
लॉकडाउन: फूलों की महक हुई कम, किसानों की आमदनी का निकला दम
शाहपुरा/जैतपुर खींची. इस साल अच्छी फसल होने पर बेटी के पीले हाथ करने, कर्ज लिए रुपए चुकाने और सिर ढकने के लिए छत का निर्माण करना था, लेकिन लॉकडाउन ने संजोए तमाम अरमानों पर पानी फेर दिया है। यह पीड़ा एक किसान की ही नहीं। बल्कि आमेर, चौमूं, शाहपुरा सहित कई कस्बों के दर्जनों किसानों की है।
लॉकडाउन ने फूलों की खेती करने वाले किसानों की कमर तोड़ कर रख दी है। मांग न होने से हर रोज लाखों रुपए का फूल खेतों में ही सड़कर बर्बाद होता जा रहा है। इस साल अच्छी फसल होने पर किसानों ने तमाम अरमान संजोए थे, मगर लॉक डाउन ने सब पर पानी फेर दिया। घाटे से बचने के लिए कुछ किसानों ने तो फूलों की खड़ी खेती पर ही ट्रैक्टर चलवा दिया है। वर्तमान में मंदिर, मस्जिद समेत अन्य धार्मिक स्थल बंद है। शादी ब्याह के साथ सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रामों पर भी पूरी तरह से रोक लगी हुई है। कार्यक्रम स्थगित होने का सीधा असर फूलों की खेती पर पड़ा है। मांग न होने से सजावट में इस्तेमाल होने वाले यह फूल खेतों में ही सड़ कर बर्बाद हो रहे है। इससे किसानों को हर रोज लाखों रुपए का घाटा हो रहा है। आलम यह है कि पहले से तय किए गए आर्डर भी रद्द हो गए हैं। फूलों की खेती से जुड़े लोगों की माने तो मार्च-अप्रेल का माह व्यापार के लिए अच्छा रहता है। किसान पूरा साल इस सीजन के इंतजार में रहते हैं। शादी व अन्य मांगलिक कार्यों के लिए पहले से ऑर्डर बुक किए जाते हैं। मगर इस साल लगे लॉकडाउन की वजह से सारे ऑर्डर भी रद्द हो गए है।
बड़े पैमाने पर होती है फूलों की खेती
अचरोल परिक्षेत्र के छापराडी, सीतापुरा, सींगवाना, कचरावाला, जैतपुर खींची के अलावा चौमूं, बिहारीपुरा के विभिन्न गांवों में गेंदा फूल की खेती बड़े पैमाने पर होती है। कई दर्जनभर गांवों में किसान बड़े पैमाने पर फूलों की खेती से जुड़े हुए हैं। यहां से किसान हरियाणा, दिल्ली समेत आसपास के प्रदेशों व जिलों में भी फूल सप्लाई करते हैं।
चौमूं के समीप बिहारीपुरा निवासी किसान कालूराम गरेड ने बताया कि उसने पांच बीघा खेत में गेंदा फूल की फसल तैयार की थी। फसल तैयार करने में करीब ८० हजार रुपए से अधिक खर्च कर दिए। जबकि आमदनी एक पैसे की भी नहीं है। ब्याज में रुपए लेकर महंगी दर बीज खरीदा था, लेकिन अब ब्याज के रुपए चुकाना भी मुश्किल हो गया है। यहीं पीड़ा है अन्य कई दर्जनों किसानों की।
फैक्ट फाइल
80 बीघा में फूलों की खेती आमेर, चौमूं व शाहपुरा परिक्षेत्र में
1 क्विंटल से अधिक उत्पादन प्रतिदिन एक बीघा में
10 हजार रुपए का खर्चा एक बीघा में
Published on:
13 Apr 2020 12:12 am
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