5 सितंबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

यों समझिए बाड़मेर-जैसलमेर के ए टू जेड मुद्दे

इन मुद्दों को लेकर क्या किया जा रहा है? बाड़मेर-जैसलमेर के मुद्दों पर ए टू जेड का नया नजरिया
4 min read
Google source verification
Understand the A to Z issue of Barmer-Jaisalmer

Understand the A to Z issue of Barmer-Jaisalmer

बाड़मेर. लोकसभा चुनाव तीन दिन बाद है। 29 अप्रेल को होने वाला यह चुनाव बाड़मेर-जैसलमेर जिले की तकदीर और तस्वीर के लिए भी जरूरी है। लोकतंत्र में मत का प्रयोग अवश्य करें लेकिन इससे पहले ध्यान रखें कि मुद्दे क्या है। इन मुद्दों को लेकर क्या किया जा रहा है? बाड़मेर-जैसलमेर के मुद्दों पर ए टू जेड का नया नजरिया-

ए- एनिमल हजबेंडरी-पशुपालन-

अकाल के कारण पशुओं की मौत हो रही है। इन पशुओं के संरक्षण को लेकर प्रयास, जिले के पशुमेलों के संरक्षण को प्रयास। बाड़मेर-जैसलमेर दोनों जिलों में राज्यपशु ऊंट बहुतायत में है जो अब अस्तित्व की जंग लड़ रहे है। ऊंटों के संरक्षण सहित ऊंटनी के दूध से बनने वाले उत्पादों की मार्केङ्क्षटग बीकानेर की तर्ज पर बाड़मेर जैसलमेर से होनी चाहिए

बी-बॉर्डर डवलपमेंट-

बाड़मेर-जैसलमेर सीमावर्ती क्षेत्र है यहां भारतमाला, बॉर्डर के गांवों का विकास, सरहद की सुरक्षा और बीएडीपी प्लान पर समुचित खर्च, थार एक्सप्रेस का ठहराव बॉर्डर के मुख्य मुद्दे है
सी- सीमेंट कारखानें- कोयला आधारित जिले में दस हजार से अधिक मेगावाट के पॉवर प्लांट है। जैसलमेर और बाड़मेर में कोयले की राख से सीमेंट के कारखानों की शुरूआत हो सकती है

डी- डेजर्ट और डीएनपी-

दोनों ही जिले मरूस्थलीय है। मरूस्थल विकास बोर्ड अभी कागजोंमें है। बाड़मेर-जैसलमेर जिले के डेजर्ट नेशनल पार्क(राष्ट्रीय मरू उद्यान) क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं का विकासहों

इ- एनर्जी एण्ड एज्युकेशन -

सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा संयत्रों के जरिए बाड़मेर-जैसलमेर दोनों जिलों में विकास। इलेक्ट्रिसिटी में भी जिले में 11000 के करीब गांव ढाणियां बिजली से वंचित है, इनको 2022 तक विद्युतिकृत कियया जाए। जिले में एज्युकेशन को लेकर काम्लेज

एफ- फर्टीलाइजर-

कृषि क्षेत्र का रेगिस्तान में विकास एक दशक में जबरदस्त हुआ है। 17 अरब का जीरा पैदा हो रहा है। यहां अनार होने लगा है। कृषि विश्वविद्याल, जीरा मण्डी और गौण मंडियों सहित आयुर्वेद उत्पाद के लिए किसानों को विशेष योजनाएं मिले

जी- ग्राउण्ड वाटर-

रेगिस्तान में सरस्वती नदी कभी बहती थी। इसके प्रमाण मिले है। सरस्वती की खोज कर भूमिगत जल को बढाने के प्रयास किए जाए

एच- हैल्थ -

मेडिकल कॉलेज सहित जिले में चिकित्साकर्मियों के रिक्त पदों पर नियुक्तियां, महिला स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान
आई-इन्कम सोर्स- बाड़मेर जैसलमेर में में तेल गैस, कृषि, खनिज, हैण्डीक्राफ्ट और पर्यटन इन्कम के बड़े सोर्स है,इनके लिए विशेष योजना बने

जे - जोजरी रिवर प्रॉब्लम-

जोधपुर के ओद्यौगिक क्षेत्र से बहता पानी जोजरी नदी में आता है और यहां से बाड़मेर जिले के डोली, धवा, आराबा तक रसायनिक पानी फैल रहा है। इसके लिए ट्रीटमेंट प्लांट और नाले की दरकार है

के- किडनी हॉस्पीटल-

बाड़मेर-जैसलमेर दोनों जिलों में किडनी और कैंसर के रोगी लगातार बढ़ रहे है। जोधपुर व गुजरात ही इलाज का जरिया है। यहां पर किडनी और कैंसर के लिए हॉस्पीटल पूरे मारवाड़ क्षेत्र क लिए स्थापित किया जा सकता है।

