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गंबुशिया मछली करेगी मलेरिया की जड़ का शिकार

मच्छर पैदा होने वाले बड़े स्थानों पर छोडेंगे मछली, स्टापडेम, तालाब छोटी नदी में छोड़ी जाएगी मछलियां, शहरी क्षेत्रों में सब सेंटरों की मदद से रखेंगे मलेरिया पर नजर

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made a shelter for fish at menar lake

Gambusia fish will kill the root of malaria

बड़वानी. लगातार बारिश होने से जलजमाव की समस्या आम बात है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग को इस बारिश ने अर्लट कर दिया है। खास कर मलेरिया विभाग ने बारिश के चलते एहतियातन कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। जहां जिले में मलेरिया रोगियों की पहचान के लिए स्लाइड लेना शुरू कर दी गई है। वहीं जिन क्षेत्रों में तालाब, नाले, नदी स्टामडेम हैं वहां मलेरिया की जड़ का शिकार करने के लिए गंबुशिया मछली छोडऩे की भी तैयारी की जा रही है। हालांकि यह कोईनई बात नहीं है, लेकिन इस बार बारिश जिस रफ्तार से लगातार गिर रही है, जलस्त्रोतों में पानी भी तेजी से बढ़ रहा है।ऐसे में यह मछलियां मच्छरों का शिकार करके कुछ हद तक समस्या का समाधान करने में मददगार साबित होगी।
मलेरिया विभाग हुआ अलर्ट
बारिश की दस्तक के साथ ही मलेरिया का खतरा बढ़ता देख मलेरिया विभाग अलर्ट हो गया है। जिले की ब्लॉकों पर सब सेंटरों को चिन्हित किया गया है। अब यहां पर विशेष नजर रखी जाएगी। यह सेंटर ऐसे है जहां पर लक्ष्य से कम स्लाइड बनाई गई हैं। जिला मलेरिया अधिकारी वसीम शेख ने बताया कि पिछले पांच वर्षों के मुकाबले इस वर्ष जिले में मलेरिया के मरीजों की संख्या कम हैं। लेकिन ऐसे क्षेत्र जहां तय लक्ष्य से कम स्लाइड बनी है वहां पर निगरानी रखी जाएगी। जिले के 7 ब्लॉकों में करीब 160 सब सेंटर ऐसे है जहां पर स्लाइड कम बनी है। इन सेंटरों पर विशेष सतर्कता बरती जाएगी। इनकी सूची बीएमओ को पहली ही दी जा चुकी है। यहां एएनएम व एमपीडब्ल्यू जाकर जांच करेगी। साथ ही आवश्यक जानकारियां भी देगी। इसके अलावा अगर किसी को मच्छरदानी का जरूरत है तो उसे यह उपलब्ध कराई जाएगी।
गंबुशिया मछली भी छोड़ेंगे
जिला मलेरिया अधिकारी ने बताया कि शासन स्तर से समय-समय पर दिशा-निर्देश मिलते रहते हैं। इसके अलावा नदी, तालाब और स्टॉपडेम सहित ऐेसे स्थान जहां पानी जमा होता हैै वहां पर गम्बुशिया मछली भी छोड़ी जाएगी। यह मछलियां मत्स्य विभाग की मदद से छोड़ी जाएगी।
मलेरिया से बचने के लिए ये करें बचाव
-घरों से निकलने वाले पानी को आसपास जमा न रहने दें।
-बर्तनों में अधिक दिन तक पानी जमा न रहने दें।
-दलदली जमीन को सुखा कर पौैधारोपण करें।
-स्टॉपडेम, कुओं, नदियों के रुके पानी में लार्वाभक्षी मछलियां डाले।
यह हैं मलेरिया के लक्षण
ठंड लगकर बुखार आना व पसीना होकर बुखार आना। सर्दी व कंपन के साथ बुखार आना। एक दिन छोड़कर बुखार आना। उल्टियां व सिरदर्द होना। बुखार उतरने के बाद थकावट कमजोरी होना।