
बेमेतरा. एक दशक से फर्जी दस्तावेजों के सहारे साजा जनपद के विभिन्न स्कूलों में नौकरी कर रहे 11 शिक्षाकर्मियों के खिलाफ शुक्रवार को पंचायत विभाग के टीमक वर्मा की रिपोर्ट पर धारा 420, 467, 468 व 471 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। मामले में अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। इससे पूर्व इन शिक्षाकर्मियों को वर्ष 2016 के दौरान बर्खास्त किया जा चुका है। मामले में साजा जनपद पंचायत सीईओ एआर साहू को भी निलंबित किया गया है।
वर्ष 2007-08 में हुई शिक्षाकर्मियों की भर्ती के11 वर्ष बाद पंचायत विभाग की ओर से 11 शिक्षाकर्मियों पर फर्जीवाड़ा का प्रकरण दर्ज कराया गया है। इनमें मोती राम निषाद, देवी नोरंगे, नुकेश कुमार साहू, रोमन लाल विश्वकर्मा, नारायण दास डेहरे, संतराम साहू, भुवनेश्वरी साहू, अरुण कुमारी, चंदा सिंहा, सुनीति जंघेल, कमलेश्वरी साहू पर एनसीसी, डीएड, खेलकूद सहित कई प्रमाण पत्र, जिस पर भर्ती के दौरान बोनस अंक दिया जाना था, फर्जी तरीके से बनवाकर प्रस्तुत किए जाने पर प्रकरण दर्ज कराया गया है।
शासन को लाखों का चूना लगाया उसका क्या
जानकारों का कहना है कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए शिक्षाकर्मी बनने वालों ने शासन को लाखों रुपए का चूना लगाया है। इससे नौकरी पाने के योग्य उम्मीदवारों का हक मारा गया है। एफआईआर दर्ज करने के बाद अब इन शिक्षाकर्मियों द्वारा उठाई गई तनख्वाह की भी रिकवरी करनी चाहिए।
चयन समिति और छानबीन समिति पर मेहरबानी क्यों
फर्जी दस्तावेजों के सहारे नौकरी कर रहे शिक्षाकर्मियों पर एफआईआर तो दर्ज कर दिया गया, लेकिन सवाल यह भी है कि इन्हें नियुक्ति देने वाली साजा जनपद की चयन समिति और छानबीन समिति को क्यों छोड़ दिया गया, जिन पर दस्तावेजों के परीक्षण की जिम्मेदारी थी।
फर्जी दस्तावेजों का लिया सहारा
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एस. आलोक ने बताया कि वर्ष 2007-08 के तहत भर्ती हुए शिक्षाकर्मियों द्वारा फर्जी प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया गया था। उन्होंने बताया कि पुलिस थाने द्वारा इनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराया गया है। जिला प्रशासन की इस कड़ी कार्रवाई से फर्जी तरीके से भर्ती हुए शिक्षाकर्मियों में हड़कंप की स्थिति है।
साजा थाना प्रभारी राजकुमार राणा ने बताया कि वर्ष 2007 में फर्जी तरीके से भर्ती हुए 11 शिक्षाकर्मियों के खिलाफ धारा 420, 467, 468, 471 के तहत मामला दर्ज किया गया है, लेकिन अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं की गई है, आने वाले दिनों में पतासाजी कर कार्रवाई की जाएगी।
साजा जनपद के अंतर्गत विभिन्न विद्यालयों में पदस्थ ग्यारह शिक्षाकर्मियों की भर्ती प्रक्रिया फर्जी पाए जाने पर कलक्टर कार्तिकेया गोयल ने सभी के विरुद्ध थाने में एफ.आईआर दर्ज करने के निर्देश दिए थे। कलक्टर के निर्देश के बाद तहसीलदार प्रवीण कुमार तिवारी और साजा जनपद पंचायत सीईओ अनिता जैन के निर्देश जनपद के शिक्षा विभाग प्रभारी टीकम चंद वर्मा ने साजा थाने में इन शिक्षाकर्मियों के विरुद्ध एफ.आईआर दर्ज करवाया है।
