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शीतला माता की सवारी गधे बाड़मेर में सर्वाधिक

- 17495 गधे है बाड़मेर में, प्रदेश में अन्यत्र 9000 का आंकड़ा भी नहीं

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रीवा

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bhawani singh

Mar 19, 2017

bamrer

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बास्योड़ा की देवी शीतला माता की सवारी गधे प्रदेश में सर्वाधिक बाड़मेर जिले में है। सीमावर्ती क्षेत्र के दुरुह इलाके जहां परिवहन के लिए पचास हजार से अधिक कीमत के ऊंट खरीदना ग्रामीणों के लिए महंगा है वे आज भी गधे का उपयोग कर रहे हैं। जिले में 17495 गधे हैं। प्रदेश के किसी अन्य जिले में अब नौ हजार से अधिक गधे नहीं बचे हैं।

शीतला माता का पूजन बास्योड़ा पर शनिवार को किया जाएगा। मान्यता है कि होली के बाद की सप्तमी को बास्योड़ा जीमने के साथ ही शीतला माता का पूजन होता है और नवजात को चेचक या माता रोग नहीं हों इसके लिए शीतला माता की आशीष ली जाए। शीतला माता की सवारी गधा है।

क्यांे है बाड़मेर में सर्वाधिक गधे

बाड़मेर रेगिस्तानी क्षेत्र है। जहां दूर-दूर तक परिवहन के साधन नहीं रहे हंै। परिवहन के लिए ऊंट और बैलों की जोडि़यां रहती थी। गरीब लोगों के लिए ऊंट और बैल खरीदना व पालना दोनों मुश्किल होता था। एेसे में यहां परिवहन का माध्यम गधा बन गया। रेगिस्तानी इलाके में भी चलने वाले इस जानवर की खुराक को लेकर भी खास चिंता नहीं होती है। एेेसे में यहां गरीब परिवार पेयजल परिवहन के लिए विशेषकर गधों का उपयोग आज भी सीमावर्ती क्षेत्र में बड़ी संख्या में कर रहे है।

घट रही है संख्या

प्रदेश में 2007 और 2012 की पशुगणना में बीस हजार गधे कम हुए हैं लेकिन यह आंकड़ा बाड़मेर में इतना नहीं है। बाड़मेर जिले में अभी भी 17495 गधे हैं। गधे की कीमत भी अभी 2 से 5 हजार के बीच ही है। बड़े जानवरों में इतनी कम कीमत किसी की नहीं है।

कहां कितने गधे

अजमेर- 2132

अलवर- 1284

बांसवाड़ा- 1713

बारां- 906

बाड़मेर- 17495

भतरपुर- 1442

भीलवाड़ा- 1160

बीकानेर- 8712

बूंदी- 734

चित्तौडग़ढ़-440

चुरू- 5063

दौसा- 431

धौलपुर- 822

डूंगरपुर- 1114

गंगापुर- 4609

हनुमानगढ़- 3370

जयपुर- 1300

जैसलमेर- 5846

जालौर- 3334

झालावाड़- 827

झुंझुनू- 1601

जोधपुर- 4176

करौली- 849

कोटा- 454

नागौर- 1771

पाली- 2066

प्रतापगढ़- 320

राजसमंद-938

सवाईमाधोपुर- 1240

सीकर- 1164

सिरोही- 1402

टांेक- 268

उदयपुर- 2385

कुल- 81468