
EWS Certificate: आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) को राहत देने के उद्देश्य से बनाई गई योजनाएं जमीनी स्तर पर उलझनों में घिरती नजर आ रही हैं। ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र की केवल एक वर्ष की वैधता जरूरतमंदों के लिए परेशानी बन गई है।
हर वर्ष प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया दोहरानी पड़ती है, जिससे समय, संसाधन और ऊर्जा का नुकसान हो रहा है। सरकार ने 10 प्रतिशत आरक्षण सहित कई लाभ देने की व्यवस्था की है, लेकिन इनका लाभ लेने के लिए आवश्यक प्रमाण पत्र ही बड़ी चुनौती बन गया है।
तहसील कार्यालयों और संबंधित विभागों के चक्कर, लंबी दस्तावेज प्रक्रिया और समय पर प्रमाण पत्र नहीं मिलना आम समस्या बन चुकी है। इसका सबसे अधिक असर छात्रों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों पर पड़ रहा है।
कई बार आवेदन के समय वैध प्रमाण पत्र होने के बावजूद दस्तावेज सत्यापन तक उसकी अवधि समाप्त हो जाती है, जिससे योग्य अभ्यर्थी अवसर से वंचित रह जाते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और अधिक जटिल है। सीमित संसाधनों और दूर-दराज स्थित सरकारी कार्यालयों के कारण लोगों के लिए बार-बार आना-जाना मुश्किल हो जाता है।
ई-मित्र संचालकों के अनुसार ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र सामान्यतः एक वर्ष के लिए मान्य होता है और कई मामलों में इसकी वैधता 31 मार्च तक सीमित रहती है।
ऐसे में यदि कोई व्यक्ति फरवरी में प्रमाण पत्र बनवाता है तो अप्रेल में नए वित्तीय वर्ष के साथ उसे फिर से बनवाना पड़ता है।
प्रक्रिया में आधार कार्ड, जन आधार कार्ड, मूल निवास प्रमाण पत्र और आय प्रमाण पत्र सहित कई दस्तावेज आवश्यक होते हैं। आय 8 लाख रुपए से कम होने का प्रमाण देने के लिए शपथ पत्र भी देना पड़ता है।
सामान्य वर्ग के कई लोगों के पास जाति संबंधी दस्तावेज नहीं होने से अतिरिक्त सत्यापन प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। महिलाओं के लिए यह प्रक्रिया और अधिक जटिल हो जाती है।
विवाह के बाद उन्हें पीहर और ससुराल दोनों पक्षों के दस्तावेज प्रस्तुत करने पड़ते हैं, जिससे प्रक्रिया लंबी हो जाती है। विभिन्न स्तरों पर सत्यापन और अधिकारियों के हस्ताक्षर में लगने वाला समय भी देरी का कारण बनता है।
कोटखावदा के ई-मित्र संचालक मीठालाल सैनी का कहना है कि प्रमाण पत्र की वैधता दो से तीन वर्ष की जानी चाहिए और ऑटो रिन्यूअल की व्यवस्था लागू होनी चाहिए, ताकि लोगों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ें।
वहीं जयपुर टैक्स बार एसोसिएशन अध्यक्ष एडवोकेट रामबाबू विजयवर्गीय ने भी वैधता बढ़ाने, डिजिटल डेटा साझा करने और सिंगल विंडो सिस्टम लागू करने की आवश्यकता बताई है।
Published on:
28 Apr 2026 05:28 pm
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