एल- लूणी रिवर प्लान-

अजमेर से चलकर बाड़मेर होते हुए सांचौर तक जा रही लूणी नदी के विकास के लिए लूणी रिवर प्लान की जरूरत है। इस नदी के किनारे पौधे और इसके बहाव क्षेत्र से अतिक्रमण हटाकर इसे पुनर्जीवित करना, नर्मदा नहर से जोडऩा।

एम- मास्टर प्लान-

खनिज- गैस-तेल के बूते बाड़मेर का विकास हो रहा है। अब प्रदेश के ओद्यौगिक जिलों में शुमार है। इसका मास्टर प्लान के अनुरूप बाड़मेर दुबई बने इसका मास्टर प्लान तैयार हों।

एन- नेशनल हाईवे-

जिले से गुजर रहे नेशनल हाईवे के अलावा सिवाना-जालौर, पाली-बाड़मेर को भी हाईवे से जोडऩा
ओ- ऑयल एण्ड गैस- जिले में तेल गैस की खोज को लेकर एक लाख करोड़ का प्रोजेक्ट बना है। प्राकृतिक गैस के दोहन की दरकार है। तेल के नए क्षेत्र के साथ बाड़मेर-सांचौर बेसिन में गैस की विपुल संभावनाए है।

पी- पॉपलीन उद्योग-

बालोतरा व जसोल में पॉपलीन का बड़ा उद्याग है। प्रदूषण एवं अन्य वजह से प्रभावित है। सीइपीटी प्लांट लगाकर संबल दिया जाए। करीब 1100 इकाइयां संचालित है

क्यू-क्वालिटी-

45000 करोड़ का जिले का वार्षिक प्लान है लेकिन क्वालिटी डवपलमेंट को लेकर शिकायत रहती है। भ्रष्टाचार के आरोप गांव से जिले तक लग रहे है। इस पर नियंत्रण के लिए प्रयास हों

आर-

रिफाइनरी का 43 हजार करोड़ का प्रोजेक्ट है, 2022 तक प्रोजेक्ट पूरा होना चाहिए

एस-

सिवाना रेअर अर्थ- 9000 अरब का खजाना सिवाना की पहाडि़यों में है। रेअर अर्थ के इस खजाने पर काम होता है तो चीन की मॉनोपोली टूटेगी। छप्पन की पहाडि़यों में विकास का काम प्राथमिकता से हों।

टी -ट्रेफिक एण्ड टूरज्मि-

परिवहन के लिए जैसलमेर-बाड़मेर-कांडला रेलमार्ग, बाड़मेर से हवाई सेवा और बाड़मेर-मुम्बई सहित लंबी दूरी की रेलें जरूरी है। पर्यटन विकास के लिए जैसलमेर व बाड़मेर में विशेष योजना की दरकार, बाखासरा का सूखा बंदरगाह भी परिवहन की बड़ी जरूरत है।

यू - अरबन डवलपमेंट-

बाड़मेर-बालोतरा दोनों शहरों में सिवरेज, यूआईटी प्लान , कॉलोनी डवलपमेंट व सौंदर्यकरण के लिए विशेष बजट

वी - विलेज डवलपमेंट-

सांसद आदर्श ग्राम योजना हों या अन्य योजनाएं गांवों के विकास में अभी पिछड़ापन है। ग्रामीण विकास की योजनाओं में पक्के काम, हुनरमंद को रोजगार और महिला रोजगार को बढ़ावा दिया जाए
डब्ल्यू- वाटर प्रॉब्लम- जिले में पेयजल की गंभीर समस्या है। नर्मदा-इंदिरा और सहित चारों परियोजनाओं को बजट मिले

एक्स-जीरॉक्स दुबई-

बाड़मेर को राजस्थान का दुबई कहा जा रहा है। तेल-गैस के बूते दुबई की तरह बाड़मेर का विकास हों इसके लिए मास्टर प्लान बने और यहां दुबई की तर्ज पर ही तेल-गैस के बूते आर्थिक क्रांति लाई जाए।

वाई - ईयर एडवेंचर-

बाड़मेर में थार महोत्सव, बाड़मेर स्थापना दिवस, रेडाणा का रण में घुड़दौड़, तिलवाड़ा पशु मेला सहित विभिन्न वार्षिक आयोजन से पर्यटन का विकास

जेड-जू फॉर डेजर्ट-

बाड़मेर-जैसलमेर के 73 गांवों में राष्ट्रीय मरूउद्यान है जहां पर रेगिस्तान के पौधे और पशुओं का संरक्षण किया जा रहा है लेकिन यह कागजी है। राष्ट्रीय मरूउद्यान का वास्तविक डवलपमेंट हों और जैसलमेर की तरह बाड़मेर में भी पर्यटकों के लिए डेजर्ट सफारी सहित अन्य आयोजन यहां किए जा सकते है।