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जानिए, हमारे पूर्वज आखिर कुओं के संरक्षण को महत्व क्यों देते थे

आरओ प्लांट व हैंडपंप ने साथ छोड़ा तब सूखे तालाब के बीच का कुआं बना गर्मी में सहारा

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जानिए, हमारे पूर्वज आखिर कुओं के संरक्षण को महत्व क्यों देते थे

बेमेतरा. भीषण गर्मी के कारण जिले के घठोली, आंदू, पेंड्रीतराई, झिरिया, सिंगपुर सहित अन्य गांवों में जलसंकट से पेयजल और निस्तारी की समस्या विकराल रूप लेने लगी है। पानी के लिए इन गांव के लोगों को जहां रोजाना लंबा सफर करना पड़ रहा है, वहीं तालाबों में पानी नहीं होने से मवेशियों को भटकना पड़ रहा है। ग्राम आंदू के ग्रामीण अर्से से खारे पानी की समस्या से प्रभावित हैं। गांव के लोगों की निर्भरता गांव के सूखे तालाब के बीच में बने कुएं पर है, जहां पानी भरने वालो की भीड़ दिन-रात बनी रहती है। खारे पानी की समस्या से निजात दिलाने गांव में लगाए गए दो आरओ प्लांट में से एक तो कई महीनों से बेकार हो चुका है।
9 लाख 85 हजार के प्रस्ताव को स्वीकृति का इंतजार
स्थिति को देखते हुए ग्राम आंदू में मीठा पानी उपलब्ध कराने घठोली गांव से पाइप लाइन लगाकर पेयजल उपलब्ध कराने के लिए 9 लाख 85 हजार रुपए का प्रस्ताव तैयार प्रस्ताव अधीक्षक, लोक स्वास्थ यांत्रिकी विभाग को फरवरी माह में प्रस्तुत भी किया जा चुका है, लेकिन आज तक प्रस्ताव को स्वीकृति का इंतजार है। मामले पर संरपच चंदाबाई, गयाराम गेंड्रे, भारत लाल, मनहरण विजय ने बताया कि गांव में बीते तीन महीने से पेयजल संकट है। ऐसी स्थिति में घठोली से पानी लाकर देने के लिए प्रयास किया जा रहा है, जिससे ग्रामीणो को राहत मिल सके।
झिरिया में वर्षों से बना है जलसंकट
ग्राम झिरिया में मीठा जल पहुंचाने पानी टंकी बनाया गया है, जहां से पानी सप्लाई करने के लिए पूरे गांव में पाइप लाइन का विस्तार कर सार्वजनिक नल लगाया गया है, लेकिन पानी टंकी से ही पानी नहीं निकल रहा है। ग्रामीण सुशील, रतिराम, केदार साहू, घनश्याम ने बताया कि हम लोगों ने पंचायत में अमानत राशि जमा कर नल कनेक्शन लिया है, लेकिन नलों में पानी नहीं आ रहा है। इसके बारे में विभाग को जानकारी देते-देते थक चुके हैं, लेकिन पाइप लाइन को अभी तक दुरुस्त नहीं किया गया है। पीएचई विभाग पेयजल समस्या की अनदेखी कर रहा है। वहीं विभाग के जिम्मेदार फंड का रोड़ा होना बता रहे हैं।
जलस्तर नीचे गिरने से बंद हुआ हैंडपंप
ग्राम पेंड्रीतराई के वार्ड नं 03 में लगे हैण्डपंप से जलस्तर गिर जाने से पानी का निकलना बंद हो गया है। ऐसी स्थिति में वार्ड में पेयजल की गंभीर समस्या है। वार्डवासियों ने संकट को देखते नया बोर खनन कर उसमें पावर पंप डालने की मांग की है। जिले में पेयजल संकट के पीछे सबसे अहम कारण जलस्तर का गिरना माना जा रहा है। जिले में जलस्तर गिरने के कारण 1780 हैंडपंप बेकार हो चुके हैं, वहीं 6 नल जल योजना प्रभावित हो चुका है। जिले के 100 आरओ प्लांट में से 41 बंद हैं, जिसमें से 25 आरपो प्लांट जलस्तर गिरने के कारण बेकार साबित हो रहे हैं। इसके साथ ही जिले में लगाए गए 89 सोलर पंप में से 6 गांवों में लगाए गए सोलर पंप जल स्तर गिरने के कारण बंद पड़े हैं।