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योगी सरकार में इस गोशाला के आए बुरे दिन, नहीं मिल रहा धन, सपा सरकार देती थी अनुदान

बस्ती जिले के हरैया के कठारजंगल गांव की वृहद गौशाला योगी राज में हुई बदहाल।

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Goshala

गोशाला

सतीश श्रीवास्तव
बस्ती. सूबे में जब से योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने हैं, जगह-जगह गौशालाएं खोलने, गौ उत्पादों को बढ़ावा देने आदि का काम तेजी से किया जा रहा है। पर सीएम योगी के गढ़ और उनके पूर्व संसदीय क्षेत्र गोरखपुर के नजदीक ही बस्ती जिले की एक गौशाला योगीराज में बदहाल है। यहां पशुओं के चारे के संकट का सामना करना पड़ रहा है तो कर्मचारियों को वेतन कि किल्लत है। यहां के कर्ता-धर्ता की मानें तो योगी सरकार बनने के बाद उन्हें कोई धन नहीं मिला, जबकि पूर्व की अखिलेश सरकार में बाकायदा अनुदान मिलता था, जिससे गौशाला चल जाती थी।


यह वृहद गौशाला बस्ती जिले के हरैया के कठारजंगल गांव में स्थित है। इसकी स्थापना 1905 में हुई थी। सन् 2000 में तत्कालीन राज्यपाल ने भवन निर्माण के लिये 17 लाख रुपये का अनुदान दिया था, जिससे भवन निर्माण कराकर जानवरों के रहने की व्यवस्था बनाई गई। यहां 400 से अधिक जानवरों के रहने की व्यवस्था है। उनकी देखभाल के लिये कई कर्मचारी भी रखे गए हैं। छुट्टा घूम रही गायों को पकड़कर यहां रखा जाता है उनका इलाज भी किया जाता है।


योगी सरकार बनने के बाद बड़े-बड़ दावे और वादे किये गए थे। सूबे में गोकशी के खिलाफ सख्ती अपनायी गयी, इसका असर भी देखने को मिला। पर उसके बाद गायों के पालन की समस्या सामने आयी तो पूरे प्रदेश में गोशालाएं बनवाने के साथ गो उत्पादों की ब्रांडिंग जैसी बातें कही गयीं। पर ये सब शायद वादे ही हैं, क्योंकि बस्ती जिले के कठारजंगल की गौशाला का जो हाल है वह ठीक नहीं। यहां के प्रबंधक की मानें तो योगी सरकार में उन्हें कोई अनुदान नहीं मिल रहा। इसके चलते गोशाला के सामने पशुओं के चारे, उनके इलाज व कर्मचारिायें के वेतन का संकट पैदा हो गया है। हालांकि पिछली अखिलेश सरकार में बाकायदा इसके लिये अनुदान मिलता था।


प्रबंधक का कहना है कि यहां जानवरों के रहने की जगह तो है पर उनकी देखरेख की समस्या उठ खड़ी हो गई है। ऐसी स्थिति में गोशाला गायों की देखभाल और रक्षा कैसे करे यह बड़ा सवाल है। उन्होंने कहा कि स्थानीय विधायक भी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे।