
बस्सी (जयपुर)। बजेंगी शहनाइयां, सजेगी खुशियों की बारात। अबूझे सावे पर कई लाडो कम उम्र में ब्याह दी जाएंगी। जिसकी एक वजह यह भी होगी कि विवाह के आमंत्रण पत्र में वर-वधू की आयु लिखने के नियम की अनदेखी। इस नियम की सख्ती से पालना नहीं होने के कारण लोग निमंत्रण पत्र में वर-वधू की उम्र नहीं छपवा रहे। ऐसा नहीं है दो-चार कार्ड भी स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों-जनप्रतिनिधियों के पास नहीं पहुंचे होंगे, लेकिन नियमों पर अनदेखी हावी है। हालांकि इस बार भी अक्षय तृतीया पर प्रशासन बाल विवाह रोकने के प्रयास करेगा। अबूझ सावों पर बाल विवाह के मामले सामने भी आएंगे लेकिन ज्यादातर सम्पन्न होने के बाद ?
आयु छपवाना बाल विवाह रोकने में मददगार
जबकि निमंत्रण पत्र में आयु छपवाना बाल विवाह रोकने में मददगार साबित होता है। अगर किसी कार्ड में वर-वधू की उम्र सही नहीं होती तो जागरूक लोग प्रशासन तक शिकायत पहुंचा देते हैं। पंडित, बैंडवाले, टैंटवाले, हलवाई भी कार्ड में उम्र देखकर प्रशासन को सूचित कर देते हैं। नियमानुसार बाल विवाह में शरीक पाए जाने पर इन पर भी कार्रवाई का प्रावधान है। प्रशासन भी कार्ड में उम्र देखकर वर-वधू के उम्र संबंधित दस्तावेज जांचता है और लड़के की उम्र 21 एवं लड़की उम्र 18 वर्ष से कम होने पर बाल विवाह रुकवाने व समझाइश करता है। कम उम्र में विवाह हमारी लाडो के जीवन एवं सेहत के लिए अभिशाप है। निमंत्रण पत्र छापने वाले इन दिनों कार्ड छापने में व्यस्त हैं। 18 अप्रैल को अक्षय तृतीया के बाद 30 अप्रैल को पीपल पूर्णिमा का सावा रहेगा।
आदेशों की उड़ रही धज्जियां
यही नहीं विवाह निमंत्रण पत्रों में वर वधू की आयु अंकित करने के निर्देशों को प्रिटिंग प्रेस वाले हवा निकाल रहे है। जबकि प्रशासन की ओर से विवाह कार्ड पर आयु लिखने के सख्त निर्देश है। आगामी आखातीज का अबूझ सावा होने से शादी विवाह को लेकर प्रिटिंग प्रेस वालो के कार्ड छपवाने वालों की भरमार है। दूसरी ओर बाल विवाह की रोकथाम के लिए शादी कार्ड पर वर वधुओं की आयु छापने के सरकारी आदेशों की धज्जियां उड़ रही है। ऐसा नहीं है कि प्रशासनिक अधिकारी नियमों की अवहेलना को लेकर अनभिज्ञ है शहर में बांटे जा रहे बिना आयु लिखे कार्ड प्रशासनिक अधिकारियों के घरों तक भी पहुंच रहे है इसके बावजूद इसे गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।
राज्य सरकार ने किया था पाबंद
घरों में पहुंच रहे कार्डों मे कही भी दूल्हे व दुल्हनों की आयु छपी दिखाई नहीं दे रहीं इतना ही नहीं शहर के प्रिटिग प्रेस वाले आयु छापना तो दूर पूछना तक उचित नहीं समझ रहे है। जबकि राज्य सरकार ने 5 वर्ष पहले निर्देश जारी कर प्रदेश के सभी कलक्टर व एसपी का पालन कराने के लिए पाबंद किया था। इसके लिए सभी प्रिटिंग संचालकों को शादी के कार्ड पर दूल्हा दूल्हन की आयु छापने के लिए अभिभावकों से आयु प्रमाण पत्र मांगने की बाध्यता करने के निर्देश दिए थे। हलवाई से लेकर पण्डित, टैण्ट वालो को बाल विवाह में शरीक होने पर सजा का प्रावधान है। इसमें 02 साल की सजा या एक लाख रुपए का जुर्माना शामिल है। एएनएम से लेकर पटवारी, ग्रामसेवक, शिक्षक तक सभी को बाल विवाह की सूचना नजदीकी थाने में देने के लिए पाबंद किया गया है।
बाल विवाह रोकने की प्रयासों को बल मिलेगा
ऐसे में प्रशासन को भी सख्ती बरतनी चाहिए। इसलिए वैवाहिक निमंत्रण पत्र छापने वालों को भी इस नियम के लिए जागरूक होना चाहिए और उम्र के दस्तावेज देखकर ही वर-वधू की उम्र प्रकाशित करवाने के लिए परिजनों को प्रेरित करना चाहिए। इससे बाल विवाह रोकने की प्रयासो को बल मिलेगा और बेटियों के जीवन से यह कुरीति मिटाने के यज्ञ में सभी के लिए बड़ी आहूति साबित होगा।
Published on:
15 Apr 2018 06:56 pm
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