
जिले के जिला चिकित्सालय में अंधेरे का साम्राज्य
बस्ती. जिले के जिला चिकित्सालय में अंधेरे का साम्राज्य हो गया है। डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टॉफ इतना दक्ष है कि अंधेरे में भी घंटों काम कर ले रहे हैं। यकीन न हो तो हम दिखाते हैं कि जिला चिकित्सालय में कुछ ऐसा ही हो रहा है। बिजली चली जाने के बाद जेनरेटर सिर्फ कागजों मे चलाया जाता है जिसका खामियाजा मरीजो को झेलना पड़ता है।
महिला अस्पताल में एक दिन पहले डाक्टरों की लापरवाही से प्रसूता किरन की मौत पर दो डॉक्टर सहित तीन के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई। उसी समय इसी महिला अस्पताल के गेट पर आटो में डिलीवरी भी हो गई और अब अंधेरे में प्रसव कराने की कोशिश व मरीजो का इलाज हो रहा है। इस लाइलाज बीमारी का इलाज कौन करेगा, वह भी ऐसे समय जब प्रदेश की निगाहें बगल के गोरखपुर मेडिकल कॉलेज पर जमीं हैं।
साथ ही प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री जिले के प्रभारी मंत्री भी हैं। फिर भी लखनऊ में बैठे अफसर सुधार के लिए आदेश पर आदेश किये जा रहे हैं। जिला अस्पताल लगभग मे दो घंटे तक अंधेरे में रहने के मामले मे जिला चिकित्सालय के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक इसे तकनीकी कमी बताते हैं।जल्दी ठीक हो जाने की उम्मीद करते हैं, लेकिन उन मरीजों की पीड़ा क्या रही होगी जो दो घंटे से तकलीफ से जूझ रहे थे।
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देवरिया जिला अस्पताल का प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री सूर्यप्रताप शाही ने औचक निरीक्षण किया । मंत्री के अचानक दौरे से घबराए अस्पताल प्रशासन ने उन्हें बिना मास्क पहनाए ही गंभीर चिकित्सा वार्ड में घुमा दिया। लेकिन कुछ देर बाद ही इस गलती का एहसास होने पर दोनो मंत्रियों को मास्क आदि पहनने को दिया गया। दौरे के दौरान उन्हें सब कुछ ठीक दिखा लेकिन निकलते निकलते घंटों से एम्बुलेन्स के लिए परेशान एक मरीज की उनसे मुलाकात हो ही गयी। मरीज को तब एंबुलेंस मिल पायी जब मंत्री ने खुद फटकार लगाई।
Published on:
15 Aug 2017 04:35 pm
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