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गलियां हुई बाजार, जीवन हुआ लाचार

शहर में बडी संख्या में गलिया, परकोटे के अंदर पाली बाजार की इर्द-गिर्द की गलियों में बाजार हुए विकसित, व्यवस्थाओं में सुधार के नही हुए प्रयास, इससे शहर की सुंदरता एवं आमजन की सहुलियत हुई प्रभावित

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गलियां हुई बाजार, जीवन हुआ लाचार

गलियां हुई बाजार, जीवन हुआ लाचार

ब्यावर. शहर की आबादी व क्षेत्रफल का विस्तार जिस तेजी से हुआ। उसी गति से शहर की गलियों में बाजार विकसित हो गए। गलिया सकडी होने के बावजूद व्यापार फलता-फूलता रहा। ऐसे में गलियों में बैठकर महिलाओं के आपस में बतियाने एवं बच्चों के खेलने का दौर बीते जमाने की बात हो गई। गलियों में बाजार विकसित हो गए तो दुकान के बाहर पाटियां एवं सीढियां और लगा दी। इससे गलियां इतनी सकरी हो गई इससे तिपहिया वाहन गली में आ जाए तो पीछे वाहनों की कतार लग जाए।ब्यावर शहर को बसाया गया तो पाली बाजार, कपड़ा बाजार, ऊन बाजार, तेजा चौक, अग्रसेन बाजार, फतेहपूरिया चौपड क्षेत्र में बाजार विकसित किए गए। इन बाजारों की सड़कों की चौडाई करीब चालीस फीट करीब थी। लेकिन अब इनकी भी चौडाई कम होने लग गई है। दुकानों के बाहर पाटियां लगाने पर भी नगर परिषद तह बाजारी शुल्क वसूल किया करती थी। यह व्यवस्था भी अब बंद कर दी। जबकि शहर की दुकानों नालों के पीछे थी। अब नालों पर भी निर्माण कर दिया गया। नगर परिषद ने नालों का बेचान करने से बाजार और सकरे हो गए। करीब बीस साल पहले तक नालों पर पक्का निर्माण नहीं कर सकते थे लेकिन अब पूरे नालों पर पक्का निर्माण हो चुका है। अब शहर की आबादी बढी तो आवश्यकताओं में भी इजाफा हुआ। इसके चलते बाजार में ग्राहकी बढी तो गलियों में दुकानें खुलना शुरु हो गई। गलियां पहले से ही सकरी थी एवं दुकाने खुली तो गलियां सकरी हो गई एवं यातायात का दबाव भी बढ गया।

इन गलियों में हो गए बाजार विकसित

खजांची गली, गोदावरी स्कू ल मार्ग, बजारी गली, आर्य समाज गली, ओडान चौक, गोवर्धननाथ मंदिर गली, चमन चौराहा, पिपलिया बाजार, सनातन स्कू ल मार्ग, नृसिंह मंदिर गली, डिग्गी स्कू ल मार्ग वाली गली, माधोपूरिया मोहल्ला, विनोदीलाल गली, हलवाई गली, चम्पानगर सहित अन्य गलियों में बाजार विकसित हो गए। जहां दिनभर आवाजाही का दबाव रहता है।

जमीनी हकीकत से नहीं सरोकार

प्रशासन का जमीन हकीकत से सरोकार नही है। शिकायत या ज्ञापन पर महज कार्रवाई होती है। आमजन की समस्या एवं आमजन की आवश्यकता को लेकर प्रशासन की ओर से जमीनी हकीकत को कभी टटोला ही नहीं गया। जबकि पूर्व में आए आईएएस अधिकारी अरविंद मायाराम, डॉ.़ एम.़के.़ खन्ना, जे.पी.़सिंह एवं पूर्व सभापति चिम्मनसिंह शहर का पैदल भ्रमण कर समय-समय पर जानकारी लेते रहते थे। अब प्रशासन की ओर से ऐसी न तो कोई पहल की जाती है एवं न ही जमीनी हकीकत को टटोलने को लेकर सामूहिक प्रयास नहीं किए जा रहे है।

गलियों व मोहल्लों के नाम : एक नजर

शहर में कोट गली, बड़ा बास, भाटा की गली, माधोपुरिया मोहल्ला, विनोदी लाल गली, मस्जिद गली, कड़ीवाल पोलकुंदन गली, तम्बाकू गली, गोविन्द गली, गुजरान हथाई, तेलियान मोहल्ला, पिपलिया बाजार, चरखी गली,कटारिया गली,दामोदर पार्क गली, श्रीश्रीमाल गली, खातियान गली, सांई का तकिया गली, अम्बानी गली, शफाखाना वाली गली, बंट गली, बोहरा गली, खटीकान हथाई, खारिया कूआं, रेगरान छोटा बास, बजारी गली,आर्य समाज गली, धोबी गली, गुप्ता गली, हेड़ा गली, फर्श गली, ओड़ान चौक, खजांची गली, सुनारान गली, चरखी गली, रायली कम्पाउंड गली, पुरानी हलवाई गली, डिग्गी चुनपचान गली, लालान गली, नृसिंह गली, गोपालजी मोहल्ला, माधोपुरिया मोहल्ला, डिग्गी मोहल्ला, सरावगी मोहल्ला,सर्राफान मोहल्ला, छीपा मोहल्ला, नला मोहल्ला, कसाबान मोहल्ला, शाहपुरा मोहल्ला, पुरानी रायल टाकिज गली सहित अन्य गलियां शामिल है।