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गांवों में जलसंकट का खतरा: नदियों, तालाब और कुएं सूख रहे, खेती और मवेशियों को नहीं मिल रहा पानी

Chhattisgarh news: प्रदेश में बढ़ रही भीषण गर्मी के दौरान जिले की नदियों का धार टूट चुका है। जिले के शिवनाथ नदी व हेम्प नदी में ही जलभराव है। दोनों नदियो के आलावा डोटू नाला, सकरी, हाफ, सुरही, में जलभराव नहीं के बाराबर है।

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गांवों में जलसंकट का खतरा

गांवों में जलसंकट का खतरा

Bemetara news: प्रदेश में बढ़ रही भीषण गर्मी के दौरान जिले की नदियों का धार टूट चुका है। जिले के शिवनाथ नदी व हेम्प नदी में ही जलभराव है। दोनों नदियो के आलावा डोटू नाला, सकरी, हाफ, सुरही, में जलभराव नहीं के बाराबर है। नदियो के अलावा जिले के बडे़ तालाब व छोटे जलाशयों में जलभराव डेड वाटर से कम हो चुका है। नदी, नाला व बढे़ तालाबो का पानी सुखने की वजह से एक ओर निस्तारी की समस्या व्याप्त होने लगा है वहीं दूसरी ओर मवेशियों के पीने का पानी के लिए जलसंकट की स्थिति है।

बताना होगा कि जिले में जलसंकट बढ़ने लगा है। विशेषकर बारहमासी जलस्त्रोत माने जाने वाले तालाब व पोखर के साथ-साथ नदियों की धार भी अनेक स्थानों से टूट चुका है। नदियों का धार कम होने व टूटने की वजह से निरंतर जलबहाव की स्थिति नहीं होने के कारण टूटे हुए धार के जद में आने वाले गांवो के लिए निस्तारी के संकट की स्थिति है। विभागीय जानकारी के अनुसार मोंगरा बैराज बांध से लोगो की मांग पर शिवनाथ नदी में पानी छोडे़ जाने की वजह से फिलहाल नदी का जलस्तर बढ़ा हुआ है। दूसरी तरफ शिवनाथ नदी पर बने 14 एनीकेटों में से 7 एनीकेट में 90 से 10 फीसदी जलभराव है जिसकी वजह से एनीकेट समीपवर्ती गांवो में निस्तारी व जलस्तर गिरने की समस्या नही है। शेष ऐनीकेटो में 50 से 80 फीसदी जलभराव है जहां पर आने वाले दिनो में निस्तारी की समस्या होने के असार है।


सेमरिया के जलाशय में 20 फीसदी से कम पानी, मुरपार में 50 फीसदी

जिला मुख्यालय से 10 किलोमीटर की दायरे में आने वाले ग्राम सेमरिया के जलाशय में केवल डेड वाटर है। जलाशय का जलभराव करीब 20 फीसदी तक सिमट चुका है। सेमरिया के ग्रामीण हेमन्त पटेल ने बताया कि छोटा जलाशय पर पानी भरे रहने की स्थिति मे निस्तारी की समस्या नहीं होता है। सिरवाबांधा जलाशय का जलस्तर भी कम हो चुका है। ग्राम के जेविड कोशले ने बताया कि जलाशय न केवल सिरवाबांधा बल्कि गांगपुर, जहाजपुर के रहवासियों के लिए उपयोगी है । लोगो की निर्भरता निस्तारी के लिए अधिक है। ग्राम मुरपार के जलाशय में क्षमता की अपेक्षा 50 फीसदी जलभराव है। मुरपार निवासी लखन वर्मा, गया प्रसाद वर्मा ने बताया कि पानी तो कम हुआ है पर और कम होने पर समस्या होगी है। पिकरी जलाशय में केवल 15 फीसदी जलभराव होने से पिकरी ,मानपुर, नवागांव क्षेत्र में निस्तारी की समस्या होने लगा है।

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जलाशयो में पानी कम होेने की वजह पानी चोरी

जानकारो का माना जाये तो जिले के गर्मी के दिने धान की फसल लेने वाले जलाशयों व तालाबों में मोटर पंप से पानी चोरी कर सिंचाई करते है जिसकी वजह से जलाशय में पानी का लगातार घटाव होता है। समय आने पर जलाशय जलभराव नहीं के बराबर होता है।


जलाशयों में डेड वाटर है : शिवहरे

जलसंसाधन विभाग के ई ई सी एस शिवहरे ने बताया कि जिले के एनीकेटो में पर्याप्त जलभराव है इसके आलावा प्रमुख जलाशयो में जलभराव है। वहीं छोटे जलाशयो में सिंचाई के लिए नहीं पर निस्तारी के लिए डेड वाटर है। डेड वाटर से नीचे का आंकलन नहीं किया जाता है।


छोटे जलाशयों में जलभराव कम हुआ

जिले में जलसंसाधन विभाग के पास बेमेतरा ब्लाक में 36 तालाब है जिसमें से वर्तमान में मुरपार, भुरकी के जलाशय में जलभराव है अन्य में डेडवाटर लेबल तक जलभराव है। इसी तरह साजा ब्लाक में 24 छोटे जलाशय व बड़े तालाब है। नवागढ ब्लाक में 24 और बेरला ब्लाक में 9 जलाशय, बेरला ब्लाक के जलाशयो व तालाबों में तांदुला से पानी छोड़े जाने की वजह से जलभराव है । जिले के बेमेतरा ब्लाक के कुसमी, कुरदा, खिलोरा, चारभाठा, झिपनीया, धनोरा, मोहलाईन तालाब, पुटपुरा तालाब, साल्हेधोरी तालाब, मुरकुटा तालाब, परसदा तालाब, एरमशाही तालाब, व लालपुर के तालाब में महज 10 से 40 फीसदी जलभराव है।


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