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बाड़मेर. हमारे भीतर जड़ और चेतन का संघर्ष चल रहा है। इस संघर्ष की चुनौती स्वीकार करना ही क्षत्रियत्व है। यह बात श्री क्षत्रिय युवक संघ प्रमुख भगवानसिंह रोलसाहबसर ने भारतीय ग्राम्य आलोकायन में शुक्रवार को 11 दिवसीय उच्च प्रशिक्षण शिविर के उदघाटन समारोह में कही। उन्होंने कहा कि क्षत्रिय धर्म का पालन करने वाले सदैव जागृत रहने वाला व्यक्ति होता है। आज समाज की मातृ शक्ति भी क्षत्रिय युवक संघ के साथ खड़ी है। क्षत्रिय युवक संघ के शिविर में अनुशासन, संयमित जीवन व व्यक्तित्व निर्माण करने का प्रयास किया जाता है।
उन्होंने कहा कि संसार से कभी प्रभावित नहीं होना है बल्कि अपने आचरण से उसे प्रभावित करना है। शिविर के ग्यारह दिनों में आप चुनौती स्वीकार करें। खिन्न नहीं हों, तनाव में न रहें बल्कि पवित्र बनें ताकि परमेश्वर का साथ मिल सके। उन्होंने कहा कि संसार को नहीं बदलना हैं, बल्कि अपने आपको बदलना है। हमेशा कर्मशील होकर आगे बढ़ते रहें। शिविर का संचालन स्वयंसेवक लक्ष्मणसिंह ने किया। इस मौके पर क्षत्रिय युवक संघ के स्वयंसेवक मौजूद रहे।
शिक्षा के साथ चिंतन जरूरी
क्षत्रिय युवक संघ प्रमुख भगवानसिंह रोलसाहबसर ने कहा कि मनुष्य जीवन दुर्लभ है, इस दुर्लभता को हम जानते नही है इसलिए गफलत में जीवन बीत रहा है। क्षत्रिय कुल में जन्म मिलना एक विशेषता है तथा क्षत्रिय युवक संघ में आना भाग्य की बात है। इन्ही विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए जागृत रहे तो जीवन गफलत में नही बीतेगा। कुल और परम्पराओं को नमन करते हुए इसका सदा चिंतन रहे। शिक्षा के प्रति सजग रहे।
570 शिविरार्थी ले रहे भाग
उच्च प्रशिक्षण शिविर-2018 में 570 शिविरार्थी क्षत्रियोचित संस्कारों का प्रशिक्षण ले रहे हैं। शिविर में राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश, उतरप्रदेश व बिहार सहित कई स्थानों के युवा भाग ले रहे हैं। शिविर में खेल चर्चा, बौद्धिक, सहगायन, संघ की मनोवैज्ञानिक संस्कारमयी प्रणाली का अभ्यास करवाया जाएगा।
Published on:
11 May 2018 09:33 pm
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