48 घंटे में दर्ज हो पाया थाना में मामला
जानकारी के अनुसार, गुरुवार को सुबह 11 बजे से दस्तावेजों के साथ पंचायत विभाग का स्टाफ साजा थाना पहुंचकर प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने के लिए जुटा हुआ था, लेकिन देर रात तक मामला दर्ज नहीं किया जा सका था, जिसके बाद शुक्रवार को दोपहर में मशक्कत करने के बाद आपराधिक मामला दर्ज किया गया।
बताना लाजमी होगा कि वर्ष 2016 के दौरान सभी शिक्षाकर्मी वर्ग 3 को जनपद पंचायत द्वारा बर्खास्त किया गया था, जिसके दो वर्ष बाद प्रकरण दर्ज कराया गया है, जिसे देखते हुए पंचायत विभाग के संलिप्ततों को बचाने के बाद प्रकरण दर्ज कराने की बात कही जा रही है। प्रकरण को लेकर एक बार फिर से जांच करने की मांग उठने लगी है, जिसमें और संलिप्ततों का चेहरा सामने आने की संभावना है।
शिक्षाकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के मामले में साजा जनपद पंचायत अध्यक्ष ओमप्रकाश वर्मा का कहना है कि सदन में समान्य प्रशासन विभाग ने प्रकरण की एक फिर से जांच करने के प्रस्ताव का अनुमोदन किया था, जिसे नजरअंदाज कर अधिकारियों ने प्रकरण दर्ज करा लिया है। प्रकरण अभी भी कमिश्नर न्यायालय में जारी है, ऐसे में मामला दर्ज कराया है। उन्होंने ने सवाल उठाया कि बेरला जनपद में 80 शिक्षाकर्मियों को बर्खास्त किया गया था, लेकिन आज दो वर्ष बाद भी प्रकरण दर्ज नहीं कराया गया है।
साजा में दोबारा जांच करने की मांग को नजरअंदाज कर थाने में अपराध दर्ज कराया गया है, तो फिर बेरला मामले को लेकर भी जिम्मेदारों को इस तरह से कदम उठाए जाने की जरूरत है। बताना होगा कि जनपद पंचायत सीईओ अनिता जैन एक साथ दो जनपद पंचायत बेरला और साजा की जिम्मेदारी उठाए हुए हैं। एक ही तरह के दो प्रकरण में एक पर प्रकरण दर्ज कराया गया है, वहीं दूसरे पर कार्रवाई को लेकर बरती जा रही उदासीनता पर सवाल उठाए जाने लगे हैं।
ये है पूरा मामला
वर्ष 2007-08 में बेमेतरा अनुभाग के अंतर्गत न केवल साजा बल्कि बेमेतरा, नवागढ़ और बेरला जनपद के माध्यम से शिक्षाकर्मियों की फर्जी दस्तावेजों के जरिए हुई भर्ती न केवल न केवल अविभाजित दुर्ग जिला बल्कि पूरे प्रदेश में छाया रहा। मामले में अविभाजित दुर्ग जिले के तत्कालीन कलेक्टर सुब्रत साहू ने जांच का जिम्मा बेमेतरा एसडीएम ओपी चौधरी (प्रशिक्षु आईएएस) को सौंपा था, जिन्होंने जांच के बाद कलेक्टर को प्रतिवेदन सौंप दिया था।
इसके बाद केवल नवागढ़ जनपद में ही न केवल शिक्षाकर्मियों के खिलाफ बल्कि चयन समिति और छानबीन समिति के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज कराया गया था। बेमेतरा जनपद में छुट-पुट कार्रवाई हुई थी। वहीं साजा और बेरला जनपद में किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं हुई थी। मामले में शिकायतकर्ताओं के लगातार दबाव की वजह से साजा जनपद में हो रही छुटपुट कार्रवाई के बाद अब जाकर एकमुश्त 11 शिक्षाकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया
गया है।
Updated on:
07 Apr 2018 05:19 pm
Published on:
07 Apr 2018 12:05 pm
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