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सिंचाई क्षेत्र में बसे गांवों को मिल रही है यह सजा, चिमनी की रोशनी में रहने को है मजबूर, जानिये पूरी खबर

- पांच घंटे ही विद्युत आपूर्ति, अंधेरे में रहने को मजबूर ग्रामीण
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बाड़मेर

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Ratan Dave

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Updated: 27 Nov 2017, 1:48 PM IST

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बाड़मेर. शिव उपखण्ड के कई गांवों के ग्रामीणों को सिंचित क्षेत्र में बसने की जैसे सजा ही मिल रही है। इन गांवों में सरकारी आदेश और नियमों को धत्ता बता डिस्कॉम चौबीस घंटे में मात्र पांच-छह घंटे बिजली देता है, वह भी रात में। स्थिति यह है कि मोबाइल चार्ज करने से लेकर छोटे-मोटे कामों के लिए भी लोगों को रात में बिजली आने का इंतजार करना पड़ता है। यह समस्या एक-डेढ़ माह से है, जिसको लेकर ग्रामीणों ने विरोध किया, लेकिन स्थिति जस की तस ही है।
स्वामी का गांव फीडर व हड़वा जीएसएस से जुड़े शिव बेल्ट के स्वामी का गांव, बरसिंगा, काने का गांव, आंतरा, मतुआ, आलीजाळ सहित करीब डेढ़ दर्जन गांवों व कई ढाणियों में लोग अघोषित बिजली कटौती की मार सह रहे हैं। इन गांवों में सरकार के आदेशानुसार कम से कम बारह घंटे बिजली देने का प्रावधान है, लेकिन यहां मात्र पांच-छह घंटे ही आपूर्ति हो रही है। इसका कारण भी अजीब है कि ये गांव सिंचित क्षेत्र में आते हैं, एेसे में कृषि कुओं पर विद्युत आपूर्ति के वक्त ही इनको बिजली मिलेगी। यह समस्या पिछले डेढ़- दो माह से है।

सिंगल फेस भी नहीं
हालांकि कृषि कुओं पर विद्युत आपूर्ति के वक्त इन गांवों में थ्री फेस विद्युत आपूर्ति होती है, लेकिन इसके बाद गांवों में बिजली बंद रहती है। अमूमन रात्रि बारह बजे के आसपास थ्री फेस बिजली आपूर्ति होती है, लेकिन इसके बाद सिंगल फेस की भी आपूर्ति नहीं होती। एेसे में मोबाइल चार्ज सहित कई आवश्यक काम भी प्रभावित हो रहे हैं।

आंदोलन से भी नहीं हुआ सुधार
बिजली कटौती से परेशान बरसिंगा गांव के बाशिंदों ने कुछ दिन पहले जीएसएस का घेराव कर आंदोलन किया था। इसके बाद डिस्कॉम ने आश्वासन भी दिया कि व्यवस्था में सुधर होगा, लेकिन एेसा नहीं हुआ।

चिमनी की रोशनी में रहने को मजबूर
कहने को तो हमारे गांव विद्युतीकृत है, लेकिन पिछले डेढ़-दो माह से चिमनी की रोशनी में रहने को मजबूर है। इसका कारण डिस्कॉम की अघोषित विद्युत कटौती है। रात्रि में चार-पांच घंटे ही बिजली की आपूर्ति हो रही है। लोग परेशान है, लेकिन डिस्कॉम ध्यान नहीं दे रहा।- भंवरसिंह राठौड़, ग्रामीण स्वामी का गांव