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48 टैंक नस्तेनाबूद किए थे उस फक्र-ए- हिन्द की ढाणी में फक्र से रखा टैंक

पूना हॉर्स रेजिमेंट के महावीर चक्र विजेता हणूतसिंह को सेना दे रही गौरव

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Tanks placed in framework of Fakr-i-Hind which were installed 48 tanks

जसोल की ढाणी में पहुंचा सेना का टैंक

बाड़मेर. फक्र-ए-हिन्द.. यह गौरव भारतीयसेना की 17 पूना हॉर्स रेजीमेंट के कमाण्डर को 1971 के युद्ध में परास्त होने के बावजूद पाकिस्तान ने दिया था। पाकिस्तान के 48 टैंक को युद्ध के दौरान इस रेजीमेंट ने पाकिस्तान के 48 टैंक नस्तेनाबूद कर दिए थे और उस टुकड़ी के कमाण्डर हणूतसिंह जसोल पाकिस्तानी सेना पर एेसे टूट पड़े थे जैसे भूखा शेर शिकार पर। पाकिस्तान सेना के छक्के छूट गए और जिस टैंक रेजिमेंट को पाकिस्तान अपनी ताकत समझ बैठा था हणूतसिंह ने उस ताकत को मसलकर रख दिया। युद्ध के बाद पाकिस्तान ने फक्र-ए-हिन्द का तो भारत ने उन्हें महावीर चक्र से नवाजा। सेना की सेवाओं से लेफ्टिनेंट जनरल पद से 1991 में सेवानिवृत्त हो गए और इसके बाद देहरादून में संत का जीवन गुजारा। 11 अप्रेल 2015 को हणूतसिंह का स्वर्गवास हो गया। पूना हॉर्स रेजिमेंट ने बालोतरा के निकट उनके गांव जसोल में उनको हर साल याद करती है। रेजिमेंट को अपने सेनानायक पर इतना गौरव है कि अब उन्होंने सेना की दक्षिणी कमान की देखरेख में एक टैंक जसोल में उनकी पैतृक ढाणी में बुधवार को भेजा है। यह टैंक अब यहीं पर रहेगा। दिसंबर में दक्षिणी कमान व पूना हॉर्स रेजिमेंट की ओर से यहां पर बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। 48 टैंकों को नस्तेनाबूद करने वाले हणूतसिंह की अदम्य वीरता को चिरस्थायी रखने के साथ यहां आने वालों के लिए यह गौरव का विषय होगा।

पूर्व वित्तमंत्री जसवंतसिंह के चचेरे भाई

हणूतसङ्क्षसह पूर्व वित्तमंत्री जसवंतसिंह के सगे चचेरे भाई है। इनकी ढाणियां भी आस-पास है। हणूतसिंह ने शादी नहीं की थी। उनकी तीन बहिनें है। पिता अर्जुनङ्क्षसह की पैतृक जमीन के पास ही उनकी ढाणी है। वे 1991 में सेना से सेवानिवृति बाद देहरादून में रहे और यहां संत का जीवन गुजारा।
तीन ढाणियां और कितने ही गौरव

जसोल गांव में हणूतसिंह के परिवार की ढाणियों ने इस गांव को कितने ही गौरव दिए है। हणूतसिंह के चचेरे भाईयों में जसवंतसिंह की ढाणी है जो भारत के पूव वित्त विदेश और रक्षा मंत्री रहे है। उनके भाई डा. गोरधनसिंह, पुत्र मानेन्द्रसिंह मौजूदा विधायक, पूर्व सांसद और सेना में कर्नल है। इसी ढाणी के अमरसिंह न्यायिक सेवा में अधिकारी 1947 में थे। उनके पुत्रों में किशनसिंह रावल सेनवानिवृत्त भारतीय विदेश सेवा, फतेहसिंह सेवानिवृत्त आईएएस, नाहरसिंह निदेशक मेहरानगढ़ दुर्ग शामिल है। परिवार के अन्य सदस्य प्रतिष्ठित पदों पर रहे है।

हमारे लिए गौरव-

यह हमारे लिए और पूरे देश के लिए गौरव का विषय है कि हणूतसिंह जैसे वीर हमारे यहां हुए। उनकी वीरता और अदम्य साहस के प्रति सेना का यह निर्णय प्रशंसनीय है। हमारी ढाणी में यह टैंक रहेगा और उनकी वीरता की कहानी सदियों तक कहता रहेगा इससे बड़ा गौरव क्या होगा?- नाहरसिंह जसोल, चचेरे भाई