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Jaipur Crime: 1100 साल पुरानी मूर्ति चुराई, खजाने के लालच में खेत में ले जाकर खंड़ित की, 14 दिन बाद हुआ खुलासा

Jaipur Crime: सोशल मीडिया पर प्राचीन मूर्तियों की कीमत और उनमें छिपे बहुमूल्य रत्नों की जानकारी तलाशने के बाद आरोपित ने मंदिर से 1100 मूर्ति चुराकर उसे खंडित कर दिया।

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1100 Year Old Idol Theft

चोरी हुई प्रतिमा. Photo- Patrika

भानपुर कलां/जमवारामढ़। आधुनिक और आरामदायक जीवनशैली की दौड़ में कुछ युवा गलत रास्तों पर भटक रहे हैं। राजस्थान के जयपुर जिले के साईवाड़ गांव में 1100 वर्ष पुरानी ठाकुरजी भगवान श्रीलक्ष्मीनारायणजी की प्राचीन मूर्ति चोरी की वारदात ने इसी चिंताजनक प्रवृत्ति को उजागर किया है। सोशल मीडिया पर प्राचीन मूर्तियों की कीमत और उनमें छिपे बहुमूल्य रत्नों की जानकारी तलाशने के बाद आरोपित ने मंदिर से मूर्ति चुराकर उसे खंडित कर दिया।

पुलिस उपायुक्त जयपुर उत्तर कर्ण शर्मा ने बताया कि 4 जून की रात साईवाड़ गांव स्थित प्राचीन ठाकुर लक्ष्मीनारायण मंदिर से अष्टधातु निर्मित करीब दो फीट ऊंची भगवान लक्ष्मीनारायण की मूर्ति चोरी हो गई थी। मूर्ति में भगवान शेषनाग पर विराजमान स्वरूप में स्थापित थे। घटना के बाद क्षेत्र में आक्रोश फैल गया था और ग्रामीण धरने पर बैठ गए थे।

मामले की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त नीरज पाठक, सहायक पुलिस आयुक्त सुरेंद्र सिंह राणावत तथा थानाधिकारी डॉ.गौतम डोटासरा के निर्देशन में विशेष टीम का गठन किया गया। एसआइटी और पुलिस टीम ने लगातार जांच कर शुक्रवार को वारदात का खुलासा कर दिया। पुलिस ने साईवाड़ निवासी गणेश शर्मा (18) को गिरफ्तार कर एक बाल अपचारी को निरुद्ध किया है। दोनों से पूछताछ की जा रही है।

14 दिन की मेहनत के बाद खुली गुत्थी

पुलिस टीम ने गांव और आसपास के क्षेत्रों में लगे करीब 500 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। साथ ही लगभग 1000 मोबाइल नंबरों की बीटीएस और सीडीआर की जांच की गई। मुखबिर तंत्र को सक्रिय कर तकनीकी एवं परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर संदिग्धों तक पहुंच बनाई गई। लगातार 14 दिन तक चली जांच के बाद पुलिस को सफलता मिली।

खजाने के लालच में खंड़ित की प्रतिमा

पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपित पिछले पांच-छह माह से सोशल मीडिया पर प्राचीन मूर्तियों की कीमत और उनके अंदर छिपे बहुमूल्य रत्नों संबंधी जानकारी खोज रहा था। उसे भ्रम था कि प्राचीन मूर्ति के भीतर नीलम या अन्य कीमती वस्तुएं हो सकती हैं। वारदात वाली रात गांव में बिजली बंद होने का फायदा उठाकर वह मूर्ति चोरी कर ले गया और गांव के बाहर अपने ज्वार के खेत में ले जाकर उसे खंड़ित कर दिया। जब कोई कीमती वस्तु नहीं मिली तो खंडित मूर्ति को मिट्टी में दबा दिया।

धरने में बैठकर रखता रहा नजर

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपित खुद को संदेह से दूर रखने के लिए ग्रामीणों के धरना-प्रदर्शन में शामिल होता रहा। वह पुलिस की गतिविधियों, जांच की दिशा और कार्रवाई की जानकारी जुटाता रहा। पुलिस के अनुसार आरोपित धरने में मौजूद रहकर हर गतिविधि पर नजर रख रहा था, ताकि किसी को उस पर संदेह न हो।

खेत से बरामद की खंड़ित प्रतिमा

पुलिस टीम ने आरोपित की निशानदेही पर उसके ज्वार के खेत में खुदाई करवाई। वहां से मूर्ति के खंडित अवशेष बरामद किए गए। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि आरोपित का संबंध किसी मूर्ति तस्कर गिरोह या प्राचीन धरोहरों की अवैध खरीद-फरोख्त करने वाले नेटवर्क से तो नहीं है।

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पुलिस का शक सही निकला

जांच के दौरान पुलिस को शुरू से ही आशंका थी कि वारदात में किसी स्थानीय व्यक्ति की भूमिका हो सकती है। इसी आधार पर जांच को आगे बढ़ाया गया और आखिरकार आरोपित गांव का ही निकला। पुलिस का मानना था कि स्थानीय सहयोग के बिना इतनी बड़ी चोरी को अंजाम देना आसान नहीं था।

इनका कहना है

पुलिस ने मूर्ति चोरी के मुख्य आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है तथा सहयोगी बाल अपचारी को निरुद्ध किया गया है। आरोपितों के किसी तस्करी नेटवर्क से संबंधों की भी जांच की जा रही है।

  • कर्ण शर्मा, पुलिस उपायुक्त, जयपुर शहर उत्तर