
बस्ती. एक जमाना था, जब बस्ती में बाहुबली नेता राजकिशोर सिंह की धाक थी, राजकिशोर सिंह का काफिला आते ही सैकड़ों लोगों की भीड़ सड़कों पर जमा हो जाती थी। समाजवादी पार्टी से तीन तीन बार मंत्री रहने वाले और पूर्वांचल में राजनीति के माहिर खिलाड़ी रहे राजकिशोर सिंह कभी सपा मुखिया मुलायम सिंह के मुंहलगे भी हुआ करते थे, मगर आज यह बाहुबली नेता गुमनामी की तरफ बढ़ता जा रहा है। राजकिशोर सिंह अब यूपी की राजनीति में हाशिये पर चल गये हैं।
बस्ती जिले में सपा को लोग राजकिशोर सिंह के नाम से जानते थे, लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा को जब राजकिशोर ने अलविदा कहा तो उसके बाद से ही समाजवादी पार्टी भी जिले में दम तोड़ गयी। आज पार्टी के नाम पर केवल चंद कार्यकर्ता बचे है, जो अब पार्टी का नही अपना अस्तितव बचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं।
अखिलेश यादव की वजह से पार्टी छोड़ी
सपा के वर्तमान अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश ने राजकिशोर सिंह को अर्श से फर्श पर लाकर छोड़ दिया, जिसके बाद राजकिशोर अपनी और जलालत झेलने के बजाय पार्टी को छोड़ना बेहतर समझा। पहले राजकिशोर के भाई का एमएलसी का टिकट काटना, फिर मंत्री पद छीन कर बर्खास्त करना और फिर लोकसभा का भी टिकट काट देना । कभी राजकिशोर से सपा गुलजार हुआ करती थी, न्याय मार्ग पर राजकिशोर सिंह का काफिला आते ही सपाइयों से गुलजार हो जाया करता था लेकिन आज वो सूना पड़ा है। खुद राजकिशोर भी अब बस्ती में एक्टिव नजर नहीं आते हैं।
राजकिशोर सिंह का राजनीतिक सफर
बाहुबली मंत्री राजकिशोर सिंह के राजनीतिक सफर की शुरूआत एपीएनपीजी डिग्री कॉलेज से छात्र नेता के तौर पर हो गई थी। इसके बाद वर्ष 2002 में पहली बार वे जिला पंचायत सदस्य बने। इसी वर्ष वे उपाध्यक्ष का चुनाव भी लड़े मगर हार गये। जिला पंचायत सदस्य रहते उन्होंने बीएसपी के टिकट पर हरैया से चुनाव लड़ा और वे जीत भी गये।
वर्ष 2003 में बसपा के बागी विधायक के रूप में वे मुलायम सिंह के साथ जा मिले और उनके मंत्रिमंडल में पहली बार कैबिनेट मंत्री बने। कैबिनेट मंत्री रहते उन्होने अपनी मां को जिला पंचायत अध्यक्ष बनवाया और जब 2007 में चुनाव हुये तो सपा की सरकार तो नहीं बनी मगर वे दूसरी बार विधायक बनने में कामयाब हुए। बसपा के शासन काल में राजकिशोर सिंह के भाई डिंपल जेल गये फिर उनके उपर गैंगस्टर एक्ट भी लगा।
इसके बाद 2012 में जब सपा की सरकार आई तो विधायक बनते ही राजकिशोर सिंह सबसे कद्दावर मंत्री के रूप में उभरे। राजकिशोर सिंह लगातार 2003 में उद्यान मंत्री, 2007 में भी उद्यान विभाग के मिनिस्टर बने और 2012 में भी कुछ दिन उद्यान मंत्री रहने के बाद सीएम ने उन्हे पंचायतीराज, लघु सिंचाई और पशु पालन जैसे महत्वपूर्ण विभाग सौंपे। इतना ही नहीं पूरे जिले में राजकिशोर के नाम का सिक्का चलता रहा है और डीएम, एसपी से लेकर थानेदार तक की पोस्टिंग व ट्रांसफर में उनकी दखलअंदाजी रहती थी। राजकिशोर ने सत्ता के बल पर अपने बेटे को जिला पंचायत का अध्यक्ष और भाई को उर्जा विभाग का सलाहकार बनवाने में प्रदेश के दूसरे सबसे बड़े समाजवादी परिवार कहलाने लगे।
BY- SATISH SRIVASTAVA
Updated on:
06 Sept 2019 07:32 pm
Published on:
06 Sept 2019 07:31 pm
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