
बहड़ौदा राउमावि में दो कक्षा के पांच विद्यार्थियों को पढ़ा रहे शिक्षक।
सरकार शिक्षा का अधिकार और सर्व शिक्षा अभियान सहित विभिन्न महत्वकांशी योजनाओं के माध्यम से शिक्षा को बढ़ावा देने की दम भर रही है। गांव-ढाणियों में जगह-जगह उच्च प्राथमिक स्तर के सरकारी विद्यालय भी खोल दिए, लेकिन विभागीय अनदेखी से राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों में नामांकन बढ़ाने की कवायद विपरित दिखाई दे रही है। इसकी बानगी ग्राम बहड़ौदा स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में देखने को मिल रहा है। यहां राजकीय प्राथमिक विद्यालय 1993 से संचालित है। बाद में वर्ष 2014 में राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में क्रमोन्नत किया गया। वर्तमान में विद्यालय में पहली से आठवी कक्षा तक मात्र 41 का नामांकन है। जबकि विद्यालय में 7 प्रधानाध्यापक सहित 7 अध्यापक कार्यरत है।
विराटनगर ब्लॉक का हाल
आश्चर्य की बात तो यह है कि 8वीं तक के सरकारी स्कूल में एक बच्चे की पढ़ाई का खर्चा एक लाख रुपए से भी अधिक आ रहा है। यहां विद्यालय में मात्र 41 छात्रों को पढ़ाने के लिए सरकार 42 लाख से अधिक का सालाना खर्च कर रही है। इस विद्यालय में 41 के नामांकन पर लगे 7 अध्यापकों को करीब 3 लाख 50 रुपए मासिक वेतन दिया जा रहा है। इसके अलावा स्टेशनरी, पोषाहार बिजली व पानी सहित अन्य खर्च अलग है। विराटनगर ब्लॉक क्षेत्र में ऐसा यह एकमात्र स्कूल नहीं है, बल्कि और ऐसे कई स्कूल हैं। कहीं 32 विद्यार्थी और 6 शिक्षक है तो किसी विद्यालय में 49 के नामांकन पर 9 अध्यापक हैं। इतना ही नहीं विद्यालयों में अध्यापकों की संया पूरी होने के बाद भी सरकारी विद्यालयों में नामांकन बढ़ाने के दावे खोखले साबित हो रहे है। सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों का टोटा व अध्यापकों की संख्या ज्यादा है।
धुलकोट राउप्रावि में पहली कक्षा का नामांकन शून्य
विराटनगर सीबीईओ कार्यालय के अधीन क्षेत्र में जालपाला के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में वर्तमान में 32 विद्यार्थियों के नामांकन पर प्रधानाध्यापक सहित 6 शिक्षक है। हनुमान नगर राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में 49 विद्यार्थियों के नामांकन पर प्रधानाध्यापक, शारीरिक शिक्षक सहित 9 अध्यापक हैं। धुलकोट के राउप्रावि में 25 का नामांकन है व चार शिक्षक कार्यरत है। जबकि पहली कक्षा में नामांकन शून्य है। घुलकोट राउप्रावि के कार्यवाहक प्रधानाध्यापक आन्दीलाल स्वामी का कहना है कि खस्ताहाल भवन सहित अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी से अभिभावकों का मोहभंग होने से नामांकन नहीं बढ़ पा रहा है।
पहली कक्षा में जुड़ा एक-एक विद्यार्थी
इस बार सरकारी विद्यालयों के अध्यापकों का नामांकन का लक्ष्य दिया था, लेकिन क्षेत्र में अधिकांश राउप्रावि में यह पूरा नहीं हो पाया। कई विद्यालय तो ऐसे हैं, जहां एक भी नया विद्यार्थी नहीं आया। यहां बहड़ौदा राउप्रावि में पहली कक्षा में एक और जालपाला राउप्रावि में भी एक विद्यार्थी नया जुड़ा है।
साल दर साल घट रहा नामांकन
यहां बहड़ौदा संचालित राउप्रावि में पहली कक्षा में एक विद्यार्थी, दूसरी में 2, तीसरी में 9, चौथी में 5, पांचवी में 6, छठी में 4, सातवीं में 6 व आठवी में 4 विद्यार्थी पढ़ रहे है।
अभिभावकों की बदली सोच
प्रधानाध्यापक धर्मपाल रूडला ने बताया कि विद्यालय में विद्यार्थियों का नामाकन कम है। नामांकन के लिए अभिभावको से घर पर संपर्क करते है। कई निजी स्कूल खुलने से अभिभावकों की सोच बदल गई। इससे वे बच्चों को सरकारी स्कूल में भेजने में रुचि नहीं लेते है और बालकों को निजी स्कूलों में प्रवेश दिला रहे है। इससे काफी प्रयास के बाद भी विद्यालय में नामांकन में उत्साहवर्धक बढ़ोतरी नहीं हो पाई।
इनका कहना है…
अबकि बार पहली कक्षा में प्रवेश के लिए आयु सीमा 6 साल करने से नामांकन नहीं बढ़ पाया है। संबंधित स्कूलों के संबंध में जानकारी लेकर नामांकन बढ़ाने के लिए निर्देशित किया जाएगा।
शंकरलाल मीणा, सीबीईओ, विराटनगर
Published on:
14 Jul 2024 04:39 pm
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