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Panchayat politics: महिला सरपंच के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित, पंचायत राजनीति में मचा हड़कंप

Panchayat meeting: लंबे समय से चल रहे विवाद और कार्यशैली को लेकर नाराज सदस्यों ने बैठक में मतदान किया, जिसमें बहुमत सरपंच के विरोध में रहा।

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Panchayat politics

महिला सरपंच के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित (Photo AI)

Panchayat Politics: बेमेतरा जिले में ग्राम पंचायत की राजनीति में बड़ा उलटफेर सामने आया है। पंचायत सदस्यों ने महिला सरपंच के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित कर दिया, जिसके बाद गांव की सियासत गरमा गई है। लंबे समय से चल रहे विवाद और कार्यशैली को लेकर नाराज सदस्यों ने बैठक में मतदान किया, जिसमें बहुमत सरपंच के विरोध में रहा। अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के बाद अब पंचायत में नए नेतृत्व को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

Panchayat Politics: 13 पंचों ने एकमत होकर मतदान किया

जानकारी के अनुसार नवागढ़ ब्लॉक की ग्राम पंचायतों में सरपंचों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया शुरू हो गई है। ग्राम पंचायत धौराभाट खुर्द की सरपंच पावित्री काटले के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव सोमवार को पारित हो गया। 13 पंचों ने एकमत होकर प्रस्ताव के समर्थन में मतदान किया।

सरपंच पर चार बिंदुओं में आरोप

ग्राम पंचायत के 13 पंचों ने सरपंच पर चार बिंदुओं में आरोप लगाते हुए 13 मई को एसडीएम कार्यालय नवागढ़ में अविश्वास प्रस्ताव का आवेदन दिया था। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत सोमवार को पीठासीन अधिकारी एवं तहसीलदार नवागढ़ पंचायत भवन पहुंचे और मतदान प्रक्रिया संपन्न कराई। सरपंच इस प्रक्रिया के दौरान उपस्थित नहीं रहीं।

फंड नहीं मिला तो 56 सरपंचों ने छोड़ दी कुर्सी

कांकेर जिले के अंतागढ़ ब्लॉक से बड़ी प्रशासनिक और राजनीतिक खबर सामने आई है। विकास कार्यों के लिए लंबे समय से फंड जारी नहीं होने से नाराज 56 ग्राम पंचायतों के सरपंचों ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया है। इस फैसले के बाद इलाके की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। जानकारी के मुताबिक, अंतागढ़ ब्लॉक की सभी 56 ग्राम पंचायतों के सरपंच पिछले कई महीनों से पंचायतों के विकास कार्यों के लिए पर्याप्त बजट जारी करने की मांग कर रहे थे। सरपंचों का कहना है कि फंड के अभाव में गांवों में जरूरी बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कार्य ठप पड़ गए हैं।

सामूहिक इस्तीफे से प्रशासन पर बढ़ा दबाव

56 सरपंचों के एक साथ इस्तीफा देने के फैसले ने प्रशासन पर दबाव बढ़ा दिया है। इसे पंचायत स्तर पर गहराते असंतोष का संकेत माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह मामला आने वाले दिनों में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।