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बाड़मेर जिला परिषद् की साधारण सभा स्थगित, जिला प्रमुख ने ही कर दिया बहिष्कार

जनता के मुद्दे गौण हो गए, सदन खाली हो गया...अफसर हावी हो रहे, अब यह मुद्दा हो गया

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Postponed General Meeting Barmer councildistrict chief as exclusion

पट्टिका में अफसरों के नाम लिखने से जनप्रतिनिधि नाराज

बाड़मेर. बाड़मेर जिला परिषद् की साधारण सभा की बैठक बुधवार को छह माह बाद हुई, लेकिन हंगामे की भेंट चढ़कर कोरम के अभाव में स्थगित हो गई। चौंकाने वाली बात यह रही कि जिला प्रमुख समेत कांग्रेस के सभी सदस्यों ने बैठक का बहिष्कार कर दिया। जिला प्रमुख सदन की मुखिया है। उनके अनुसार ही बैठक की तिथि तय होती है, लेकिन प्रमुख ही बैठक का बहिष्कार कर चलती बनीं। अफसरों की मनमानी, उद्घाटन पट्टिका में जनप्रतिनिधियों का नाम नहीं लिखने, रोक के बावजूद अधिकारियों का नाम लिखने से मामला गरमाया। बैठकों में रखे मुद्दों व निर्णयों की पालना नहीं होने के मुद्दे पर भी जिम्मेदारों को आड़े हाथों लिया गया। इस दौरान सांसद व संसदीय सचिव कभी एक दूसरे का तो कभी सीईओ का मुंह ताकते रहे। आखिरकार वे भी चलते बने।

बैठक इसलिए जरूरी थी

-छह माह बाद हो रही थी
- नरेगा के आगामी वर्ष के प्लान का अनुमोदन होना था

- जलदाय, विद्युत,समाज कल्याण व शिक्षा विभाग की योजनाओं की प्रगति पर चर्चा
- गांवों में बनी सड़कों की गुणवत्ता पर रखनी थी राय

हुआ यह

- पहले अधिकारियों की मनमानी का आरोप लगा
- कांग्रेस सदस्य एक-एक करके खिसके

- जिला प्रमुख ने भी कर दिया बहिष्कार
- बाद में भाजपा सदस्य भी निकल लिए बाहर

- आखिरकार कोरम के अभाव में हुई स्थगित

नतीजा क्या निकला
- ग्रामीण योजनाओं पर चर्चा नहीं हो सकी

- आम जनता से जुड़ी किसी समस्या पर सदस्य नहीं बोले
- सदस्यों के लिए भोजन भी बनाया, लेकिन उनके नहीं खाने से अन्य लोगों को खिलाना पड़ा

- सदस्य मूल एजेंडे से भटक गए
- जिम्मेदार अधिकारियों की बल्ले-बल्ले, उन्हें जवाब नहीं देना पड़ा

यूं करते तो बात बनती
अगर कुछ गलत हुआ है। अधिकारियों ने मनमानी की है तो बैठक में उनसे जवाब मांगा जाता। बाकायदा कार्यवाही विवरण में इसे लिखते। इसका असर होता और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई भी होती। लेकिन ऐसा कुछ नहीं किया। जिला परिषद की बैठक से पूर्व ही एक स्थाई समिति की बैठक ली गई लेकिन छह माह बाद हुई बैठक की अनदेखी कर दी।

हंगामे की कुछ झलकियां
- प्रधान पुष्पा चौधरी ने बाड़मेर क्षेत्र के एक भवन की पट्टिका दिखाते हुए कहा कि यह कहां तक ठीक है? जहां जनप्रतिनिधि का भी नाम नहीं है।

- कांग्रेस सदस्यों के बाहर जाने पर सदस्य रूपसिंह राठौड़ ने चुटकी ली कि कांग्रेस मैदान छोड़ कर भाग गई।
- कांग्रेस विधायक समेत कई सदस्यों ने जवाब दिया कि मैदान नहीं छोड़ा, आम जनता की लड़ाई लड़ रहे हैं।

- सांसद कर्नल सोनाराम बार-बार सीईओ से पूछते रहे कि सदस्य आ रहे हैं या नहीं।
- तभी एक सदस्य ने कहा कि विकास अधिकारी इनके नियंत्रण में नहीं है।

असली मुद्दा यह तो नहीं

हाल ही में बाड़मेर पंचायत समिति के मुरटाला गाला गांव में नवनिर्मित ग्राम पंचायत भवन का उद्घाटन हुआ, जिसमें सांसद के अलावा जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और विकास अधिकारी का नाम तो था लेकिन जिला प्रमुख, विधायक व प्रधान का नाम ही गायब था। ऐसे में कांग्रेस सदस्य नाराज थे। इसी तरह पाटोदी में भी पूर्व में जनप्रतिनिधियों को दरकिनार कर अधिकारियों का नाम पट्टिका में लिखने की शिकायत हुई थी, जिसमें अभी तक कार्रवाई नहीं हुई।
इनका तर्क है

जिला प्रमुख उपस्थिति नहीं है। कोरम का अभाव होने से बैठक को स्थगित की जाती है। जनप्रतिनिधियों के नाम के सवाल पर कहा कि दो पक्षों को नाम को लेकर बताया है। पट्टिका पर अधिकारी व कर्मचारी का नाम नहीं लिख सकते है। - एम.एल.नेहरा, मुख्य कार्यकारी अधिकारी

- अफसरशाही हावी
अधिकारी जनप्रतिनिधियों की एक नहीं सुन रहे है। इसका कांग्रेस पुरजोर विरोध करेगी। यह सब सरकार के इशारों पर हो रहा है। जनता परेशान है। - प्रियंका मेगवाल, जिला प्रमुख