
भगवतदयालसिंह
अमृतकौर चिकित्सालय में खोले गए कुपोषण केन्द्र पर उपचार लेने वाले बच्चों की संख्या नाम मात्र की है। बीते एक साल में यहां पर केवल 60 बच्चों ने उपचार लिया और अभी यहां पर केवल एक बच्चा उपचाररत है। यहां पर कुपोषित बच्चों को भेजने की जिम्मेदारी आंगनबाड़ी केन्द्र की है लेकिन वहां से बच्चों को नहीं भेजा जा रहा।
राज्य सरकार की ओर से कुपोषित बच्चों को उपचार की सुविधा मुहैया कराने के लिए अमृतकौर चिकित्सालय में केन्द्र खोला गया। इस केन्द्र पर बच्चों की संख्या में इजाफा नहीं हो पा रहा है। इसका कारण आंगनबाड़ी केन्द्रों से रेफर होकर आने वाले बच्चे थे। धीरे धीरे आंगनबाड़ी केन्द्रों से बच्चों को रेफर करने का सिलसिला कम होता गया और वर्तमान में स्थिति यह है कि आंगनबाड़ी केन्द्रों से बच्चों को भेजा ही नहीं जा रहा है। यही कारण है कि यहां उपचार के लिए आने वाले बच्चों की संख्या नाम मात्र की है। गत वर्ष यहां केवल 60 बच्चों ने उपचार लिया। वर्तमान में यहां पर केवल एक बच्चा भर्ती है।
सुविधाएं बेहतर फिर भी नहीं आ रहे बच्चे
कुपोषण उपचार केन्द्र में बच्चों को खेलने के लिए खिलौने आदि की व्यवस्थाएं हैं। कुपोषण उपचार केन्द्र पर प्ले एरिया भी पर्याप्त है। यहां पर बच्चे व अभिभावक के रहने व भोजन की व्यवस्था है। इसके बावजूद अभिभावक इस सुविधा का लाभ नहीं उठा रहे हैं। जानकारी का अभाव और आंगनबाड़ी केंद्र की सक्रियता की कमी के कारण जरूरतमंद बच्चे ये लाभ नहीं उठा पा रहे हैं
अभिभावकों को भी मिलती है राशि
कुपोषण उपचार केन्द्र में बच्चे के भर्ती होने पर एक अभिभावक को सौ रुपए प्रतिदिन के हिसाब से राशि का भुगतान अस्पताल प्रबन्धन की ओर से किया जाता है। इसके बावजूद भी कुपोषित बच्चों के उपचार के लिए लोग जागरूक नहीं हैं। यही कारण है कि अस्पताल के केन्द्र में आने वाले बच्चों की संख्या दिन प्रतिदिन घट रही है।
आंगनबाड़ी केन्द्रों से कहां गए बच्चे
अस्पताल प्रशासन का दावा है कि कुपोषण उपचार केन्द्र पर वे ही बच्चे आते हैं, जिनको अमृतकौर चिकित्सालय में चिकित्सकों ने जांच के बाद कुपोषित घोषित किया। महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वो ऐसे बच्चों को केन्द्र पर ले जाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।
कुपोषित बच्चों के चिह्निकरण का कार्य आंगनबाड़ी केन्द्र पर एएनएम की ओर से किया जाता है। कुपोषित बच्चे सामने आए हैं। इन्हें प्रोत्साहित भी किया लेकिन सेंटर पर ले जाने में अभिभावक दिलचस्पी नहीं दिखाते हैं।
नितेश यादव, महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी, ब्यावर
Published on:
30 Jun 2022 11:37 am
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