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तंबाकू उत्पादों की बिक्री और प्रचार-प्रसार के उल्लंघन को लेकर बने कानून सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम 2003 (कोटपा) की पालना को लेकर चिकित्सा महकमे, प्रशासन और पुलिस सहित तमाम विभागों की लापरवाही तंबाकू उत्पादों की बेफिक्र और बेहिसाब बिक्री को बढ़ावा दे रही है।
यह धीमा जहर अब नाबालिगों के साथ सात-आठ साल के बच्चों को भी गिरफ्त में ले रहा है। इन बच्चों को तंबाकू उत्पाद बेचने पर जुर्माना है और विक्रेता को अपनी दुकान के आगे यह बोर्ड भी लगाना है कि बच्चों को तंबाकू उत्पाद नहीं बेचे जाएंगे, लेकिन एेसा अधिकांश नहीं कर रहे।
जहां तक इन पर कार्रवाई को लेकर चिकित्सा महकमे और अन्य संबंधित महकमों की नकेल का सवाल है तो कोई दुकानदार की ओर झांकता ही नहीं तो वो मानेंगे कैसे? विभागीय लापरवाही तंबाकू को लेकर बने कोटपा अधिनियम की पालना की बजाय इस अधिनियिम की धज्जियां उड़ाने का कारण बन रही है।
यह है नियम
- 18 वर्ष से कम आयु वर्ग को तंबाकू सामग्री बेचना अपराध है।
- 18 वर्ष से कम आयु वर्ग की ओर से तंबाकू बेचना भी अपराध है।
- नाबालिगों को तंबाकू पदार्थ बिक्री स्थान पर दिखाई नहीं देना चाहिए।
- बिक्री के स्थान पर एक बोर्ड लगाना आवश्यक है, जिसमें उल्लेखित हो कि यह अपराध है।
लगता है जुर्माना
इन नियमों के उल्लंघन पर 200 रुपए तक का जुर्माना किया जा सकता है। यह जुर्माना पुलिस, प्रशासन, चिकित्सा महकमे के अधिकारी से लेकर सभी संस्था प्रधान कर सकते हैं।
नहीं की कार्रवाई
इसको लेकर पुलिस की ओर से सालभर में 133 जुर्माने किए गए हैं। इसके अलावा किसी ने भी ध्यान नहीं दिया। चिकित्सा महकमे ने अभी दो चालान किए हैं, वो भी अपने ही कार्मिकों के। एेसे में इसकी पालना नहीं हो रही।
करेंगे कार्रवाई
तंबाकू अधिनियम को लेकर चालान की कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए सभी चिकित्सा अधिकारी और संबंधित विभागों को निर्देश दिए जाएंगे।
डॉ. सुनिलकुमारसिंह बिष्ट, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, बाड़मेर
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