
क्षतिग्रस्त पेयजल टंकी से हादसे का अंदेशा
महलां। झाग में जल प्रदाय विभाग की ओर से कस्बे के विभिन्न वार्डों में जलापूर्ति सुचारू करने के लिए वर्ष 1995 में लाखों रुपए की लागत से 1 लाख लीटर क्षमता की पेयजल टंकी बनाई गई थी। टंकी की मरम्मत नहीं होने से जगह-जगह से क्षतिग्रस्त होकर दरारे पडऩे के साथ पानी टपकता रहता है।
स्थानीय गणेशदत्त भार्गव, सीताराम भीच्छर, उपसरपंच जगदीशचंद्र सोऊ, गणेश प्रजापत आदि लोगों ने बताया कि वर्ष 1995 में पेयजल टंकी जलापूर्ति के लिए जलदाय विभाग की ओर से बनाई गई थी, जो अब मरम्मत के अभाव में जर्जर होकर गिरने के कगार पर है। कभी भी पेयजल टंकी गिर सकती है, जिसको लेकर लोगों में अनहोनी अंदेशा बना हुआ है।
जिम्मेदार नहीं दे रहे ध्यान
लोगों ने बताया कि टंकी के समीप सार्वजनिक मंदिर बना हुआ है, जहां पर प्रतिदिन दर्शनार्थियों का आवागमन लगा रहता है। वही आबादी भूमि के समीप टंकी बनी होने से ग्रामीणों में अनहोनी का डर बना रहता है। टंकी पर लगी लोहे की रेलिंग भी जर्जर होकर टूट चुकी है, जिसके चलते पानी टंकी की सफाई भी करने में जलदाय विभाग के कर्मियों को परेशानी के साथ मौत का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों का आरोप है कि 25 वर्ष पूर्व पेयजल टंकी बनने के बाद जलदाय विभाग ने इसकी मरम्मत की कोई सूध नहीं ली। टंकी से अब भी कस्बे के वार्डों में जलापूर्ति की जा रही है।
कभी भी हो सकता हादसा
स्थानीय जलदाय विभाग के कर्मी खतरा उठाकर जलापूर्ति के लिए भर रहे हैं। टंकी के चारों पॉल जगह-जगह से जर्जर हो रखे हैं। ग्रामीणों ने जलदाय विभाग के अधिकारियों को कई बार जर्जर पेयजल टंकी को दुरुस्त कर नवीन टंकी बनवाने की मांग की गई। इसके बावजूद अधिकारियों ने कोई कार्यवाही नहीं करते हुए मरम्मत तक नहीं करवाया। लोगों का आरोप है कि यदि प्रशासन ने इस और कोई कदम नहीं उठाया तो बड़े हादसे को अंजाम मिल सकता है।
इनका कहना...
झाग में बनी एक लाख लीटर क्षमता की पेयजल टंकी जगह-जगह से जर्जर हो गई है। जिसकी सफाई करने के लिए मौत को गले लगाते हुए सफाई करनी पड़ती है। जर्जर टंकी की समस्या के बारे में उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है।
बद्रीलाल शर्मा, जलदाय कर्मचारी, झाग
Published on:
09 Dec 2020 11:42 pm
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