
Old issues will resume in Lok Sabha elections
ऑनलाइन खबर : विशाल यादव
बड़वानी. लोकतंत्र के महासमर का आगाज भारत निर्वाचन आयोग के लोक सभा चुनाव की तारीख घोषित करते ही हो चुका है। खरगोन/बड़वानी लोकसभा संसदीय सीट के लिए सातवें चरण में 19 मईको मतदान होना है। दोनों ही प्रमुख पार्टियों के पास अपने मतदताओं को लुभाने के लिए दो माह से ज्यादा का समय है। लोकसभा चुनाव में एकबार फिर पुराने मुद्दों की गूंज सुनाई देगी। हर बार चुनाव में दोहराए जाने वाले वादे एक बार फिर सुनाई देंगे। जिले में आज भी पलायन, बेरोजागारी, सरदार सरोवर बांध के डूब प्रभावितों का पुनर्वास, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे मुद्दे मुंह बाए खड़े है।आजादी के बाद से रेल का सपना भी जिलेवासियों का आज तक अधूरा है।
क्षेत्र में पलायन बड़ा मुद्दा है। काम की तलाश में खरगोन और बड़वानी से बड़ी संख्या में लोग गुजरात और महाराष्ट्र जाते हैं। इसे रोकने के लिए सांसद या राज्य सरकार द्वारा कोई प्रयास नहीं किए गए। कांग्रेस लगातार इस मुद्दे को उठाती रही है। साथ ही सबसे बड़ा मुद्दा पुनर्वास है। डूब क्षेत्र के लोग अपनी मांगों व समस्याओं को लेकर आज भी धरना प्रदर्शन व आंदोलन सहित जलसत्याग्रह कर रहे है। जिसके चलते डूब प्रभावित हमेशा ही सत्ताधारी दल से नाराज रहे है। रोजगार के मामले में भी बड़वानी जिला पिछड़ा हुआ हैै। जिले में उद्योग धंधे नहीं होने से ही पलायन भी हो रहा है। एक समय कपास जीनिंग हब माने जाने वाले सेंधवा से भी सारी जीनिंग फैक्ट्रियां बाहर चली गई है।एक मात्र उद्योग केंद्र खजूरी भी खाली पड़ा हुआ है।
शिक्षा, स्वास्थ्य में भी पिछड़े
आदिवासी बाहुल्य जिले में अधिकतर जनसंख्या पहाड़ी क्षेत्रों में बसर करती है। शिक्षा, स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी जिला पिछड़ा हुआ है। दूरस्थ क्षेत्रों में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं के चलते ग्रामीणों को जिला मुख्यालय तक आना पड़ रहा है। वहीं, जिला सिकलसेल जैसी बीमारी को लेकर भी सुर्खियों में रहा है।शिक्षा के क्षेत्र में भी जिला पीछे है। सरकारी स्कूलों से लेकर कॉलेजों तक सरकार करोड़ों रुपए शिक्षा के नाम पर खर्च कर रही है। इसके बाद भी गरीबी, पलायन के चलते अधिकतर बच्चे प्राथमिक शालाओं से आगे नहीं बढ़ पा रहे है।
तकनीकी शिक्षा में नहीं मिली सौगात
जिले में व्यवसायिक शिक्षा के साथ ही तकनीकी शिक्षा, मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, कृषि कॉलेज, लॉ कॉलेज के लिए कोईव्यवस्था नहीं है। गरीब आदिवासी बच्चे इन क्षेत्रों में जाने की भी नहीं सोच सकते। बड़वानी जिले के विकास के लिए रेल परियोजना एक सपना ही बनकर रह गई है। मनमाड़-इंदौर रेल लाइन की स्वीकृति मिली, लेकिन उसमें जिले का कुछ ही क्षेत्र आ रहा है। आजादी के बाद से खंडवा, खरगोन व्हाया बड़वानी-धार-दाहोद रेल परियोजना की मांग की जा रही है।इसको अभी तक स्वीकृति नहीं मिली है। इससे निमाड़ क्षेत्र का विकास ठहर सा गया है। यहां रेल मार्ग नहीं होने से उद्योग-धंधे और कारोबार पिछड़ रहा है।
सदन में नहीं बन सके क्षेत्र की आवाज
सांसद सुभाष पटेल सदन में क्षेत्र की आवाज नहीं बन सके। साढ़े चार साल में संसद में महज 96 प्रश्न पूछे। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर दो पूरक प्रश्न ही लगाए। खरगोन के किसानों ने सिंचाई सुविधा बढ़ाने और खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के लिए आवाज उठाई, लेकिन केंद्र और राज्य दोनों जगहों पर भाजपा की सरकार होने के बाद भी इसे मुखर नहीं कर पाए। क्षेत्र औद्योगिकीकरण के पिछड़ापन से नहीं उबर सका।
नेशनल हाइवे व रेल परियोजना का दावा
सांसद सुभाष पटेल का दावा है कि उन्होंने दोनों जिलों में सड़क, पुल-पुलिया, यात्री प्रतिक्षालय, सीसी रोड निर्माण सहित अन्य सौंगातें दी हैं। इनमें इंदौर-मनमाड़ रेलवे प्रोजेक्ट को केंद्र सरकार की स्वीकृति मिलने के साथ ही बजट में शामिल किया गया हैं। खंडवा-बड़ौदा स्टेट हाइवे को नेशनल हाइवे बनाने का मुद्दा संसद में उठाकर सरकार और केंद्रीय परिवहन मंत्री का ध्यानाकर्षित कराया। दोनों जिलों में 300 टीनशेड यात्री प्रतिक्षालय, कुंदा सहित खरगोन-जुलवानिया के बीच पांच पुल और सेंधवा से धनोरा, चाचरिया वाया धुलकोट बिस्टान रोड पर सीसी सड़क निर्माण शुरू करवाया है।
ये है प्रमुख मुद्दे
-शिक्षा व स्वास्थ्य
-रोजगार के अभाव में पलायन
-फसल बीमा योजना में गड़बड़ी
-फसलों का उचित दाम नहीं मिलने से किसानों की नाराजगी
Published on:
12 Mar 2019 10:25 am
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