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पांच साल से बंद लॉ कॉलेज में डेढ़ लाख किताबें खा रहीं धूल

एसबीएन कॉलेज में आज भी लॉ कॉलेज की डेढ़ लाख किताबें खा रही धूल, जन भागीदारी अध्यक्ष ने कहा करेंगे प्रयास

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Demand for law college to be started

Demand for law college to be started

बड़वानी. आदिवासी जिला बड़वानी यू तो कई सौगातों से महरूम है, लेकिन मिली हुई सौगातों को भी बचाने में जिले के अधिकारी नाकाम साबित हुए है। इसमें से एक जिले में संचालित हो रहा विधि महाविद्यालय शामिल है। पांच साल पहले तक जिले में विधि महाविद्यालय संचालित हो रहा था। बाद में बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों का हवाला देकर लॉ कॉलेज को बंद कर दिया गया था। तब से बंद हुए लॉ कॉलेज को शुरू करने की कोई पहल अब तक नहीं की गई। जबकि आज तक बंद हुए लॉ कॉलेज की डेढ़ लाख पुस्तकें भी लायब्रेरी में पड़ी धूल खा रही है। आदिवासी बाहुल्य जिले के विधि में रूची रखने वाले विद्यार्थियों को इंदौर पढऩे जाना पड़ रहा है।


वर्ष 2011-12 तक लॉ की पढ़ाई हो रही थी
शहीद भीमानायक पीजी कॉलेज में वर्ष 2011-12 तक लॉ की पढ़ाई हो रही थी। इस बीच बार काउंसिल ने एक नियम लागू किया था, जिसमें लॉ कॉलेज की पढ़ाई के लिए अपना अलग भवन, अलग लायब्रेरी, अलग मैदान और स्वयं का स्टाफ व प्राचार्य होना अनिवार्य था। इस नियम के चलते एसबीएन पीजी कॉलेज से लॉ की पढ़ाई बंद करना पड़ी। यहां कॉलेज बंद होने के दौरान 35 विद्यार्थी विधि की पढ़ाई कर रहे थे। कॉलेज प्रशासन ने नए एडमिशन लॉ के लिए बंद कर दिए। लॉ की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों की पढ़ाई पूरी होने के बाद लॉ कॉलेज का अस्तीत्व पीजी कॉलेज से खत्म हो गया।


किसी ने नहीं किए प्रयास
बार काउंसिल के नियमों के चलते बंद हुआ लॉ कॉलेज को शुरू कराने के किसी ने प्रयास नहीं किए। जबकि नियमों को पूरा करने के लिए बार काउंसिल ने कॉलेज को आठ माह का समय भी दिया था। एसबीएन कॉलेज में हॉकी ग्राउंड के पास काफी जमीन अभी भी खाली पड़ी हुई है। जनभागीदारी समिति के खातें भी एक करोड़ से ज्यादा रुपए जमा है। लॉ कॉलेज में प्राचार्य और स्टाफ भी पदस्थ था। केवल भवन की दिक्कत थी। यदि अधिकारी और कॉलेज प्रशासन दृढ़ इच्छाशक्ति दिखाता तो आसानी से लॉ कॉलेज पुन: शुरू कराया जा सकता था। लायब्रेरी और मैदान पीजी कॉलेज के लॉ कॉलेज से साझा किए जा सकते थे। न जनप्रतिनिधि, न प्रशासनिक अधिकारियों ने इसमें रूची दिखाई और लॉ की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को नुकसान उठाना पड़ा।


कुछ आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर पा रहे थे
एसबीएन कॉलेज के जनभागीदार समिति अध्यक्ष राजेश पंडित ने बताया कि जब वे जनभागीदारी समिति के सदस्य थे, तब लॉ कॉलेज बंद हुआ था। तब भी समिति की ओर से कई प्रयास किए गए थे, लेकिन बार काउंसिल ऑफ इंडिया की कुछ आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर पा रह थे। अब इसके लिए पुन: प्रयास शुरू किए है। प्रशासन और बार काउंसिल के बीच भी चर्चा चल रही है। सरकार से लॉ कॉलेज के लिए भी चर्चा की जा रही है। सभी के प्रयासों से एक बार फिर लॉ कॉलेज शुरू कराया जाएगा, ताकि आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र के विद्यार्थियों को इसका लाभ मिल सके।


किया है पत्राचार
लॉ कॉलेज के लिए कई बार पत्राचार किया जा चुका है। चुंकि बीसीआई के नियमों को पूरा करना है, इसके लिए सरकार और बीसीआई के बीच समन्वय हो रहा है। सबकुछ ठीक रहा तो लॉ कॉलेज फिर से आरंभ हो जाएगा।
-डॉ. जेके गुप्ता, प्रभारी प्राचार्य, एसबीएन कॉलेज


बाद में प्रयास बंद हो गए
मेरे लॉ कॉलेज के प्राचार्य रहते हुए तत्कालीन समय में कॉलेज को बनाए रखने के प्रयास किए गए थे। कई बार सरकार से पत्राचार भी किया, लेकिन कोई निर्णय नहीं हो पाया। कॉलेज से स्थानांतरण के बाद प्रयास बंद हो गए। अभी वर्तमान स्थिति मुझे नहीं पता।
-डॉ. पी गौतम, तत्कालीन प्रभारी प्राचार्य लॉ कॉलेज