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पेचीदे नियमों में उलझा चारा, भूख से दम तोड़ रहे पशु

- अधिकांश पशुपालकों को चारा डिपो व शिविरों का लाभ नहीं- चारा-पानी नहीं मिलने से पशुपालक आवारा छोड़ रहे अपने मवेशी
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Tangled fodder in intricate rules, animals suffering from hunger

Tangled fodder in intricate rules, animals suffering from hunger

शिव. चारे पानी के अभाव में क्षेत्र के गांवों में कई आवारा पशु दम तोड़ रहे हैं। वहीं कहीं भी महंगे दाम पर चारा नहीं मिलने के कारण पशुपालक अपने मवेशियों को बेसहारा छोडऩे को मजबूर हैं। सरकार की ओर से भी शुरू किए चारा डिपो के पेचीदे नियमों के चलते अधिकांश पशुपालकों को इसका फायदा नहीं मिल रहा।

ऐसे में आवारा पशुओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। अधिकांश गांवों में बने जीएलआर में पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है। ऐसे में पानी की आस में कई मवेशी इनके आस-पास भटकते रहते हैं, लेकिन उन्हें कई दिन तक पानी नसीब नहीं हो रहा है।

अकाल के चलते खेतों में फसल व चारा पैदा नहीं हुआ। वहीं परम्परागत जल स्रोत में भी पानी की आवक नहीं हुई। ऐसे में शुरू से ही कई लोग महंगे दाम पर पानी के टैंकर मंगवा कर स्वयं व पशुओं के हलक तर कर रहे हैं। अब गर्मी के मौसम के चलते पानी की मांग भी बढ़ रही है। लम्बे समय से पानी खरद रहे पशुपालकों की भी कमर टूट गई है।

अनाज के निकट पहुंचा चारा

क्षेत्र में अच्छी बारिश व जमाने के बाद कई बार बाजरा भी 14 से 15 रुपए प्रति किलो के भाव से बिकता है, लेकिन इस बार चारा भी इस आंकड़े को छूने लगा है। बाजार में इन दिनों चारा 13 से 14 रुपए प्रति किलो बिक रहा है। ऐसे में पशुपालक इसे खरीदने में असमर्थ हो रहे हैं। बेआसरा छोड़े पशु चारे-पानी की तलाश में भटकते-भटकते दम तोड़ देते हैं।

चारा डिपो का अधिकतर को नहीं फायदा

सरकार की ओर से अभाव ग्रसित गांवों में पशु शिविर व चारा डिपो के लिए आई गाइडलाइन के अनुसार मात्र लघु व सीमांत किसान ही इसका फायदा उठा सकते हैं। ऐसे में क्षेत्र के अधिकांश किसानों व पशुपालकों को इसका कोई फायदा नहीं मिल रहा है। ज्यादातर किसान लघु-सीमांत की श्रेणी में नहीं आ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के चलते सरकार ने मात्र दिखावे के लिए ऐसे डिपो खोले हैं।

बीमारी फैलने का खतरा

प्रत्येक गांवों में इन दिनों मृत पशुओं के ढेर नजर आ रहे हैं। इनका निस्तारण नहीं होने के कारण पशुओं में बीमारी फैलने का अंदेशा है। भूख से पीडि़त कई पशु इन हड्डियों को चबाने का प्रयास करते हैं। इससे वे बीमारी से ग्रस्त होकर मौत का शिकार हो रहे हैं।

पशुपालकों को मिले राहत

गांवों में अकाल के दौरान पशु चारा व पेयजल के प्रबंध नहीं होने से आए दिन पशुओं की अकाल मौत हो रही है। प्रशासन की ओर ेस प्रत्येक राजस्व गांव में पशु शिविर खोल पशुपालकों को राहत प्रदान की जानी चाहिए।

- जोगेंद्रकुमार कानासर

प्रस्ताव भिजवाएंगे
अभावग्रस्त ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर चारा डिपो संचालित हो रहे हैं, नौ पशु शिविर भी स्वीकृत हुए। इन्हें जल्द ही प्रारंभ करवाया जाएगा। वर्तमान में केवल लघु-सीमांत किसानों को ही पशु शिविर व चारा डिपो से लाभान्वित करने का प्रावधान है। अन्य ग्राम पंचायतों की डिमांड के अनुसार पशु शिविर खुलवाने के प्रस्ताव जिला कलक्टर को भिजवाए जाएंगे।

- रामसिंह भाटी, तहसीलदार, शिव