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पर्यावरणीय स्वीकृति के लिए जनसहभागिता

- किसानों व जनप्रतिनिधियों ने तेज किए विरोध के स्वर

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Public participation for environmental acceptance

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बायतु- कैयर्न व वेदांता कंपनी के बाड़मेर बेसिन मे तेल उत्पादन बढ़ाने व नए आवंटित तेल ब्लॉक को लेकर पर्यावरणीय स्वीकृति के लिए जनसहभागिता बैठक शुक्रवार को राउप्रावि सरका पार में होगी। इसमें कंपनी के अधिकारियों के साथ जिला कलक्टर व पर्यावरण प्रदूषण बोर्ड के अधिकारी मौजूद रहेंगे। गौरतलब है कि 21 अगस्त को भी इस संबंध में बैठक रखी गई थी, जिसमें ग्रामीणों ने विरोध किया था, जिसके बाद बैठक स्थगित हो गई।

इधर, इस बैठक से पूर्व गुरुवार रात कवास में किसानों व जनप्रतिनिधियों की बैठक हुई, जिसमें समस्या समाधान नहीं होने तक विरोध का निर्णय किया गया। बैठक मेें निर्णय किया गया कि जब तक कम्पनी की ओर से विभिन्न गतिविधियों के चलते किसानों को हुए नुकसान का मुआवजा नहीं दिया जाता, विरोध जारी रहेगा। इस मौके पर कवास सरपंच रमेश कुमार गोलिया, भंवरलाल भांभू, बांकाराम धतरवाल, गौतम गोसांई जाखड़, लिखमाराम भांभू, भोमाराम सियाग, अन्नाराम खोथ, हरजीराम खोथ, जीयाराम, दीपक कड़वासरा आदि उपस्थित थे। किसानों के विरोध को लेकर कैयर्न की ओर से प्रवक्ता ने कहा कि कम्पनी पर्यावरण को लेकर मानदण्डों के अनुसार कार्य कर रही है। जनसुनवाई आमजन से संवाद का माध्यम है, जिसमें किसान अपनी बात रख सकते हैं। उचित समाधान किया जाएगा।

और इधर...

तेल उत्खनन क्षेत्र में प्रदूषण फैलाने का आरोप

बाड़मेर. पर्यावरणविद् एवं पीडि़तों ने बाड़मेर में तेल उत्खनन क्षेत्र में कंपनियों की ओर से प्रदूषण फैलाने का आरोप लगाया। किसान जोरसिंह ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि तेल उत्खनन क्षेत्र में उच्च स्तर पर प्रदूषण फैलाया जा रहा है। उनका आरोप है कि इससे किसानों के खेत खराब हो गए हैं। कंपनी कानून व पर्यावरण नियमों की अवहेलना कर रही है। इस दौरान हनुमान खोथ, भूराराम, मोटाराम, रामलाल शिवर, भोमाराम पोटलिया, यशोवर्धन शर्मा, दीपक कड़वासरा, विरधाराम सियाग, हनुमान बेनीवाल, जगदीश कड़वासरा ने पर्यावरण प्रदूषित करने आरोप लगाए।

पर्यावरण मानक लागू करने को प्रतिबद्ध इधर, केयर्न ऑयल एंड गैस के प्रवक्ता के अनुसार केयर्न अपनी सभी साइट्स पर पर्यावरण के ग्लोबल मानक लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। गत डेढ़ दशक से अधिक अंतराल में अपनी संक्रियाओं के दौरान राजस्थान में भी स्वास्थ्य-सुरक्षा-पर्यावरण गुणवत्ता को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कायम रखा गया है।

समय-समय पर सरकारी व तृतीय पक्ष ऑडिट में मापदंडों की पुष्टि हुई है। इस संबंध में किसी भी समस्या को सुनने और उसके निराकरण के प्रयास के लिए तत्पर हैं। जन सुनवाई एक ऐसा ही मंच है जहां हम इन विषयों पर संवाद स्थापित करने के लिए उपस्थित होते हैं।


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