
जिले में भूजल स्तर 110 फीट गिरा, फसल सिंचाई के लिए हो रहा पानी का दोहन
बेमेतरा. जिले में कई वर्षों से भूमिगत जल स्तर नीचे गिरते जा रहा है। जिले में जनवरी तक भूमिगत जल का स्तर लगभग 110 फीट नीचे चला गया है। भूमिगत जलस्तर गिरने के बाद भी शासन ने कोई पहल नहीं की है। जिले में भूमिगत जल के संरक्षण के लिए पूर्व में ग्रीष्मकालीन धान की ख्ेाती पर रोक लगाई गई थी पर जारी वर्ष में धान को दोहरी फसल पर रोक नहीं लगाई है। रोक के अभाव में पूर्व की अपेक्षा 10 गुना अधिक रकबे पर इन दिनों धान की पैदावारी शुरू कर दी गई है।
गर्मी में सिंचाई के लिए लगता है चार गुना अधिक पानी
जिले में सिंचाई के लिए बांध एवं नहरों की समुचित व्यवस्था नहीं होने से किसान रबि फसल में धान की खेती के लिए भूमिगत जल पर निर्भर हैं और किसान इसका उपयोग भी कर रहे हैं। अन्य फसलों की अपेक्षा धान की फसल में सिंचाई के लिए पानी तीन से चार गुणा ज्यादा लगता है। जिनके चलते भूमिगत जल का दोहन हो रहा है। ऐसे में स्थिति और बिगड़ती जा रही है। आने वाले दिनों में गंभीर पेलजल संकट उत्पन्न हो सकता है। ऐसे में प्रशासन को गंभीर पेयजल संकट वाले क्षेत्र को चिन्हांकित कर धान की जगह अन्य फसल लेने के लिए प्रेरित करना चाहिए।
पैदावारी ज्यादा होने एवं समर्थन मूल्य बढऩे से मुनाफा ज्यादा
किसानों ने रबी सीजन में धान कि अर्ली वैरायटी कीबोनी की जाती है। जानकारों की माने तो खरीफ सीजन के जैसे ही उत्पादन मिलता है। पैदावारी ज्यादा होने से किसानों को लाभ ज्यादा हेाता है। एक कारण यह भी है कि नई सरकार ने धान का समर्थन मूल्य बढ़ा दिया है। ऐसे में बाजार में भी बेचने पर फसल की अच्छी कीमत मिल सकती है। जिसके कारण किसान रबी सीजन में भी धान की फसल लेने आगे हैं।
जलस्तर गिरने से जिले के 72 गांवों के हैंडपंप बंद
बेमेतरा पीएचई के ईई परीक्षित चौधरी ने कहा कि जिले में जलस्तर कम होते जा रहा है। ऐसे में भूमिगत जल संरक्षण के लिए कारगर प्रयास करना जरूरी है। 72 गांवों के हैंडपंप से पानी आना बंद हो चुका है। पूर्व में जिले में भूमिगत जल के संरक्षण के लिए ग्रीष्मकालीन धान की पैदावारी पर रोक लगाई गई थी, जिसका सार्थक परिणाम भी सामने आया था पर इस बार उदासीनता बरती गई है। जिससे पूर्व की अपेक्षा गर्मी का धान का रकबा में दस गुना से अधिक बढ़ गया है जो और बढ़ते जा रहा है।
रोक नहीं होने से कई गुना ज्यादा दोहन
कृषि विभाग से मिले आंकड़े के अनुसार अभी तक जिले के चारों ब्लॉक मिलाकर लगभग साढ़े 12 हजार एकड़ में धान की बोनी हो चुकी है। और बोनी जारी है ऐसे में आंकड़े और बढ़़ सकते हैं। बीती बारिश में भी औसत से कम बारिश होने के कारण भूमिगत जल पर्याप्त रिचार्ज नहीं हुआ है। जिले के कृषि अधिकारी शशांक शिंदे ने बताया कि बीते वर्ष शासन से निर्देश मिलने के कारण धान की फसल पर रोक लगी थी, जिसके कारण रबी सीजन में धान का रकबा काफी कम था और नदी किनारे के गांव में लगभग 1 हजार एकड़ में ही बोनी हुई थी, लेकिन इस बार अभी तक लगभग साढ़े 12 हजार एकड़ में धान की बोनी हो चुकी है। शशांक शिंदे ने बताया कि किसानों को कम पानी वाले दलहन व तिलहन फसल, जिनमें मूंग, उड़द, तिल, सरसों, कुसुम की फसल लेने कहा जा रहा है। साथ ही धान की फसल लेने वाले किसानों को खेतों में खुला पानी छोडऩे की बजाय पाइप नोजल के माध्यम से पानी देने कहा गया है।
Published on:
01 Feb 2019 07:20 am
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