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एंटी एजिंग क्रीम के पांच तत्त्व रखें आपको जवां व सुंदर

40 पार महिलाएं अपनी बढ़ती उम्र के प्रभाव को छुपाने और कम करने के लिए सबसे ज्यादा एंटीएजिंग क्रीम का इस्तेमाल करती हैं।
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जयपुर

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Shankar Sharma

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Updated: 24 Apr 2018, 12:13 AM IST

एंटी एजिंग क्रीम के पांच तत्त्व रखें आपको जवां व सुंदर


फिल्मी सितारों की देखादेख आजकल उम्रदराज और 40 पार महिलाएं अपनी बढ़ती उम्र के प्रभाव को छुपाने और कम करने के लिए सबसे ज्यादा एंटीएजिंग क्रीम का इस्तेमाल करती हैं। हालांकि इन क्रीम या लोशन को त्वचा के अनुसार लगाएं तो काफी असर करते हैं। बिना कॉस्मेटोलोजिस्ट की सलाह के प्रयोग में लेने पर दुष्प्रभाव हो सकता है।

5 तत्त्व हैं अहम

रेटिनॉल
यह तत्त्व एक तरह से विटामिन-ए का प्राकृतिक रूप है जो त्वचा को टाइट रखता है। इससे ढीली पड़ चुकी त्वचा में सुधार आता है। इस तत्त्व के दुष्प्रभाव अधिक होने से अक्सर विशेषज्ञ इस तत्त्व की क्रीम को डॉक्टरी सलाह से प्रयोग करने के लिए कहते हैं। खासकर गर्भावस्था के दौरान रेटिनॉल युक्त क्रीम इस्तेमाल नहीं करनी चाहिए वर्ना शिशु में बर्थ डिफैक्ट्स हो सकता है।

रेस्वेराट्रॉल
यह एक प्लांट कंपाउंड है जो सप्लीमेंट्स के अलावा रेड वाइन में भी होता है। जर्नल सेल मेटाबॉलिज्म की रिपोर्ट के अनुसार सीमित मात्रा में रेड वाइन पीना डायबिटीज व हृदय रोगों की आशंका कम करता है। यह तत्त्व त्वचा को तरोताजा रखता है।

एंटीऑक्सीडेंट्स
देशी और विदेशी सभी शोध मानती हैं कि एंटीऑक्सीडेंट्स का काम फ्री रेडिकल्स से क्षतिग्रस्त हुई कोशिकाओं को बचाना है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हैल्थ के अनुसार एंटीऑक्सीडेंट्स में बीटाकैरोटीन, विटामिन-ए, सी, ई, लाइकोपीन व सेलेनियम तत्त्व होते हैं जो कई पौष्टिक खाद्य सामग्री जैसे फल, सब्जी, सूखे मेवों आदि से प्राप्त होते हैं।

अल्फा हाइड्रॉक्सी एसिड
यह फल और मिल्क शुगर में मौजूद होता है। झुर्रियों, मुहांसों और बढ़ती उम्र के असर को कम करने में उपयोगी सभी क्रीम और लोशन में यह तत्त्व प्रमुख रूप से होता है। यह त्वचा के कोशिकाओं की सफाई कर नई कोशिकाओं का विकास करता है। यह त्वचा की निचली से निचली परत पर असर कर जड़ से सफाई करता है। इससे ही धूप के संपर्क में आते ही त्वचा पर जलन होती है। इसलिए विशेषज्ञ एंटीएजिंग क्रीम के बाद सनस्क्रीन लोशन लगाने की सलाह देते हैं।

पेप्टाइड्स (एक खास प्रकार का प्रोटीन)
उम्र बढऩे के साथ ही त्वचा पतली होने लगती है और इसमें मौजूद फैट धीरे-धीरे कम हो जाता है। शरीर कॉलेजन और इलास्टिन तत्त्वों का निर्माण कम करता है। ये तत्त्व त्वचा को कोमल, मुलायम और आकर्षक दिखाते हंै। ऐसे में स्किन के प्रकार के अनुसार चुनी गई सही एंटीएजिंग क्रीम या लोशन में पाया जाने वाला पेप्टाइड प्रोटीन त्वचा की पुरानी कोशिकाओं की मरम्मत करने के साथ ही नई व ऊर्जावान कोशिकाओं का निर्माण करता है जिससे त्वचा ढीली नहीं पड़ती।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।