
Rajshree Kanot
कहते हैं कि प्रतिभा किसी सुख-सुविधा या बड़े शहरों की मोहताज नहीं होती। इसे सच कर दिखाया है राजस्थान के सीमांत और रेतीले बालोतरा जिले के बागावास गांव की बेटी राजश्री करणोत ने। देहरादून के पहाड़ों में आयोजित नेशनल लेवल की 'इंडिया ओपन शूटिंग चैंपियनशिप 2026' में जब राजश्री ने अपनी 10 मीटर एयर राइफल थामी, तो उनकी नजरें सिर्फ और सिर्फ सटीक निशाने पर थीं। सीनियर महिला वर्ग के इस बेहद कठिन और कड़े मुकाबले में राजश्री ने 400 में से 395 का अविश्वसनीय स्कोर खड़ा कर सिल्वर मेडल अपने नाम कर लिया। इस बंपर सफलता के साथ ही उनका चयन अब देश की नेशनल शूटिंग टीम के लिए हो गया है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करेगी।
राजश्री की इस ऐतिहासिक कामयाबी की खबर जैसे ही बालोतरा के बागावास गांव पहुंची, पूरा इलाका जश्न के माहौल में डूब गया। ग्रामीणों ने आतिशबाजी कर और एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर इस मरुधरा की बेटी की जीत की खुशियां मनाईं।
कठिन परिस्थितियों में तैयारी: पश्चिमी राजस्थान के इस रेतीले इलाके में खेल सुविधाओं और आधुनिक शूटिंग रेंज की भारी कमी के बावजूद राजश्री ने कभी हार नहीं मानी।
समर्पण की कहानी: उनके अनुशासन, माता-पिता के त्याग और अदम्य आत्मविश्वास ने यह साबित कर दिया कि राजस्थान के धोरों में जन्मी बेटियां भी अगर ठान लें, तो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का परचम लहराने का पूरा सामर्थ्य रखती हैं।
राजश्री की इस अचीवमेंट की गूंज राजस्थान के राजनीतिक गलियारों में भी सुनाई दे रही है। मारवाड़ अंचल के कद्दावर नेताओं ने सोशल मीडिया पर राजश्री की तस्वीर शेयर करते हुए उन्हें बधाई दी है।
विधायक रविंद्र सिंह भाटी का संदेश: शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने राजश्री को बधाई देते हुए लिखा कि सीमांत क्षेत्र की इस बेटी ने जो गौरव बढ़ाया है, वह क्षेत्र की हजारों अन्य बेटियों को अपने सपनों को साकार करने के लिए एक नई उड़ान और नई प्रेरणा देगा।
विधायक हरीश चौधरी ने थपथपाई पीठ: बायतू विधायक हरीश चौधरी ने भी राजश्री और उनके परिवार को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर राष्ट्रीय स्तर की टीम में जगह बनाना कड़ी तपस्या का परिणाम है।
अपनी इस स्वर्णिम सफलता के बाद मीडिया से बात करते हुए राजश्री करणोत ने बेहद सादगी से इसका पूरा श्रेय अपने परिवार और गुरु को दिया। राजश्री ने बताया कि उनके पिता प्रेमकरण सिंह करणोत और माता भरत कंवर ने उनके खेल के लिए हर कदम पर उनका साथ दिया और कभी भी रूढ़िवादी सोच को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। इसके साथ ही उनके कोच रजत सिंह की सटीक तकनीकी ट्रेनिंग और गाइडेंस की बदौलत ही वे 400 में से 395 अंकों के इस सर्वश्रेष्ठ और वर्ल्ड-क्लास स्कोर तक पहुंचने में कामयाब हो सकी हैं।
10 मीटर एयर राइफल सीनियर महिला वर्ग में नेशनल टीम के चयन के लिए कड़ा कॉम्पिटिशन होता है, जहां एक-एक पॉइंट के दसवें हिस्से से मेडल चूक जाता है। समझिए राजश्री के इस अचूक निशाने का पूरा गणित:
| इवेंट का नाम (Event Category) | कुल अधिकतम अंक (Max Marks) | राजश्री द्वारा प्राप्त अंक (Score) | हासिल पदक (Medal) | आगामी लक्ष्य (Next Mission) |
| 10 मीटर एयर राइफल (सीनियर महिला) | 400 | 395 | रजत पदक (Silver) | इंटरनेशनल शूटिंग टूर्नामेंट्स (Indian Team) |
बालोतरा की राजश्री करणोत की यह सफलता केवल एक मेडल या नेशनल टीम का टिकट मात्र नहीं है। यह पश्चिमी राजस्थान के बाड़मेर-बालोतरा जैसे सीमावर्ती और ग्रामीण इलाकों की उन हजारों लड़कियों के लिए एक जीती-जागती मिसाल है, जो रूढ़ियों को तोड़कर खेल, सेना या अन्य क्षेत्रों में अपना करियर बनाना चाहती हैं। राजश्री ने यह साबित कर दिया है कि अगर हौसलों में उड़ान हो, तो रेगिस्तान के धोरों से भी देश को मेडल दिलाने वाले सितारे पैदा हो सकते हैं।
Published on:
21 May 2026 10:27 am
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