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‘सरकारÓ की वाह-वाही के चक्कर में शिक्षकों की जेब ढीली।़

- 5 सितम्बर को जयपुर में था सम्मेलन, अपने खर्चे से शिक्षक पहुंचे, अभी तक नहीं मिला टीए-डीए-प्रदेश के एक लाख शिक्षकों को मिलना है भुगतान, बाड़मेर से गए थे करीब 4 हजार शिक्षक -पहले चुनाव ने अटकाया, अब सत्ता परिवर्तन
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'सरकारÓ की वाह-वाही के चक्कर में शिक्षकों की जेब ढीली।़

'सरकारÓ की वाह-वाही के चक्कर में शिक्षकों की जेब ढीली।़


दिलीप दवे

बाड़मेर. प्रदेश की तत्कालीन भाजपा सरकार के लाखों बेरोजगारों को रोजगार देने के दावे को दिखाने के चक्कर में सवा लाख शिक्षकों की जेब ढीली हो गई। शिक्षकों को यह कह कर जयपुर बुलाया था कि उनको सरकार यात्रा व दैनिक भत्ता देगी। अब सत्ता बदलते ही यह वादा ठण्डे बस्ते में चला गया। करीब साढ़े चार माह से शिक्षकों को भुगतान का इंतजार है। इन शिक्षकों की पीड़ा यह है कि जिस सरकार ने बुलाया था, वह बदल गई। नई सरकार से बजट मांगे तो भी कैसे ? हालांकि कुछ जगह शिक्षकों को भुगतान हो चुका है, लेकिन अधिकांश शिक्षकों को अभी भी इंतजार है। विधानसभा चुनावों से पहले वसुंधराराजे ने आमजन तक यह संदेश पहुंचाने का प्रयास किया कि उनकी सरकार ने बेरोजगार युवाओं को रोजगार दिया है। विशेषकर शिक्षकों की नियुक्ति की। इस दावे को और पुख्ता करने के लिए सरकार ने 5 सितम्बर 2018 के दिन शिक्षक दिवस पर जयपुर में एक कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें सभी नवनियुक्त शिक्षक जिसमें तृतीय श्रेणी, द्वितीय श्रेणी, व्याख्याता आदि शामिले थे, को आमंत्रित करते हुए उनको अनिवार्य रूप से आने को कहा। शिक्षकों की भीड़ जुटाने के लिए शिक्षा विभागीय प्रशासनिक अमला सक्रिय रहा। इस दौरान नवनियुक्त एक-एक शिक्षक को जयपुर भेजा गया। सरकार ने यह भी कहा कि जो शिक्षक कार्यक्रम में शामिल होंगे, उनको यात्रा व दैनिक भत्ता दिया जाएगा। एेसे में कई शिक्षकों ने निजी वाहन, बस आदि किराए पर ली और जयपुर पहुंचे। वहीं, रोडवेज बसों, रेल से भी हजारों अध्यापक गए। कार्यक्रम खत्म होने के बाद उन्होंने जब टीए, डीए बिल पेश किया तो बजट नहीं होने की बात कही। इसके बाद चुनाव आ गए और मामला ठण्डे बस्ते में चला गया। चुनाव परिणाम के बाद सत्ता परिवर्तित हो गई और कांग्रेस की सरकार बन गई। एेसे में यह मामला भी अटक गया।
अब किससे मांगे बजट- भाजपा दुबारा सत्ता में आती तो शिक्षकों को भी उम्मीद थी कि उनको टीए, डीए मिलता, लेकिन सत्ता परिवर्तित हो गई। भाजपा ने कार्यक्रम करवाया वो अब विपक्ष में है। एेसे में गहलोत सरकार से बजट मांगे भी तो कैसे, इस उलझन में फंसे शिक्षक बजट स्वीकृति को इंतजार करने को मजबूर है।

करोड़ों का बजट- जयपुर कार्यक्रम में शामिल होने वाले शिक्षकों का टीए, डीए करोड़ोंं रुपए का हो रहा है। बतौर उदाहरण एक शिक्षक को बाड़मेर से जयपुर तक का वास्तविक किराया करीब साढ़े छह सौ रुपए, दो दिन का डीए कम से कम तीन-चार सौ रुपए देना है। इसके अलावा टैक्सी किराया भी जुडेग़ा। एेसे में एक शिक्षक को कम से कम एक हजार रुपए मिलने हैं।
बजट जारी करे सरकार

- सरकारी कार्यक्रम में भाग लेने वाले शिक्षकों ने जेब से रुपए खर्च कर कार्यक्रम में भाग लिया था। सत्ता परिवर्तन भले ही हो गई, लेकिन शिक्षकों को तो टीए, डीए मिलना चाहिए। सरकार जल्द बजट जारी करे।
-घमण्डाराम कड़वासरा शिक्षक नेता, राजस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