
Vaikal Viratara fair celebrates festivities
चौहटन. भाद्रवा तेरस से पूर्णिमा तक लगने वाले मेले की विशेष मान्यता के चलते इस दिन सबसे बड़ा मेला भरता है। शनिवार तेरस को शुरू हुए वीरातरा मेले के दूसरे दिन श्रद्धा का सैलाब उमड़ा। इस दौरान बड़ी तादाद में देवीभक्त वांकलमाता के जयकारों के साथ वीरातरा की तरफ उमड़ते नजर आए।
उहोंने मंदिर में पूजा-अर्चना की तथा दंडवत धोक लगा मन्नतें मांगी। सैकड़ों डीजे की धुनों पर नाचते-गाते पैदल यात्रियों के हुजूम उमडऩे लगे। वीरातरा पहुंचने वाले हर मार्ग पर पैदल संघ और पैदल यात्रियों सहित वाहनों की कतारें लगी रही।
जात लगाने पहुंचे नवविवाहित जोड़े
मेले में सैकड़ों नवविवाहित जोड़े अपने सुखद दाम्पत्य जीवन की कामना को लेकर जात देने पहुंचे। उन्होंने वांकलमाता के निज मंदिर सहित बारह मंदिरों में पूजा-अर्चना कर धोक लगाई। वहीं वैरमाता मार्ग पर स्थित खोड़ा खेजड़ा के पास सुसज्जित नवविवाहितों की कतारें लगी रही। लोगों ने अपने नवजात शिशुओं की जात व उपनयन संस्कार के लिए झाड़ूले उतारने की रस्म अदा की।
सजी भजनसंध्याएं
चौदस की रात में मंदिर ट्रस्ट की ओर से जागरण का आयोजन हुआ। इसमें हजारों श्रद्धालुओं ने देवी शक्ति की महिमाओं पर आधारित भजनों का आनन्द लिया। इसके अलावा पैदल संघों की ओर से भी अलग-अलग स्थानों पर अपने अंदाज में भजनसंध्याओं का आयोजन किया।
ट्रस्ट सहित प्रशासन लगा व्यवस्था में
मेले में उपखंड अधिकारी भूपेन्द्र कुमार यादव, थानाधिकारी रमेश ढाका, तहसीलदार विजयसिंह राजपुरोहित सहित ट्रस्ट अध्यक्ष सगतसिंह परो, सचिव भेरसिंह ढोक सहित ट्रस्टमंडल के पदाधिकारी व श्रद्धालु प्रबन्धन एवं कानून एवं शांति व्यवस्था में जुटे रहे।
रोशनी से नहाया धवल मंदिर
श्वेत संगमरमर के पत्थरों से निर्मित वांकलमाता के धवल निज मंदिर को सुंदर रोशनी और फूलमालाओं से सजाया गया है तथा समूचे मेला परिसर में सजावट की गई है। प्रसाद, पूजा सामग्री सहित खाद्य एवं पेय पदार्थों, खिलौनों की दुकानों पर खासी भीड़ नजर आई। वहीं मेला परिसर एवं आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धालुओं ने नि:शुल्क जलपान के लिए भी अपने स्टाल लगा रखे है।

Published on:
24 Sept 2018 11:37 am
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