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बास्योड़ा की देवी शीतला माता की सवारी गधे प्रदेश में सर्वाधिक बाड़मेर जिले में है। सीमावर्ती क्षेत्र के दुरुह इलाके जहां परिवहन के लिए पचास हजार से अधिक कीमत के ऊंट खरीदना ग्रामीणों के लिए महंगा है वे आज भी गधे का उपयोग कर रहे हैं। जिले में 17495 गधे हैं। प्रदेश के किसी अन्य जिले में अब नौ हजार से अधिक गधे नहीं बचे हैं।
शीतला माता का पूजन बास्योड़ा पर शनिवार को किया जाएगा। मान्यता है कि होली के बाद की सप्तमी को बास्योड़ा जीमने के साथ ही शीतला माता का पूजन होता है और नवजात को चेचक या माता रोग नहीं हों इसके लिए शीतला माता की आशीष ली जाए। शीतला माता की सवारी गधा है।
क्यांे है बाड़मेर में सर्वाधिक गधे
बाड़मेर रेगिस्तानी क्षेत्र है। जहां दूर-दूर तक परिवहन के साधन नहीं रहे हंै। परिवहन के लिए ऊंट और बैलों की जोडि़यां रहती थी। गरीब लोगों के लिए ऊंट और बैल खरीदना व पालना दोनों मुश्किल होता था। एेसे में यहां परिवहन का माध्यम गधा बन गया। रेगिस्तानी इलाके में भी चलने वाले इस जानवर की खुराक को लेकर भी खास चिंता नहीं होती है। एेेसे में यहां गरीब परिवार पेयजल परिवहन के लिए विशेषकर गधों का उपयोग आज भी सीमावर्ती क्षेत्र में बड़ी संख्या में कर रहे है।
घट रही है संख्या
प्रदेश में 2007 और 2012 की पशुगणना में बीस हजार गधे कम हुए हैं लेकिन यह आंकड़ा बाड़मेर में इतना नहीं है। बाड़मेर जिले में अभी भी 17495 गधे हैं। गधे की कीमत भी अभी 2 से 5 हजार के बीच ही है। बड़े जानवरों में इतनी कम कीमत किसी की नहीं है।
कहां कितने गधे
अजमेर- 2132
अलवर- 1284
बांसवाड़ा- 1713
बारां- 906
बाड़मेर- 17495
भतरपुर- 1442
भीलवाड़ा- 1160
बीकानेर- 8712
बूंदी- 734
चित्तौडग़ढ़-440
चुरू- 5063
दौसा- 431
धौलपुर- 822
डूंगरपुर- 1114
गंगापुर- 4609
हनुमानगढ़- 3370
जयपुर- 1300
जैसलमेर- 5846
जालौर- 3334
झालावाड़- 827
झुंझुनू- 1601
जोधपुर- 4176
करौली- 849
कोटा- 454
नागौर- 1771
पाली- 2066
प्रतापगढ़- 320
राजसमंद-938
सवाईमाधोपुर- 1240
सीकर- 1164
सिरोही- 1402
टांेक- 268
उदयपुर- 2385
कुल- 81468
Published on:
19 Mar 2017 12:00 pm
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