
मंदिर में प्राकृतिक रूप से एक फीट से भी छोटा कुंड है। जिसमें चांदी की गर्दन लगाकर माता का शीश स्थापित है,जिसकी पूजा होती है।
कोटपूतली बहरोड़ जिले के पावटा तहसील से पांच किलोमीटर दूर भौनावास स्थित बागौरी की ढाणी में 2200 फीट की ऊंचाई में पहाड़ी पर विराजमान बागौरी माता का मंदिर जनमानस की आस्था का केंद्र है। ढाणी बागौरी स्थित मंदिरों में से बागौरी माता मंदिर में नवरात्र पर श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है। यहां नवरात्र के 9 दिन तक विशेष कार्यक्रमों का आयोजन होता है। मंदिर तक 600 सीढ़ियां बनी हुई है और रास्ते में 42 घुमाव है। मंदिर में स्थापित मूर्ति को दुर्गा माता का स्वरूप मानकर पूजा की जाती है। बुजुर्गों ने बताया कि टसकौला, भौनावास, खेलना सहित आसपास के क्षेत्र में जब भी कोई सेना में भर्ती होता है या ड्यूटी पूर्ण होती है तो घरों में माता का डंका जरुर लगवाते है।
11 अक्टूबर को है मेला
मेला कमेटी अध्यक्ष सतपाल सिंह शेखावत ने बताया कि प्रतिवर्ष नवरात्रा की अष्ठमी को मेला लगता है। इस बार 11 अक्टूबर को मेला आयोजित होगा। मेले में कुश्ती दंगल भी आयोजित होगा। राजस्थान सहित यूपी, बिहार, महाराष्ट्र, हरियाणा, मध्यप्रदेश, उड़ीसा सहित कई जगह से आए श्रद्धालु यहां नवरात्र में माता की पूजा करते हैं।
एक फीट से भी छोटा है कुंड
सामाजिक कार्यकर्ता महिपाल सिंह शेखावत ने बताया कि पहाड़ी में मंदिर तक जाने के लिए आधे रास्ते में पत्थरों का खरंजा बना हुआ है, जिस पर आसानी से वाहन आ जा सकते है। वहीं मंदिर तक 600 सीढ़ियां बनी हुई है। मंदिर तक जाने वाले रास्ते में 42 घुमाव है। मंदिर में प्राकृतिक रूप से एक फीट से भी छोटा कुंड है। जिसमें चांदी की गर्दन लगाकर माता का शीश स्थापित है,जिसकी पूजा होती है।
माता के शीश की हो रही पूजा
मेला कमेटी सदस्य, लीलाराम मीणा, संतोष खजोतिया, हंसराज सिंह, कृष्ण कुमावत, तेजपाल सिंह, भीमसिंह, बनवारी शर्मा, कैलाश यादव, सत्यवीर योगी, प्रदीप डीलर ने बताया कि ऐसी किवदंती है कि क्षेत्र में चोरी और डकैती की घटनाओं से पूर्व माता भक्तों को आगाह कर देती थी। जिससे परेशान होकर चोर व डकैतों ने माता की मूर्ति का शीश धड़ से अलग कर दिया। तब से मां के शीश की ही पूजा हो रही है।
Published on:
06 Oct 2024 10:22 pm
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