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हास्य रस की फुलझडिय़ों के साथ वीरता का जोश रहा परवान पर

थार महोत्सव में आदर्श स्टेडियम में कवि सम्मेलन -प्रसिद्ध कवियों की रचनाएं सुनने बड़ी संख्या में पहुंचे श्रोता-

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हास्य रस की फुलझडिय़ों के साथ वीरता का जोश रहा परवान पर

हास्य रस की फुलझडिय़ों के साथ वीरता का जोश रहा परवान पर

बाड़मेर. कविता का हर रस यहां आदर्श स्टेडियम में सोमवार को खूब नजर आया। रचनाकारों की प्रत्येक प्रस्तुति पर दर्शक दाद देते दिखे। आगाज के साथ ही कवि सम्मेलन का रंग जमाना शुरू हो गया। हास्य, श्रंगार, वीर और कविता के हर उस रस का कवियों ने श्रोताओं को पान करवाया। देर रात से शुरू हुआ कवि सम्मेलन में रचनाकारों की प्रस्तुति ने श्रोताओं को बांधकर रखा और हास्य के साथ जोश भी जगाते रहे।

थार महोत्सव के आगाज के दिन सोमवार शाम को आदर्श स्टेडियम में पहुंची दर्शकों की भारी भीड़ को देखकर ही अंदाजा लगाया जा सका कि यहां के लोग कला के कितने बड़े कद्रदान है। यहां मंच के सामने लगी कुर्सियां भर गई तो लोगों को जहां जगह मिली वहीं बैठ गए। बस प्रसिद्ध कवियों की रचना सुनाई दे जाए।बांधा समा,

देर तक जमे श्रोतारचनाओं का सिलसिला फिर शुरू हुआ तो मानों रात को कविताओं का समां बंध गया। दिनभर की तपिश को हास्य की बौछारों ने जैसे ठंडा कर दिया। अपनी सीट से बिना हिले श्रोता बस एकटक अपने अजीज रचनाकारों की कविताएं सुनते रहे। समय का मानो पता ही नहीं चला। कवियों ने कभी गुदगुदाया तो कभी वीर रस की रचना सुनाकर माहौल में जोश भर दिया।

पचपदरा पत्रिका. हास्य कवि की हास्य से लबरेज चुटीली कविताओं से कर हंसी के फव्वारे छूटे तो वीर रस की स्कड मिसाइलनुमा कविताओं से थार थराज़् उठा। यह सेठ गुलाबचंद सालेचा स्मृति न्यास पचपदरा की मेजबानी में आदशज़् विद्या मंदिर मैदान में सेठ गुलाबचंद सालेचा की पुण्यतिथि पर सजे एक शाम सेठ गुलाबचंद सालेचा के नाम विराट कवि सम्मेलन का नजारा था। जिसमें देश के नामी कवियों ने अपनी कविताओं से रसिक श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया।
कवि सम्मेलन में अंतराष्ट्रीय कवि व तारक मेहता का उल्टा चश्मा के अभिनेता शैलेश लोढ़ा,हास्य कवि मुन्ना बैटरी और पाथज़् नवीन ने हास्य व्यंग्य की कविताएं सुनाकर श्रोताओं को अभिभूत कर दिया।इसके पश्चात अंतरराष्ट्रीय गीत गजल गुलदस्तान सुमित्रा सरल (रतलाम) ने गुरु वाणी सहित हिंदू-मुस्लिम एकता पर शाइरी व गजल सुना कर रंग जमाया ।वीर रस के ओजस्वी कवि विनीत चौहान (अलवर) ने वीर गाथाएं और देशप्रेमी कविताओं से सभी दशज़्कों में जोश का संचार किया।


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