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mining mafia – यहां खनन माफियाओं की दबंगई, अधिकारी भी घबराते

क्षेत्र में 15 सालों से चल रहा अवैध खनन, अधिकारियों को जान का खतरा होने के कारण मौके पर जाने से कतराते है, राजनेताओं व अधिकारियों की छत्र छाया में होता काम

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mining mafia - यहां खनन माफियाओं की दबंगई, अधिकारी भी घबराते

mining mafia - यहां खनन माफियाओं की दबंगई, अधिकारी भी घबराते

पावटा। क्षेत्र को रेगिस्तान बना दिया व आम जन जीव प्रभावित, 60 से 100 फु ट गहराई तक खनन होने से आए दिन जान लेवा हादसे होते है, आरोप तो यह भी लगे है कि पुलिस प्रशासन की मिली भगत व खनन माफियाओं की दबंगाई के मामलों को दुर्घटनाओं का रूप देकर रफ दफा कर देते है। अधिकारियों को जान का खतरा होने के कारण मौके पर जाने से कतराते है।
इस संबंध में सहायक अभियंता सिंचाई विभाग यशपालसिंह का कहना है बनाडी बांध सहित अन्य खनन क्षेत्रों में अकेले जाना संभव नहीं है, कभी भी कोई हमला हो सकता है। पुलिस सुरक्षा बिना इन क्षेत्रों में जाना संभव नहीं है व पुलिस सुरक्षा मिलती नहीं है।

राजनेताओं व अधिकारियों की छत्र छाया
पावटा व इसक आस पास के करीब 2 दर्जन ग्रामों में कृषि भूमी राजकीय भूमी यहां तक बनाड़ी बाध के करीब 10 किलो मीटर में घड़ल्ले से हो रहा अवैध बजरी व पत्थर खनन जन जीवन के लिए खिलवाड़ बन गया है। गत 15 सालों से विभिन्न राजनेताओं व अधिकारियों की छत्र छाया में चल रहे इस धंधे में बजरी व पत्थर निकालने के लिए 70 से लेकर 100 $फुट तक गहरे गड्ढे बना दिए गए है। बनाडी बांध में भूमी गत जलस्त्रोत तक एलएण्डटी मशीनों से खुदाई की जा रही है, जिससे जल स्तर 1000 फुट से अधिक गहराई पर जा टिका है। इस बांध के लिए अवाप्त की गई भूमी का मुआवजा लेने के बाद भी अवैध बजरी खनन ने छलनी बना दिया।

10 सालों से हाहाकार मचा
लगातार इस धंधे के कारण रसातल में जा रहे जल स्त्रोत के कारण कूनेड, भोनावास, टसकोला, भांकरी, मंढा, राजनौता, कारोली, बडनगर, फतेहपुरा, प्रागपुरा, पावटा सहित करीब 25 ग्राम पंचायतों में पानी के लिए गत 10 सालों से हाहाकार मचा हुआ है। पावटा पंचायत समिति के तहत आने वाली 32 ग्राम पंचायतों में पानी की समस्या विकराल रूप ले ती जा रही है। पानी की कमी के कारण कृषि उत्पादन भी प्रभावित हो रहा है। पानी के जल स्त्रोतों को नष्ट कर लगातार किए जा रहे खनने के कारण क्षेत्र में रेगिस्तान जैसे हालात बनते जा रहे है।

मिली भगत से चल रहा खनन
क्षेत्र में लगातार 3 दशकों से अधिक समय से हो रहे अवैध खनन का एक मात्र कारण ये अवैध खनन बड़े राजनेताओं अधिकारियों व पुलिस की मिली भगत से चल रहा है। जिससे एक दो दिन कार्यवाही करके ढिंढोरा पीटने के बाद बंद कर दिया जाता है। राजनेताओं का प्रभाव इतना गहरा है कि वाटरमैन राजेन्द्रसिंह, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष राव राजेन्द्रसिंह, पूर्व विधायक सुभाषचन्द्र शर्मा जीवन बचाओ आन्दोलन के मुख्य संयोजक नितेन्द्र मानव लोकतांत्रिक जदयु प्रदेशाध्यक्ष रामनिवास यादव सहित क्षेत्र के आम जन कई बार धरना प्रदर्शन करने के बाद भी कोई फर्क नहीं पड़ा व यह अवैध कारोबार अनवरत चलता ही रहा।

खनन माफियाओं की दबंगाई
इस अवैध खनन में बिना कोई सुरक्षा व्यवस्था के रात दिन काम होता है। आए दिन केशर में आने बजरी की खान ढहने आदी से मरने का क्रम जारी रहता है, लेकिन खान माफिया जो एक जाती विशेष के है, इनकी दबंगाई इस कदर है कि तत्काल मृतक के परिवार से सांठगांठ कर मौत को ट्रैक्टर आदी से दुर्घटना का रूप दे देते है। कई अवैध खनन क्षेत्रों में बहार से आए मजदूर काम करते है, इनकी मौत होने पर इनके शव को रातों रात घर भेज देते है। गत दिनों एक खान ढहने से एक मजदूर की मौत हो गई व दूसरा घायल हो गया था। इस घटना को टै्रक्टर ट्राली पलट कर दुर्घटना होने का रूप देकर प्रागपुरा थाने में मुकदमा दर्ज करवा दिया गया।

क्या कहते अधिकारी
इस बारे में सहायक खनिज अभियंता अमीचन्द का कहना है कि पावटा कस्बे से अवैध खनन माफियाओं ने अपने सूचना तन्त्र को मजबूत करने के लिए आदमी बैठा रखे है जो अवैध खनन क्षेत्र की तरफ जाने वाली खान विभाग व पुलिस की गाडी की सूचना पहले की दे देते है, जिससे खननकर्ता मौके से भाग छूटते है। कई बार रात के अधियारे में हमला भी करने की तैयारी में रहते है। अमीचन्द ने बताया कि बुचारा ग्राम में चैक पोस्ट बना देने से इस ग्राम से होकर जाने वाले बेशकीमती पत्थरों के अवैध परिवहन में कमी आई है।