
शिक्षक घर-घर जाकर हाउस होल्ड सर्वे करेंगे।
राजस्थान सरकार ने सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाने और बच्चों को स्कूल से जोड़ने के लिए मुख्यमंत्री शिक्षित राजस्थान अभियान की शुरुआत की है। इस अभियान के तहत डिजिटल प्रवेशोत्सव के माध्यम से शत-प्रतिशत नामांकन और नामांकित बच्चों की निरंतर उपस्थिति पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इस दौरान संबंधित स्कूलों के शिक्षक घर-घर जाकर हाउस होल्ड सर्वे करेंगे। यह सर्वे डिजिटल ऐप के माध्यम से किया जाएगा, जिसमें 3 से 18 वर्ष तक के बच्चों का विवरण लिया जाएगा।
अभियान के चरण और अवधि
पहला चरण: 15 अप्रैल से 16 मई 2025 तक
दूसरा चरण: 1 जुलाई से 18 अगस्त 2025 तक
हाउस होल्ड सर्वे में विशेष ध्यान इन बिंदुओं पर….
-सर्वे का उद्देश्य स्कूल के परिक्षेत्र में आने वाले हर बच्चे को शिक्षा से जोड़ना है। इसमें विशेष रूप से निम्न वर्गों को कवर किया जाएगा। शिक्षक इस दौरान अपने साथ स्कूल की उपलब्धियां जैसे बोर्ड परीक्षा परिणाम, स्कूल की सुविधाएं और पूर्व विद्यार्थियों की सफलताएं दर्शाने वाले पम्फलेट्स लेकर जाएंगे।
-अनामांकित एवं ड्रॉपआउट बच्चे
-प्रवासी श्रमिकों के बच्चे
-बाल-श्रम से मुक्त कराए गए बालक-बालिकाएं
-आंगनबाड़ी से निकले हुए बच्चे
प्रभावी मॉनिटरिंग की व्यवस्था…..
-हर शनिवार: PEEO अपने क्षेत्र के सभी स्कूलों से अनामांकित और ड्रॉपआउट बच्चों की जानकारी लेकर रिपोर्ट तैयार करेंगे।
-CBEO को रिपोर्ट: विद्यालय छोड़ने से पहले यह रिपोर्ट CBEO को भेजी जाएगी।
-हर सोमवार: CBEO से प्राप्त रिपोर्ट का संकलन कर CDEO को भेजा जाएगा।
-CDEO की जिम्मेदारी: सभी रिपोर्ट को एकीकृत कर संयुक्त निदेशक, स्कूल शिक्षा को साप्ताहिक रिपोर्ट भेजनी होगी।
8 मई से प्रवेश महोत्सव….
-8 मई तक नवप्रवेशित विद्यार्थियों के स्वागत के लिए प्रवेश महोत्सव मनाया जाएगा। इसमें: अभिभावकों को स्कूल में आमंत्रित किया जाएगा
-प्रवेश समिति से परिचय करवाया जाएगा
-बच्चों का स्वागत तिलक और माला पहनाकर किया जा सकता है
-इसका उद्देश्य बच्चों में विद्यालय के प्रति सकारात्मक भावना उत्पन्न करना है।
निजी स्कूलों की तुलना में सरकारी स्कूलों की स्थिति
निजी स्कूलों में अप्रेल में ही नामांकन शुरू हो जाता है और पढ़ाई शीघ्र आरंभ हो जाती है। जबकि सरकारी स्कूलों में वार्षिक परीक्षाएं मई तक चलती हैं और नया सत्र जुलाई में आरंभ होता है। यही कारण है कि कुछ अभिभावक निजी स्कूलों की ओर झुकते हैं, जबकि सरकार हर सरकारी स्कूल के छात्र पर हजारों रुपए खर्च करती है और अनेक योजनाएं संचालित करती है।
Published on:
18 Apr 2025 05:24 pm
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