
राजस्थान में महत्वपूर्ण है वामनदेव मंदिर, मुगल बादशाह ने बनवाया था
मनोहरपुर। कस्बे के वामनदेव मोहल्ले में स्थित वामन देव मंदिर का राजस्थान के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान एवं महत्व है। इस मंदिर का निर्माण उत्तरी भारत की नागर शैली में हुआ है। यहां कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी (देव उठनी एकादशी) को वामन दीपावली मनाई जाती है।
इस मौके पर कस्बे सहित मंदिर परिसर में दीपावली की तरह रोशनी से जगमग किया जाता है। महिलाएं पूजा-अर्चना कर अपने- अपने घरों मेंं देवों को उठाती है। इसके बाद समूह में गीत गाती वामन देव मंंंदिर जाती है। जहां पर वामन भगवान की विधिवत पूजा-अर्चना कर मंदिर प्रांगण के चारों और परिक्रमा करती है। मंदिर परिसर में वामन भगवान के ढोक लगा परिवार की सुख समृद्धि की कामना करती है।
रोशनी से जगमगता मंदिर
सरपंच सुनिता श्याम सुंदर प्रजापत ने बताया कि वामन दीपावली पर मंदिर में विशेष रूप से सजावट की जाएगी। कस्बे के लोग घरों पर फिर से रोशनी कर दीप जलाते हैं। आसपास के गांवों के लोग इस मंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं। ग्रामीण हरिद्वारीलाल जिंदल बताते है कि मंदिर में श्रद्वालुओं की मनोकामनाएं मूर्तियों के दर्शन मात्र से पूर्ण होती है। भक्तों ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराकर शीशे की नक्काशी आदि कार्य कराया है।
मंदिर का इतिहास
रघुवीर पुजारी ने बताया कि मंदिर का निर्माण करीब 450 वर्ष पुर्व मुगल शासक अकबर ने करवाया था। मंदिर नीले पत्थरों से बना हुआ है। औरगंजेब के समय मूर्तियों को खंडित करने के बाद कुछ हिस्सा जीर्ण-शीर्ण हो गया था। जिसे पेंशनर समाज के दिवंगत अध्यक्ष सत्यनारायण पारीक ने जन सहयोग से दुरुस्त कराया था। हाल ही में भामाशाह हरिद्वारीलाल जिंदल की द्वारा जीर्णोद्धार कराया।
Published on:
24 Nov 2020 11:46 pm
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