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रोक कहां ! यहां लगे बजरी के ढेर, बजरी पर रोक का मखौल

चाकसू व कानोता क्षेत्र में निर्माण कार्यों में हो रहा बजरी का उपयोग

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रोक कहां ! यहां लगे बजरी के ढेर, बजरी पर रोक का मखौल

बजरी खनन पर सुप्रीम कोर्ट की रोक है। इसलिए चोरी-छुपे बजरी ले जाते ट्रकों पर कार्रवाई की जा रही है। वाहनों के चालान कट रहे है, मालिकों पर मामले दर्ज हो रहे है। इसके बावजूद दिन-दहाड़े सरकारी और निजी निर्माण कार्यों में धड़ल्ले से बजरी का उपयोग हो रहा है। बस्सी, कानोता व चाकसू क्षेत्र में ऐसे कई घरेलू और व्यावसायिक निर्माण कार्य नजर आ रहे है जिनके आगे बजरी के ढेर लगे हुए हैं। इतनी मात्रा में बजरी कहां से आ रही है पुलिस तक को पता नहीं लग रहा है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की बजरी पर रोक का मखौल सा उड़ रहा है।

बजरी का खुले आम उपयोग
चाकसू (जयपुर)। सुप्रीम कोर्ट ने एक ओर बजरी खनन पर रोक लगा रखी है और इसकी पालना के लिए जिम्मेदार भी लगा रखे है। लेकिन जिम्मेदारों की अनदेखी से बजरी का खुले आम उपयोग हो रहा है। मजेदार बात यह है कि निजी कार्यों के साथ सरकारी निर्माण कार्यों में भी उपयोग ली जा रही है। कस्बे में नगरपालिका के विकास कार्य और क्षेत्र में सरकारी सहित निजी कार्यों में बजरी का उपयोग आसानी से हो रहा है। वहीं कई जगह बजरी की मारामारी से निर्माण कार्य रुके हुए हैं। यहां खुले आम बजरी से भरे वाहन रात को आते हैं और खाली करके चले जाते हैं। कई लोगों का सवाल है कि रोक के बावजूद ये बजरी कैसे और कहां से आ रही है।

गुणवत्ता पर उठ रहे सवाल
चाकसू नगरपालिका के निर्माण कार्यों में बजरी के उपयोग पर चर्चा हो रही है। जानकारों का कहना है कि बजरी की मांग को देखते हुए बजरी माफिया बजरी में रेत मिलाकर बेच रहे हैं। यही मिलावटी बजरी निर्माण कार्यों में ली जा रही है। इससे निर्माणाधीन कार्यों की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि बिना गुणवत्ता के कार्य होने से राजकीय कोष को चपत लग रही है। जबकि राजकीय बालिका उच्च प्राथमिक विद्यालय, एलबीएस कॉलोनी और राजकीय सैटेलाइट अस्पताल के पास बजरी के ढेर लगे है।

इनका कहना है
मुझे जानकारी नहीं है। तकनीकी अधिकारियों को कहकर दिखवाती हूं।
महिमा डांगी, अधिशाषी अधिकारी, नगरपालिका चाकसू

चाकसू क्षेत्र में बजरी आने की मुझे जानकारी नहीं है, आप कह रहे है तो पता करवाते है कि बजरी कहां से और कैसे आई।
रडमल सिंह, एसीपी चाकसू

हाइवे से लगती कॉलोनियों में देखे कौन
बस्सी (जयपुर)। हो सकता है पुलिस और प्रशासन को अंदर की कॉलोनी और मोहल्लों में बन रहे भवनों में बजरी का उपयोग नजर ना आए लेकिन यहां तो हाइवे से लगते प्रमुख मार्गों पर निर्माणाधीन भवनों के आगे बजरी के ढेर लगे हैं। प्रेमनगर पुलिया से लेकर 52 फीट हनुमान मंदिर तक कई ऐसी कॉलोनियां है जहां निर्माण कार्यों में बेधड़क बजरी काम में ली जा रही है। इसी रोड पर कई निर्माणाधीन मकानों के आगे बजरी के ढेर लगे हुए है। यहां कई निर्माण शुरू होने से पहले ही बजरी पहुंच चुकी है।

बात उपयोग से ज्यादा, परिवहन की
बात सिर्फ इतनी ही नहीं है कि इन निर्माणों में बजरी का उपयोग हो रहा है। और यहां ढेर के ढेर लगे हैं। सवाल ये है कि ये बजरी आई कहां से। खनन पर रोक, परिवहन पर रोक, स्टॉक भी खत्म, तो फिर यहां बजरी कहां से लाई गई। इस बारे में प्रशासन और पुलिस कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे पा रहे है कि इतनी मात्रा में बजरी कहां से लाई जा रही है।

संबंधित थानाधिकारियों और स्टाफ को बजरी परिवहन रोकने के लिए निर्देश दिए हुए हैं। क्षेत्र में आने-जाने वाले हर बड़े लोडिंग वाहन पर नजर रखी जा रही है। हाइवे से लगते निजी निर्माण कार्यों में बजरी के उपयोग और स्टॉक की जानकारी लेनी पड़ेगी। निर्माणाधीन भवनों के मालिकों से बजरी के उपयोग और खरीद की रिपोर्ट ली जाएगी।
मनस्वी चौधरी, सहायक पुलिस आयुक्त, बस्सी