
राज्य सरकार की ओर से विधानसभा में पेश किए गए अंतिम बजट को किसानों ने लोक लुभावना बजट बताया। क्षेत्र के अधिकांश किसान सरकार के इस बजट से संतुष्ट नहीं है। कई किसानों ने बजट को विकासोन्मुखी बताया, तो अधिकांश ने इसे चुनावी बजट बताया है।

किसानों ने कहा कि अंतिम बजट होने से किसानों को काफी उम्मीदें थी, जो धराशायी हो गई। शाहपुरा के धानोता निवासी किसान मुरलीधर दुसाद, बलराम पलसानिया, सुगनचंद समेत कई किसानों ने बजट को निराशाजनक बताते हुए कहा कि सरकार ने सिर्फ लोकलुभावनी घोषणाएं की है।

सरकार ने लघु व सीमांत किसानों के 50 हजार रुपए तक के कर्ज माफी की घोषणा की है, ये सिर्फ कॉपरेटिव सोसायटी से लिए गए ऋण के संबंध में है। इससे किसानों को कोई बड़ा फायदा नहीं होगा।

प्रदेश का किसान कर्ज में डूबता जा रहा है। किसानों का तो पूरा कर्ज ही माफ कर दें तो भी कोई बड़ी बात नहीं है। सरकार बड़े-बड़े व्यापारियों को सरकार ने फायदा दिया है, उसके मुकाबले किसानों के लिए कुछ नहीं किया है।

किसान इस बजट से बिलकुल संतुष्ट नहीं है। विराटनगर क्षेत्र के हनुमान नगर निवासी किसान रामस्वरुप स्वामी ने भी बजट को लोकलुभावना व किसानों के लिए निराशाजनक बताया।

उन्होंने कहा कि बजट में किसानों के लिए कुछ नया नहीं है। किसान आर्थिक तंगी से जूझ रहा है। इधर, राडावास के किसान कैलाश जाट व आंतेला के पास रामनगर निवासी किसान शेरसिंह पलसानिया ने कर्ज माफी को किसानों के लिए अच्छा कदम बताया।

किसानों ने कहा कि समर्थन मूल्य पर फसलों की खरीद,फसलों के रखरखाव के लिए गोदाम, दो लाख कनेक्शन की घोषणा ठीक है।