
भारत-पाक के बीच भले ही सरहद खींच दी गई, लेकिन आस्था और विश्वास में लकीर आड़े नहीं आती; नवरात्रि में रहेगा 9 दिन निराहार
रतन दवे/दीपक व्यास, बाड़मेर.
भारत और पाकिस्तान के बीच भले ही सरहद खींच दी गई है लेकिन आस्था और विश्वास में लकीर कभी आड़े नहीं आती। बलूचिस्तान की हिंगलाज माता (नानीपीर), जैसलमेर की तनोटराय और बाड़मेर की वांकलमाता वीरातरा के भक्त दोनों देशों में हैं।
हिन्दुस्तान के हिंगलाज भक्त माता का नाम का नवरात्र इधर रखकर पाकिस्तान की तरफ मुंह करके धोक लगाते हैं तो पाकिस्तान में तनोटमाता के भक्त जैसलमेर की ओर शीश झुकाकर मां से आशीष लेते हैं। वांकल मां के पाकिस्तानी भक्त भी मां के नाम पर नवरात्र का उपवास करते हैं। नवरात्र में आस्था का ज्वार दोनों देशों में परवान पर है।
तनोट मंदिर: यहां बम भी हो गए थे नतमस्तक
वर्ष 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान पाकिस्तान ने पश्चिमी सीमा पर बम दागे। ये मंदिर के पास गिरे लेकिन एक भी बम नहीं फटा। ये बम आज भी मंदिर परिसर में मौजूद हैं। माता के इस चमत्कार पर भारतीय सेना के हौसले बुलंद हुए और युद्ध फतह किया। मां के इस चमत्कार पर पाकिस्तानी ब्रिगेडियर शाहनवाज खान ने भारत सरकार से यहां दर्शन करने की अनुमति देने का आग्रह किया था। करीब ढाई साल की जद्दोजहद के बाद भारत सरकार से अनुमति मिलने पर ब्रिगेडियर खान ने न केवल माता की प्रतिमा के दर्शन किए बल्कि मंदिर में चांदी का एक सुंदर छत्र चढ़ाया। ब्रिगेडियर खान का चढ़ाया हुआ छत्र आज भी इस घटना का साक्षी है।
झुकते है हजारों शीश- पाकिस्तान में भी शाहनवाज हुसैन सरीखे लाखों भक्त तनोट माता के हैं। वे पाकिस्तान में नवरात्र रखते हैं और तनोट माता के नाम अन्न-जल त्यागकर नौ दिन भक्ति करते हैं।
वीरातरा : वांकल माता
चौहटन की वांकलमाता वीरातरा के प्रति आस्था भी भारत-पाकिस्तान में है। चौहटन में बड़ी संख्या में पाक विस्थापित हैं, उनकी रिश्तेदारी भी पाकिस्तान में है। एेसे में यह आस्था का स्थल हमेशा दोनों देशों में पूज्य रहा है। नवरात्र में दोनों देशों में देवी की पूजा होती है।
बलूचिस्तान : हिंगलाज माता मंदिर
मान्यता के मुताबिक 51 शक्तिपीठ में हिंगलाज भी है। सती का एक अंग यहां गिरा था जिस कारण यह शक्तिपीठ हुआ। कराची से लगभग 250 किमी दूर हिंगोल पहाडिय़ों की गुफा के पास नदी नानोदाई है। इसके पास यह मंदिर है। सदियों पुरानेआस्था के इस स्थल से पाकिस्तान की दो प्रतिशत हिन्दू आबादी जुड़ी है तो भारत में हिंगलाज के लाखों मुरीद हैं जो थार एक्सप्रेस के जरिए दर्शन करने जाते हैं। कराची से भी नवरात्र और हिंगलाज जयंती पर माता के जयकारे लगाते हुए पच्चीस हजार से अधिक लोग यहां दर्शन को पहुंचते हैं।
पाकिस्तान में मुस्लिम भी भक्त
पाकिस्तान में हिंगलाज के भक्तों में मुस्लिम भी है। बढ़ती आस्था के बाद यहां अब विकास के कार्य हो रहे हैं। मंदिर तक सड़क निर्माण हुआ है। सुरक्षा को पुलिस तैनात की गई है। हिंगलाज माता मंदिर पाकिस्तान में आस्था का बड़ा केन्द्र बन रहा है।
- देवीदान, पाक विस्थापित
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Updated on:
11 Oct 2018 02:12 pm
Published on:
10 Oct 2018 12:14 pm
