
दिव्यांग रीनू यादव की फोटो: पत्रिका
जयपुर-फलौदी मेगा हाईवे स्थित बस्सी-नागा चौलाई की ढाणी में भगवान शालिग्रामजी महाराज के विवाह महोत्सव को लेकर ग्रामीणों में उत्साह का माहौल है। इस अनूठे धार्मिक आयोजन में बस्सी-नागा चौलाई की ढाणी निवासी दिव्यांग रीनू यादव भगवान शालिग्रामजी महाराज के साथ प्रतीकात्मक फेरे लेंगी। विवाह के बाद रीनू जीवनभर ठाकुरजी महाराज को अपना पति परमेश्वर मानकर उनकी आराधना करेंगी।
भगवान के प्रति आस्था और समर्पण से जुड़े इस अनूठे विवाह समारोह को लेकर क्षेत्र में खासा उत्साह है। विवाह महोत्सव के तहत मंगलवार को लग्न टीका कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं ग्रामीण शामिल हुए। बुधवार को विवाह समारोह की शुरुआत सुबह 10 बजे मंगल स्नान के साथ होगी। इसके बाद सुबह 10.15 बजे वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा-अर्चना की जाएगी। आयोजन स्थल पर दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं।
विवाह समारोह के तहत बुधवार सुबह 11.15 बजे श्री मुरलीमनोहरजी मंदिर बस्सी-नागा से भगवान शालिग्रामजी महाराज की बारात निकलेगी। बारात विभिन्न मार्गों से होते हुए रामस्वरूप धोलीवाल के यहां चौलाई की ढाणी पहुंचेगी। यहां धार्मिक रीति-रिवाज एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पंडित अमित गौड़ द्वारा रीनू यादव का भगवान शालिग्रामजी महाराज के साथ प्रतीकात्मक विवाह संपन्न कराया जाएगा। विवाह समारोह में रीनू यादव के नाना रामस्वरूप धोलीवाल कन्यादान की रस्म निभाएंगे। बारात में पारंपरिक बैंड-बाजे, भजन-कीर्तन और धार्मिक झांकियां भी आकर्षण का केंद्र रहेंगी। ग्रामीणों और श्रद्धालुओं द्वारा बारात का जगह-जगह पुष्पवर्षा और स्वागत किया जाएगा। विवाह की सभी रस्में हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न होंगी, जिससे यह आयोजन किसी सामान्य विवाह की तरह ही भव्य स्वरूप में नजर आएगा।
भगवान शालिग्रामजी महाराज के साथ रीनू यादव के प्रतीकात्मक विवाह को लेकर बस्सी-नागा सहित आसपास के क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। भगवान को पति परमेश्वर मानकर जीवनभर उनकी आराधना करने का यह निर्णय क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। इससे पहले जोबनेर में भी इसी प्रकार का धार्मिक विवाह समारोह आयोजित हुआ था जो काफी चर्चित रहा था। ग्रामीणों का मानना है कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में भक्ति, संस्कार और आध्यात्मिक मूल्यों को मजबूत करते हैं। विवाह समारोह में आसपास के कई गांवों के लोग भी शामिल होंगे।
Updated on:
22 Jul 2026 02:48 pm
Published on:
22 Jul 2026 02:48 pm
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