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कर्नल सोनाराम चौधरी आज क्या करेंगे, इस पर है सबकी नजर

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What will Colonel Sonaram Chaudhari do today, it is on everyone's eyes

What will Colonel Sonaram Chaudhari do today, it is on everyone's eyes


कर्नल सोनाराम चौधरी आज क्या करेंगे, इस पर है सबकी नजर
बाड़मेर पत्रिका.
भाजपा में टिकट काटे जाने के बाद कर्नल सोनाराम चौधरी आज कोई भी निर्णय कर सकते है। कर्नल ने लोकसभा में नामांकन के लिए अपना आवेदन मंगवा लिया है और अपने समर्थकों की बैठक भी सम्मान व धन्यवाद सभा के नाते अपने आवास पर बुलाई है। कर्नल की यह पंचायत ही तय करेगी उनको आज करना क्या है। राजनीतिक गलियारों में इसको लेकर बड़ा असमंजश है। कर्नल के किसी भी निर्णय को लेकर अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है। स्वभावगत वे अपने निर्णय स्वयं लेने की कूवत रखते है। भाजपा से उनका टिकट कटना उनको गवारा नहीं था,इसलिए उन्होंने इसको लेकर भरसक प्रयत्न किए थे। सोमवार को यहां भाजपा के केन्द्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, प्रदेश अध्यक्ष मदनलाल सैनी की उपस्थिति में भाजपा के प्रत्याशी कैलाश चौधरी ने नामांकन दाखिल किया और सभा का आयोजन भी किया। इसमें भी कर्नल सोनाराम चौधरी नहीं आए।
कर्नल की बैठक में पहुंचेंगे समर्थक
कर्नल ने संपूर्ण लोकसभा क्षेत्र से अपने समर्थकों को बुलाया है। इसको लेकर कर्नल सोनाराम चौधरी स्वयं ने न तो विरोध का स्वर अभी तक मुखर किया है और न ही बयान दिया है कि वे क्या करेंगे। उनके लोगों का कहना है कि यह सम्मान सभा होगी।
कांग्रेस भाजपा दोनों में है खलबली
कांग्रेस और भाजपा दोनेां में ही इसको लेकर खलबली है कि कर्नल की इस सभा में होगा क्या? कांग्रेस चाहती है कि कर्नल ऐसा कोई निर्णय ले ले और उम्मीदवार बन जाए तो उनके लिए यह निर्णय फायदेमंद साबित हो सकता है। इधर भाजपा इसको लेकर परेशान है कि कर्नल ने कहीं आवेदन भर दिया तो इससे बड़ा घाटा हो जाएगा। कर्नल जीत नहीं सकते लेकिन जीत का गणित बिगाड़ सकते है।
गौरतलब है कि कर्नल सोनाराम चौधरी चार बार सांसद रहे है। बायतु से पहला विधायक का चुुनाव कांग्रेस से जीते। दूसरे चुनाव में उन्हें भाजपा के कैलाश चौधरी ने हराया था। इसके बाद वे कांग्रेस छोड़ भाजपा में आ गए। उन्होंने भाजपा के दिग्गज नेता रहे और निर्दलीय चुनाव लड़ रहे जसवंतसिंह को हराया था। जसवंतङ्क्षसह की हार से कर्नल का कद भाजपा में बढ़ गया लेकिन उन्होंने 2018 के विधानसभा चुनावों में बाड़मेर विधानसभा से जिद्द कर चुनाव लड़ा और वे यहां शिकस्त खा गए। इस हार के बाद कर्नल का विकल्प भाजपा तलाशने लगी और आखिरकर कर्नल का टिकट काटकर कैलाश चौधरी को टिकट दिया गया है।