल वन्य जीवों की गिनती करता है लेकिन इस बार राष्ट्रीय पक्षी मोर की गिनती अलग से करने के आदेश जारी किए गए हैं। मोरों की गिनती में पहले तालाब या नदी पर विभागीय कार्मिक पहुंचते और यहां पानी पीने आने वाले वन्यजीव पर चूना या अन्य कोई संकेतक लगाकर उसे गिना हुआ मान लिया जाता है। यही संख्या वन्य जीवों का आधार रही है। इस बार राष्ट्रीय पक्षी मोर को लेकर नया आदेश जारी किया गया है। नदी-तालाब ही नहीं अब मोरों की गिनती के लिए हर जगह कार्मिकों को जाने के निर्देश दिए गए हैं।

कार्मिक ही नहीं तो कैसे पहुंचेंगे-

जिलेभर में वनविभाग के चार सौ के करीब कार्मिक है। इसमें अधिकारी से लेकर वनरक्षक तक शामिल है। कार्मिकों को हर गांव भेजा जाए तो भी जिले के 2500 गांव वंचित रह जाएंगे। जिले में 2900 से ज्यादा राजस्व गांव है और 5000 से अधिक तालाब और नाडियां है।

अभी केवल 3778 मोर-
पिछले साल तक की गणना में जिले में मोरों की संख्या 3778 बताई गई है। यह भी अविश्वसनीय आंकडा़ है। जिले के भांडियावास गांव में इस संख्या के आधे मोर मिल जाएंगे। यहां की ओरण में मोरों की बहुतायत के कारण यह गांव चर्चित है। इसके अलावा डीएनएपी क्षेत्र के 47 गांवों में बड़ी संख्या में मोर है।

मोर गिने जाना जरूरी-
रेगिस्तान के बाड़मेर जिले का क्षेत्रफल 28387 वर्ग किमी है। इतने बड़े क्षेत्र में मोरों की संख्या लगातार बढ़ ही रही है। राष्ट्रीय पक्षी को लेकर जिले में समृद्धि होने के बावजूद विभाग इसे ढंग से नहीं गिन रहा है। अरावली की पहाडि़यों और रेगिस्तान दोनों ही क्षेत्रों में राष्ट्रीय पक्षी बहुतायत में है।
गंभीरता से लेंगे- मोरों की गिनती का अभियान गंभीरता से लिया जाएगा। इसके लिए तैयारी कर ली गई है। इस बार सभी कार्मिक नदी-तालाब के अलावा अन्य स्थलों पर भी गिनती करेंगे। - चंद्रप्रकाश जोशी, क्षेत्रिय वन अधिकारी, वन विभाग बाड़मेर रैंज


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