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फैलने लगा नर्मदा नदी का बैक वॉटर, इन गांवों में बाढ़ का खतरा

135.40 मीटर पर नर्मदा, बांध के पूर्ण लेवल से करीब दो मीटर पानी कम...।

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बड़वानी। प्रदेश में हो रही बेहतर बारिश से प्रदेश की जीवनदायिनी मां नर्मदा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। शहर के समीप राजघाट में बीते दो वर्ष बाद इस बार नर्मदा नदी का जलस्तर उच्च स्तर पर 135.40 मीटर पहुंचा हैं, जो अब पूर्ण लेवल 138.60 मीटर से करीब तीन मीटर ही नीचे हैं। जलस्तर बढ़ने से तटीय क्षेत्र के बड़े क्षेत्रफल में पानी ही पानी नजर आ रहा हैं। शहर के आसपास पहाड़ी क्षेत्रों से नर्मदा का बैकवाटर का विशाल फैलाव नजर आने लगा हैं।

बता दें कि बीते वर्ष अगस्त के आधे माह के दौरान भी नर्मदा का आंचल सूखा था और जलस्तर खतरे के निशान से काफी नीचे था और पानी का स्तर नए घाट से नीचे था, लेकिन इस बार जुलाई माह से ही हो रही सतत बारिश से अगस्त से पूर्व ही नर्मदा खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। प्रदेशभर में हो रही भारी बारिश के मद्देनजर नर्मदा पर बने बांधों से भी लगातार पानी छोड़ा जा रहा हैं। वहीं जल भराव के मद्देनजर सरदार सरोवर बांध परियोजना के गेट्स खोलने पड़े हैं।

जानकारी के अनुसार गुरुवार रात्रि में नर्मदा के जलस्तर में एक मीटर कमी आई थी, लेकिन शुक्रवार दोपहर बाद तक जलस्तर में करीब दो मीटर की बढ़ोतरी हुई है। जो शाम तक जारी रही। नर्मदा का जलस्तर बढ़ने से तटीय क्षेत्र फिर से टापू बनने लगे हैं। यहां किसानों की फसलें खराब होने का खतरा भी मंडराने लगा है।

टापू पर चढ़ने लगा पानी, 17 परिवार अभी भी वहीं गुजर बसर कर रहे

ग्रामीण देवेंद्र सोलंकी ने बताया कि प्लॉट-मुआवजे की मांग को लेकर अब भी टापू पर बसे हैं। वर्ष 2019 में पूर्ण डूब के समय टापू छोड़ना पड़ा था, लेकिन उसके बाद वर्ष 2020 और 2021 में टापू पर ही डटे रहे। इस बार भी करीब 17 परिवार के लोग अभी टापू पर गुजर-बसर कर रहे हैं। बैकवाटर से कई किसानों के खेत डूब गए, तो कई के टापू में तब्दील हो गए। एनवीडीए के कार्यपालन यंत्री एसएस चौंगड़ ने बताया कि शुक्रवार शाम 6 बजे तक शहर के समीप कुकरा में नर्मदा का जलस्तर 135.40 मीटर पहुंचा। खलघाट में जलस्तर 137.10 मीटर रहा।