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दस दिन बाद शुरू होगा मेला, अब तक नहीं ली सुध

- मल्लीनाथ पशुमेले में अव्यवस्थाओं का आलम, मेला मैदान में गड्ढे, पसरा गंदा पानी - आयोजक नहीं दे रहे ध्यान, पशुपालक हो सकते हैं परेशान  

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बजरी से मेला मैदान में जगह जगह गड्ढें हो गए हैं

बजरी से मेला मैदान में जगह जगह गड्ढें हो गए हैं

बालोतरा.
मात्र दस दिन बाद जिस मैदान में देश का विख्यात पशु मेला लगने वाला है, वहां अभी अव्यवस्थाओं का आलम है। मेला मैदान गड्ढों से अटा हुआ है तो चारों ओर गंदा पानी पसरा नजर आता है। बिजली, पानी,सड़क सहित अन्य सुविधआों को लेकर भी यहां बदहाली नजर आ रही है। होली के दूसरे दिन से देश विख्यात मल्लीनाथ पशुमेला तिलवाड़ा में

पशुपालक पशु लेकर पहुंचने शुरू हो जाएंगे। इसके बाद पशुओं की आवक बढऩे पर मेला परवान चढऩे लगता है। अनौपचारिक रूप से मेला शुरू होने में दस दिन शेष है, लेकिन मेला मैदान पर पग-पग पर अव्यवस्थाओं का जमावड़ा है। एेसा लगता है मेला आयोजक पशुपालन विभाग चैन की नींद सोया हुआ है। इस पर पशुपालकों व पशुओं को परेशानी उठानी पड़ेगी, इससे इंकार नहीं किया जा सकता है।

मल्लीनाथ पशुमेला चैत्र कृष्ण पक्ष एकादशी को ध्वजारोहण के साथ विधि- विधान से प्रारंभ होता है, लेकिन होली पर्व बीतने के साथ ही पशुपालक पशु लेकर मेले में पहुंचने शुरू होते हैं। इसके साथ ही अनौपचारिक रूप से मेला प्रारंभ हो जाएगा। इसके बाद पशुओं की आवक बढऩे के साथ ही इसकी रौनक बढऩे लगेगी। तीन- चार दिन में हजारों की संख्या में पशुओं के पहुंचने व दुकानों के लगने के साथ ही पशुपालक खरीदारी तो मेलार्थी मेले का आनंद उठाने यहां पहुंचेंगे। इसके सफल आयोजन को लेकर जिला प्रशासन मेला आयोजक पशुपालन विभाग के साथ बैठकें आयोजित कर व्यवस्थाओं को लेकर निर्देश दे चुका है, लेकिन विभाग ने अभी तक व्यवस्थाओं को लेकर कार्य शुरू नहीं किया है।
गड्ढों में तब्दील मेला मैदान- लूनी नदी में लगातार बरसाती पानी के हुए बहाव पर इसके साथ बही बजरी से मेला मैदान में जगह जगह गड्ढें हो गए हैं। वहीं बहुत से स्थानों पर पानी का भराव है। अभी तक मैदान समतलीकरण करने का कार्य शुरू नहीं किया गया है। यही स्थिति पेवेलियन की है। इस पर मेलार्थी बैठकर घुड़दौड़ देखने व मेला निहारने का आनंद उठाते हैं, लेकिन इसकी सीढिय़ों के नीचले भाग से मिट्टी बह गई है। पेवेलियन की स्थिति भी अच्छी नहीं है। इसके इर्द-गिर्द कंटिली झाडिय़ां उगी हुई है। मेला मैदान में नौ पशुखेलियां है, लेकिन पानी के तेज बहाव से अधिकांश टूट गईहै। इनकी मरम्मत भी अब तक नहीं हुई है।

तीन लाख स्वीकृत- पशुपालन विभाग ने 3 लाख रुपए तक के कार्य मेला स्थल पर करवाने का आश्वासन दिया था, लेकिन अभी तक कार्य शुरू नहीं करवाया। समय पर कार्य नहीं होने पर पशुपालकों, मेलार्थियों व पशुओं को परेशानी उठानी पड़ेगी।
समतलीकरण नहीं किया-

लूनी नदी में दूसरी बार पानी के हुए बहाव से मेला मैदान पूरा अस्त-व्यस्त हो गया है। यहां समतलीकरण कार्य शुरू नहीं किया। इससे पशुपालकों व पशुओं को परेशानी उठानी पड़ेगी।
मुबारक खां वार्डपंच

पशुपालन विभाग नहीं दे रहा ध्यान- मेले से अच्छी आय होने के बावजूद आयोजक पशुपालक विभाग इस पर ध्यान नहीं देता है। इससे हर वर्ष हजारों परेशानी उठाते हैं। प्रशासन विभाग को पाबंद करें।

कानाराम सांई ग्रामीण
पशुपालकों का हो रहा मोह भंग- होली पर्व बीतने के साथ ही पशुपालक पशु लेकर पहुंचने शुरू होते हैं। मेला प्रारंभ होने में कम दिन शेष बचे होने के बावजूद विभाग ध्यान नहीं दे रहा है। इससे पशुपालकों को मोहभंग हो रहा है।

कूंपाराम देवासी ग्रामीण
ग्राम पंचायत के पास बजट सीमित- नदी में पानी बहाव से मेला मैदान पूरा उखड़ गया है। केवल एक दिन समतलीकरण का कार्य किया गया। बड़े-बड़े गड्ढों, पानी भराव, फैली बबूल झाडिय़ों, टूटी खेलियों पर पशुपालकों, मेलार्थियों, पशुओं को परेशानी उठानी पड़ेगी। ग्राम पंचायत के पास सीमित बजट है। जो कार्यसौंपा गया है, उसे शीघ्र शुरू कर पूरा करेंगे।

शोभसिंह महेचा, सरपंच तिलवाड़ा

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