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राजस्थान में क्रूड ऑयल रिसाव के बाद कंपनी का बड़ा दावा, 20 तेल के कुएं किए गए बंद, भूकंप के दावे ने बढ़ाई उलझन

बाड़मेर में केयर्न वेदांता के ऐश्वर्या वेलपैड-8 से जुड़े क्षेत्र में किसान हरजीराम खोथ के खेत में पांच दिन तक कच्चे तेल का रिसाव हुआ। कंपनी ने 20 से ज्यादा कुएं बंद कर जांच शुरू की।

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Barmer Crude Oil Leak
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Barmer Crude Oil Leak (Patrika Photo)

Barmer Crude Oil Leak: बाड़मेर: राजस्थान के सरहदी जिले बाड़मेर से एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है। यहां एक किसान के खेत से अचानक कच्चा तेल निकलने के बाद हड़कंप मच गया है।

बता दें कि पिछले पांच दिनों से जारी यह रिसाव शुक्रवार को रुक तो गया, लेकिन इसने सुरक्षा और पर्यावरण को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एहतियात के तौर पर केयर्न वेदांता कंपनी ने अपने 'ऐश्वर्या वेलपैड-8' से जुड़े 20 से ज्यादा कुओं को बंद कर दिया है।

भूकंप या ब्लास्ट? ग्रामीणों और कंपनी के अपने-अपने दावे

इस घटना की शुरुआत 23 फरवरी को हुई थी। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि 24 फरवरी की रात इलाके में एक जोरदार धमाका सुना गया था, जिसके बाद रिसाव की स्थिति और गंभीर हो गई। हालांकि, कंपनी ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है।

कंपनी के मीडिया मैनेजर मुकेश मथराणी के अनुसार, उस रात रात 11:25 बजे इलाके में 3.2 तीव्रता का भूकंप आया था। कंपनी का कहना है कि राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र की वेबसाइट पर भी इसकी पुष्टि हुई है। भूकंप का केंद्र तेल क्षेत्र से दूर और जमीन से करीब 5 किमी गहराई पर था, जबकि कंपनी की ड्रिलिंग महज 2 किमी तक ही सीमित है।

उत्पादन पर पड़ा असर, एक-एक पाइपलाइन की होगी जांच

तेल रिसाव के कारणों का सटीक पता लगाने के लिए कंपनी ने पूरे वेलपेड पर 'शट डाउन' ले लिया है। इस शट डाउन की वजह से प्रतिदिन लगभग 5,000 बैरल तेल का उत्पादन प्रभावित हो रहा है।

अब कंपनी की टेक्निकल टीमें एक-एक पाइपलाइन सेक्शन की बारीकी से जांच करेंगी, ताकि लीकेज के सही पॉइंट को पकड़ा जा सके। सुरक्षा के लिहाज से प्रभावित इलाके को टीनशेड से ढक दिया गया है और आम लोगों की आवाजाही प्रतिबंधित कर दी गई है।

किसान का दर्द

यह रिसाव किसान हरजीराम खोथ के खेत में हुआ है। हरजीराम के मुताबिक, उनकी 6 बीघा जमीन में से 4 बीघा पूरी तरह कच्चे तेल की चपेट में आ चुकी है। हरजीराम ने बताया, मेरे खेत में बाजरे की फसल होती थी, लेकिन अब यह जमीन किसी काम की नहीं रही।

कंपनी ने गड्ढे खोदकर तेल निकालने की कोशिश की है, 5 दिनों में 60 से ज्यादा टैंकर भरे जा चुके हैं। मिट्टी की परतें खराब हो गई हैं, मुझे डर है कि अगले 50 सालों तक यहां कुछ नहीं उगेगा।

कैसे काबू पाया जा रहा है हालात पर?

तेल के फैलाव को रोकने के लिए कंपनी ने जेसीबी मशीनों से करीब 100 मीटर लंबी खाई खोदी है, ताकि तेल बहकर एक निश्चित गड्ढे में जमा हो सके। वहां से वैक्यूम पंपों के जरिए तेल को टैंकरों में भरा जा रहा है। खेत में फैली तेल की परतों पर मिट्टी डाली गई है, लेकिन रिसाव इतना अधिक था कि तेल अभी भी मिट्टी के ऊपर उभर रहा है।

आगे क्या?

फिलहाल, प्रशासन और कंपनी की प्राथमिकता रिसाव के स्रोत को सील करना और प्रभावित किसान को मुआवजे की प्रक्रिया शुरू करना है। लेकिन इस घटना ने रेगिस्तानी इलाकों में बिछी पुरानी पाइपलाइनों की मजबूती पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।