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गोशालाओं में गायों की मौत, सुनवाई में पूर्व पंजीयक उइके ने गो सेवा आयोग के अध्यक्ष को किया कटघरे में खड़ा, कहा ये नौबत नहीं आती

सरकारी अनुदान प्राप्त गोशालाओं में गायों की मौत के बहुचर्चित मामले की न्यायिक जांच आयोग रायपुर में रविवार को सुनवाई हुई।

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गोशालाओं में गायों की मौत, सुनवाई में पूर्व पंजीयक उइके ने गो सेवा आयोग के अध्यक्ष को किया कटघरे में खड़ा, कहा ये नौबत नहीं आती

भिलाई . सरकारी अनुदान प्राप्त गोशालाओं में गायों की मौत के बहुचर्चित मामले की न्यायिक जांच आयोग रायपुर में रविवार को सुनवाई हुई। गो सेवा आयोग के पूर्व पंजीयक शंकर लाल उइके ने गो सेवा आयोग के अध्यक्ष बिशेसर पटेल को कटघरे में खड़े किया। अध्यक्ष पटेल के शपथ पत्र के प्रति परीक्षण में जांच आयोग के अध्यक्ष एके सामंत रे के समक्ष बयान दर्ज कराया।

नहीं होती पशुधन की हानि
डॉ. उइके ने अपने बयान में कहा कि यदि गो सेवा आयोग संस्था के पत्र पर कार्रवाई की होती तो दुर्ग और बेमेतरा जिले के गोशालाओं में हुई घटना को रोका जा सकता था। पशुधन की हानि भी नहीं होती। पूर्व पंजीयक डॉ. उइके ने अध्यक्ष पटेल से सवाल करते हुए कहा कि किस आधार पर शपथ पत्र में मेरे नाम का उल्लेख किया गया है। जवाब में पटेल ने कहा कि आयोग के पंजीयक थे। इसलिए नाम का उल्लेख किया है।

उइके ने फिर सवाल किया जब दुर्ग और बेमेतरा के गोशालाओं में घटना हुई। तब वह उस विभाग में पदस्थ नहीं थे। ८ अगस्त २०१६ को आयोग से कार्यमुक्त हो गया था। उइके ने पटेल पर फिर सवाल किया कि मेरे बाद आयोग में कितने पंजीयक आए? जवाब में पटेल ने ३ या ४ की संख्या बताई, जिस पर उइके ने कहा कि मेरे कार्यमुक्त होने के बाद चार बार पंजीयक बदले गए।

डॉ राजेन्द्र भगत, डॉ. एसके पाणिग्रही, डॉ.राजीव देवरस और डॉ केके सोनी रजिस्ट्रार बने। जब घटना हुई तब डॉ. देवरस पंजीयक थे। ढाई घंटे तक चली सुनवाई में पूर्व पंजीयक डॉ उइके ने आयोग के अध्यक्ष पटेल पर कई सवाल किए। उनकी कार्य प्रणाली पर सवाल उठाया। उन्होंने जिला जांजगीर चांपा के नंदेली स्थित मां शिदारीन दाई गोशाला को लेकर कहा कि डिप्टी डायरेक्टर ने २४ जनवरी २०१७ को निरीक्षण प्रतिवेदन में मां शिदारीन गोशाला की अव्यवस्था को लेकर पंजीयन निरस्त करने की अनुशंसा की थी।

पुन: निरीक्षण प्रतिवेदन मांगा
योग ने उनके निरीक्षण प्रतिवेदन पर कार्रवाई करने के बजाय डिप्टी डायरेक्टर को पत्र लिखा। पुन: निरीक्षण प्रतिवेदन मांगा गया। दिसंबर २०१६ का अनुदान इसलिए जारी किया गया कि पशुओं के लिए चारा जरूरी है, लेकिन दुर्ग और बेमेतरा जिले के गोशालाओं के लिए अनुदान की मांग किए जाने के बावजूद आयोग ने १४ माह तक अनुदान जारी नहीं किया।

कार्रवाई करते तो यह नौबत नहीं आती
उइके ने संस्था की ओर से आयोग को लिखे गए पत्र को लेकर अध्यक्ष पटेल से सवाल किया कि क्या संस्था ने आयोग को मवेशियों को शिफ्ट करने के लिए कोई पत्र लिखा था। पटेल ने याद नहीं में जवाब दिया। जिस पर उइके ने कहा कि दुर्ग और बेमेतरा जिले के गांशाला संचालक की ओर से १० अप्रेल २०१७ और १० अगस्त २०१७ को दो बार आयोग को पत्र लिखा। पत्र में गोशालाओं से गायों को शिफ्ट करने या फिर अनुदान जारी करने के लिए पत्र लिखा है, ऐसा संस्था के संचालक ने अपने बयान में कहा है।

अगर यह सही है तो आयोग को उसे संज्ञान में लेना था। पंजीयक को निरीक्षण कर आदेश जारी करना था। उन गोशालाओं की गायों को दूसरे गोशालाओं में शिफ़्ट करना था। या फिर निरीक्षण प्रतिवेदन के आधार पर अनुदान जारी किया जाना था। आयोग की ओर से कोई आदेश जारी नहीं किया गया। ऐसी मेरी जानकारी में है। आयोग समय पर कदम उठाया होता तो यह नौबत नहीं आती।